Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 9, 2015

इतना डर


1 सीरिया में हो रहे नरभक्षक युद्ध का यह हाल है कि अब मासूम बच्चे एक मामूली से कैमरे को देखकर भी डर के कारण रोने लगते हैं ;क्योंकि उन्हें पता है कि जब कोई ऐसी लैंस लगी चीज सामने होती है; तो वो केवल हथियार होती है, जिससे उन्हें या किसी को भी मौत के घाट उतारा जा सकता है । जिस फोटोग्राफर ने ये तस्वीर ली थी, उसे पता भी नहीं था कि उसका कैमरा देखकर 4 साल की सीरियाई बच्ची इतना डर जाएगी कि समर्पण की मुद्रा में हाथ ख्रड़े कर देगी । जब फोटोग्राफर अपने फोटो को  सम्पादित करने में व्यस्त था तो उसके सामने खड़ी बच्ची उस कैमरे को एक हथियार समझ बैठी और डर के कारण सिसकते हुए रोने लगी और अपने हाथ समर्पण की मुद्रा में खड़े कर दिए ।

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Responses

  1. हरदीप जी बहुत ही मार्मिक दृश्य व हाइगा ….दिल भर आया
    क्यों हम प्रेम प्रीत से नहीं रह सकते ?

  2. दिल को छू लिया इस रचना ने!
    The image and the text wonderfully compliment each other!
    डॉ. संधु, धन्यवाद! शुभकामनाएँ!

  3. ओह! कितना दुःखद ! बेचारे प्यारे-प्यारे बच्चे क्या कुछ नहीं झेल रहे…
    सच में ! दिल भर आया देखकर …
    हाइगा उम्दा! हाइगा का चित्र अत्यंत प्रभावी।

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. prem -sar mein, faili hai jalkhumbi,hinsa nam ki’.brbarta ka koi deen-eeman nahin hota dil ko dahalane vale barbar kritya ka bhuut kattarpanthiyon ke sar par nachkar samvedanajanya karuNa ko bhi rula raha hai.bahan sandhu ji apake haiku ne haiga ka jo dard ubhara hai man -sarita mein sunami lane vala hai. apaki lekhni ko naman.
    pushpamehra.

  5. Very poignant indeed…
    The image and the text so wonderfully compliment each other!
    Best wishes, Dr. Sandhu:)

  6. दिल हिला देने वाला, बेबसी दिखाता चित्र और संवेदना जगाती रचना .आपकी सर्जनात्मकता को, संधू जी नमन. सुरेन्द्र वर्मा

  7. uf aapne to aamkhen nam kardin kitni pyari bachchi hai
    aapne likha bhi bahut sunder hai jo ki sach bhi hai
    rachana

  8. बहुत सुन्दर चित्रण, सन्धु जी |

  9. sundr haigaa

  10. मर्मस्पर्शी …सामयिक ..युद्ध की विभीषिका को व्यक्त करता प्रभावी हाइगा !

    आपकी संवेदनशीलता को नमन बहन हरदीप जी !

  11. रुला देती है यह तस्वीर और इस पर रचित हाइकु |

    शशि पाधा

  12. bahut hi marmsparshee haiga …naman hai aapke komal bhaavon kohardeep ji ..

  13. युद्ध के पक्षधरों को क्या ऐसे मार्मिक दृश्य भी कभी विचलित नहीं कर पाते…?
    हरदीप जी के भावुक ह्रदय ने बहुत गहराई से इस बात को महसूस किया है | अपने हाइकु के माध्यम से उन्होंने जैसे सब कुछ कह डाला…| साधुवाद !


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