Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 7, 2015

मिट्टी से गवाही


हरकीरत हीर

[स्याह कपड़ों में लिपटे हुए शब्द अचानक मेरी तरफ़ बढ़ने लगते हैं। कोई गहरा सा एहसास देह में दर्द सा रिसने लगता है ।मैं मुहब्बत की बात करती हूँ ,वो आँधियों -बवंडरों की बात करता है । मैं मिट्टी से गवाही माँगती हूँ वो अर्थी सजाता है,मैं दुआओं का फूल लेकर दरगाह पे जाती हूँ   कि शायद मुक़ददर की चटखनी कोई खोल दे और बदनसीबियों का मौसम बदल जाए ]

1

किसने उड़ाया

ये ख़ामोशी का रंग

आसमाँ रोया।

2

चंद यादें थीं

जो समेट लाई हूँ

दर्द के साथ।

3

गिरी थी बर्फ़

फासलों के दरम्यां

दूर थे हाथ।

4

दर्द के ख़्वाब

पलकों पे ठहरे

बनके मोती।

5

कैसी थी भूल

गिर गए हाथों से

दुआ के फूल।

6

तमाम उम्र

लिखती रही नज़्म

शब्द न हँसे।

7

झाड़ती रही

देह, दर्द की राख़

उम्र न हँसी।

8

जलाती रही

मैं देह का सूरज

रात न हँसी।

9

बीजती रही

मुहब्बत के बीज

इश्क़ न उगा।

10

उम्र की चिट्ठी

लिख दी तेरे नाम

देना पैगाम।

11

धुँआ-धुँआ- सी

अधजली -सी रातें

तलाक माँगें।

12

दर्द ने सिये

ख़ामोशी के धागों से

इश्क के ज़ख़्म।

13

रख गया है

जाने कौन ये फूल

रोयेगी क़ब्र।

-0-

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Responses

  1. भीगे हाइकु
    बूँद बूँद रिसती
    हीर की पीर। ।
    भावभीनी अभिव्यक्ति ।

  2. गज़ब बेहतरीन!

  3. sbhi gaharai lie hue .

  4. दर्द की इंतेहा बयाँ करते सभी हाइकु ! एक से बढ़कर एक! शब्द ही नहीं हैं कि इनकी तारीफ़ में कुछ कह सकें…
    ‘तमाम उम्र
    लिखती रही नज़्म
    शब्द न हँसे।’ —यही सार है!

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. सभी हाइकु बेहतरीन हैं। हरकीरत हीर जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  6. aabhar aap sabhi ka …..meri klam ko skun mila ….

  7. 1
    उम्र की चिट्ठी
    लिख दी तेरे नाम
    देना पैगाम।
    2
    किसने उड़ाया
    ये ख़ामोशी का रंग
    आसमाँ रोया।
    हरकीरत जी बहुत ही गजलमय हाइकु …बधाई !

  8. हरकीरत जी, एक -एक हाइकु में सारे जहां का दर्द समेटा है आपने | इतनी संवेदनशील रचनात्मकता को नमन |

    शशि पाधा

  9. कैसी थी भूल
    गिर गए हाथों से
    दुआ के फूल।

    kya baat kahi hai aapne bahut gahan payari si dua si bahut bahut badhai….

  10. sabhi haiku man ki ghani peeda se bhare hain aur rachana -saundary bhi darsha rahe hain.har keerat ji sundertam haiku hetu badhai.
    pushpa mehra.

  11. रख गया है
    जाने कौन ये फूल
    रोयेगी क़ब्र।khoobsurat ,behatreen.badhai heer jee.

  12. दर्द के ख़्वाब
    पलकों पे ठहरे
    बनके मोती।
    bahut sunder bhav
    badhai
    rachana

  13. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक …..

    रख गया है
    जाने कौन ये फूल
    रोयेगी क़ब्र।……अद्भुत अभिव्यक्ति !!

    आपके संवेदनशील मन को ,कलम को नमन हीर जी !!

  14. बहुत सुन्दर…सब हाइकु जैसे दिल तक पहुँचते हैं सीधे…|
    बहुत बधाई…|


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