Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 27, 2015

बुरांश जागा


1-अनिता ललित

1

बुरांश जागा

पर्वत के दिल में

लहू है दौड़ा !

2

बुरांश -वधू

ओढ़नी लहराती

हँसती चली।

3

बुरांशलजाई घाटी

रक्तिम आभा लिये

बुरांश खिले।

4

आया मौसम

प्रेम-ज्योत रौशन

बुरांश-मन।

 5

बुरांश-2क्या कह दिया

हवा ने बुराँश से-

वो लाल हुए।

6

चीड़ के बीच

लुका-छिपी खेल

बुराँश खेले। 

7

सर्द हवाएँ

साँसों में भर जिए

बुराँश खिले।

8

घाटी में झूलें

बुरांश लेके पींगे

ख़ुशी से झूमें।

-0-

2-वीरबाला काम्बोज

 है विडम्बना-

सरसों  के खेत  में

उगे हैं धान !

2

कुचल गए

अनगिन थे राही

दूब मुस्काई ।

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

नीम का बौर।

भीनी– भीनी खुशबू ।

हँसे, बिखेरे।

बेला-22

बेला का नशा ।

पीकर के हवाएँ ।

हुईं बावरी ।

-0-

 

 राजीव गोयल-2

राजीव गोयल-1

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Responses

  1. बहुत खूबसूरत हाइकु पढ़ने को मिले …लाजवाब ! बहुत बहुत बधाई आप सभी को …. !
    1॰
    क्या कह दिया
    हवा ने बुराँश से-
    वो लाल हुए। (अनिता ललित जी )….वाह
    2
    कुचल गए
    अनगिन थे राही
    दूब मुस्काई ।(वीर बाला काम्बोज) ….बहुत खूब …आप कम लिखती हैं पर जब लिखती हैं तो खूब बढ़िया लिखती हैं !
    3.
    बेला का नशा ।
    पीकर के हवाएँ ।
    हुईं बावरी ।(रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’जी) …बहुत अच्छा सुंदर हाइकु है यह… मन महका गया !
    गौधूलि बेला
    समेट कर धूप
    सूरज चला !( राजीव गोयल )
    दोनों हाइगा भी अच्छे हैं 1

  2. वाह ! वाह ! आज की प्रस्तुति बहुत मन भायी |सुंदर चित्रों के साथ सुंदर शब्द संयोजन |

    बधाई सभी रचनाकारों को |

    शशि पाधा

  3. बुरांश एक विदेशी फूल है जो अशोक के फूल की तरह लाल होता है। अनीता जी ने इसे भारत में कहीं देखा होगा। तभी तो उन्होंने बुरांश की विभिन्न छवियों का सुन्दर वर्णन किया ।

  4. सब बहुत सुन्दर !
    निम्नलिखित विशेष लगे:
    क्या कह दिया
    हवा ने बुराँश से-
    वो लाल हुए।

    कुचल गए
    अनगिन थे राही
    दूब मुस्काई ।

    बेला का नशा ।
    पीकर के हवाएँ ।
    हुईं बावरी ।

  5. बुरांश का फूल पूरी तरह भारतीय है । इसे उत्तराखण्ड में राज वृक्ष भी कहा जाता है । हिन्दी के कवियों ने अपनी कविताओं में भी इसका वर्णन किया है।लोकगीतों में भी इस सुगन्धहीन फूल ने अपनी जगह बनाई है। डॉ नूतन गैरोला ( देहरादून की डॉख़्टर और कभी ट्रेकिन्ग की शौकीन रही हैं) के कैमरे का एक चित्र हम पोस्ट भी कर चुके हैं। इसे मसूरी में भी देखा जा सकता है। कुछ और ऊँचाई पर इसका रंग पीला होता है । अधिक ऊँचाई पर ( जहाँ आक्सीजन भी कम होने लगती है) इसके फूल सफेद होते हैं।इसको सुगन्ध नहीं मिली लेकिन पत्ते सदा साथ देते हैं। गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकगीत में इसका मार्मिक चित्रण है । इसका उतावलापन और शिव के लिए समर्पण लोक -चर्चित है। यह यहाँ की संस्कृति का अटूट हिस्सा है । कुछ अनजाने में इसे सतरगी भी लिख देते हैं, जो गलत है।

  6. bahan kaboj ji ka haiku sandesh deta bahut hi sunder hai.bela ka nasha ,pee kar havaen, hui bavari . bbahut sunder haiku hai.anita ji ne burunsh ke phoolon ka guldasta hi saja diya haiga bhi bahut sunder hain.bhai kamboj ji .bahan kamboj ji,anita jiva rajeev ji ap sabhi ko badhai.
    pushpa mehra.

  7. didi Hardip jii ne hmen gahan jaankaari buraasnh kii di hae . Himalchal Pardesh ke Shimla , Dharmshala men in vrikshon ki kataaren lgii hui haen . vadiyaan is fool kii laalimaa se otprot ho jaati hae ., iskaa ek bdaa fool jo ki saare laal chote – chote fulon kaa guchaa hotaa hae . vhin maene bhi sthaaniy vykti se is fool ko tudvaayaa thaa aur foto bhi lii hae .khaayaa bhi jo khttaa hotaa hae , iskaa oushadhiy gun bhi hae , liver ke lie ramvaan kaa kaam krtaa. sbhi haiku laajvaab haen

  8. बुरांस के फूलों का उल्लेख नरेश मेहता की कविताओं में भी है। और भी कई कविताओं में मिल सकते हैं। महत्व की बात यह है कि हाईकू में बुरांश जिस तरह खुले हैं, खिले हैं वह बहुत सुंदर है। इसके पूर्व भी फूलों पर जो हाईकू प्रकाशित हुए हैं वे भी सुंदर थे।

  9. बहुत सुन्दर आयोजन है … मन को आनंदित करता 🙂
    क्या कह दिया , दूब मुस्काई और बेला का नशा ..बेहद ख़ूबसूरत !!

    दोनों हाइगा भी बहुत सुन्दर !!!
    सभी को हार्दिक बधाई …नमन !!!

  10. bahut khub ! bahut gahan abhivaykti hardik badhai….

  11. क्या बात है…बहुत सुन्दर…|
    मुझे बुरांश के फूलों के विषय में इतनी जानकारी नहीं थी, हरदीप जी का आभार…इतनी गहन जानकारी देने के लिए…|
    सभी को बहुत बधाई…हमारे हाइकु परिवार की बगिया यूँ ही महकती रहे…|

  12. किसी कारणवश हम यह पोस्ट नहीं देख सके-इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं।
    आ. वीरबाला भाभी जी, आ. हिमांशु भैया जी… आप दोनों के हाइकु ने मन मोह लिया।
    आप को हार्दिक बधाई !
    राजीव गोयल जी के हाइगा भी बहुत ही प्यारे हैं !
    मेरे हाइकु पसंद करने के लिए आप सभी रचनाकार मित्रों का ह्रदय तल से आभार !
    हरदीप जी तथा मंजू जी… बुरांश के बारे में विस्तारित जानकारी देने का हार्दिक आभार !

    ~सादर
    अनिता ललित


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