Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 30, 2015

पहाड़ मुस्कुराया


डॉ नूतन गैरोला

छाया: डॉ नूतन गैरोला

छाया: डॉ नूतन गैरोला

1

प्यूली ढालों पे

पहाड़ मुस्कुराया

बसंत आया ।

2

बुरांश हँसा

बही वन में तब

ठंडी बयार।

3

ग्रीष्म की आँच 

मिटा दे बुराँस का

शीतल पेय।

बुरांश-नूतन-2

छाया: डॉ नूतन गैरोला

4

जंगल खिला

ठंडा -ठंडा बुरांश

सुर्ख आग- सा।  

5

फुलदेई में 

बच्चों की टोकरी में

प्यूली बुरांश।

गूगल से साभार

गूगल से साभार

6

फुल्दै द्वार पे

बच्चों की टोली डाले

बुरांश प्यूली ।

7

चैती गीत में

प्योली बुरांश संग

सुरीले बच्चे।

छाया: नूतन गैरोला
छाया: नूतन गैरोला

8

छम्मा फूल दे

भरे तेरा भण्डार

अन्न -धन से।

9

प्यूली में रूप

पार्वती ने छुपाया

शिवाला पुष्प। 

-0-

[फूलदेई या फूल सक्रांति का चित्र . बच्चे द्वार पर फूल बिखेरते है और विशेष गीत गाते है .बदले में खाने पीने को और कच्चा अनाज भी मिलता है, जिससे बच्चे  जंगल या खेत में कूकिंग करते थे-डॉ नूतन गैरोला]

[मैंने ये फूल पहाड़ी इलाकों में देखे हैं । खासकर कुमायूँ घाटी में । बागेश्वर अल्मोड़ा ।बेरीनाग में देखे  हैं।प्राकृतिक वनों में उगने वाला बुरांश । भारत के अलावा चीन म्यांमार भूटान में भी ये फूल पाया जाता है । बुरांश का फूल हमेशा मार्च से अप्रैल महीने में खिलता है। यह फूल अत्यन्त दुर्लभ माना जाता है, लेकिन इस बार यह सुंदर फूल अचानक जनवरी महीने में ही अपने सौंदर्य की छटाएँ बिखेर रहा है। वैज्ञानिक और पर्यावरणविद इसे जलवायु परिवर्तन का खतरा मान रहे हैं।

कमला निखुर्पा

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Responses

  1. sabhi haiku bahut sunder ….

  2. Achhe lage aapke haiku bahut bahut badhai…

  3. Bahut achhe!

  4. सुंदर चित्रात्मक हाइकु के लिए बधाई नूतन जी !

    फुलदेई में
    बच्चों की टोकरी में
    प्यूली बुरांश।…..बहुत खूबसूरत हाइकु !

  5. नूतन ग़ैरोला ने पहाड़ पर खिले बुरांश के फूलों की छटा के विविध रूप और रंग चित्रों के साथ प्रस्तुत कर परिवेश को मानो साकार कर दिया ।

  6. पहाड़ ,प्रकृति और संस्कृति की मोहक झलक प्रस्तुत करते सुन्दर हाइकु एवं चित्र !
    हार्दिक बधाई !!

  7. chitraatmk sundr haiku .
    badhai

  8. buransh – phoolon ke chitr aur haiku dono hi bahut sunder hain . badhai.
    pushpa mehra.

  9. नूतन जी, मैंने भी यह फूल उत्तराखंड के पहाडी क्षेत्र में देखे हैं, पहाडी संस्कृति की एक विशेष मोहक छाप पाई है आपकी रचनाओं में | बधाई |

    शशि पाधा

  10. sunder ful se parichay karaya aur haiku bhi utne hi komal sur sunder
    badhai
    rachana

  11. सुन्दर हाइकु…पहाड़ की सुगंध से भरे…हार्दिक बधाई…|


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