Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अप्रैल 6, 2015

यादों के तार


SAVITRI CHANDRAसावित्रीचन्द्र

1

हिमालय से

महासागर तक

यादें ही यादें।

2

चाँदनी रात

कह गई कान में

कौन -सी बात?

3

मन मचला

हो गई भोर जब

दिल पिघला।

4

जाड़े  की धूप

बरफ़ सी पिघली

छाया अँधेरा।

5

भुलाया नहीं

जिसे उसको कैसे

याद करूँ।

6

यादों  के तार

जने कब हो गए

दिल के पार।

7

चाँदनी रात

बिता ना पाए हम

उनके साथ।

8

मन उदास

सूनी- सूनी डगर

पी नहीं पास।

9

यादों के फूल

बन गये प्रीतम

चुभते शूल।

10

एक झलक

प्रियतम की देख

झुकी पलक

11

यादों के  मोती

समेट  न सका

सीप दिल का।

12

पागल मन

है पाने को आतुर

पवन बन।

-0-

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Responses

  1. यादों के तार
    जने कब हो गए
    दिल के पार।

    जने को जाने कर दें …. हाइकु हैं।

  2. अच्छे हाइकु हैं।

  3. बहुत सुन्दर हाइकु । धन्यवाद …

  4. bahut sundar!

  5. चाँदनी रात
    कह गई कान में
    कौन -सी बात?

    bahut khub!hardik badhai…

  6. सुन्दर हाइकु ।

  7. utkrisht haiku

  8. सभी हाइकु लगे अच्छे। सावित्रीचन्द्र जी को बधाई और शुभकामनाएं !

  9. सुन्दर!

  10. utkrisht haiku .

  11. हिमालय से
    महासागर तक
    यादें ही यादें।
    ati sunder
    rachana

  12. बहुत सुन्दर भावपूर्ण हाइकु ..हार्दिक बधाई !

  13. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|


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