Posted by: हरदीप कौर संधु | मार्च 26, 2015

साँझ हो गई।


1-डॉ. विद्याविन्दु सिंह

1

याद आ गया

मुड़ेर पर बैठा

काग उड़ता।

2

छोटे आँगन

खटिया से आका

अब न दिखे।

छाया : डॉ नूतन गैरोला

छाया : डॉ नूतन गैरोला

3

भोली  गौरैया

फुदकती  रहती  है

मन -आँगन।

4

गिलहरी– सी

चाहती  मेरी  पीठ

हाथ फेर दो।

5

तुमने चाहा-

डालें काटना तो,

वे झुक गईं।

6

न कलरव

न नीड़ वापसी है

साँझ हो गई।

7

भोर हो गई

चहकते नहीं हैं

पंछी हैं सोते।

8

धरती सहे

सबका अहंकार

तभी माता है।

छाया : डॉ नूतन गैरोला
छाया : डॉ नूतन गैरोला

9

पर्वत सहते-

धूप, वर्षा, बयार

तभी ऊँचे हैं।

10

नीम- बसेरा

चिड़िया नहीं आती

नीड़ उदास।

-0-45srivatsa@gmail.com

 -0-

2-श्याम अंकुर

1

कौन बताये

इन रिश्तों का साँच

भोगा सबने ।

2

मोल सभी का

दुनिया है बाजार

रिश्ते क्या नाते

3

झूमती घटा

पुरवाई का जोर

फूल महके  ।

4

होता रहा है

वनवास हंसों का

भोगते काग ।

5

मन के पंख

छू लेंगे आकाश को

होंसला रखो ।

6

फुर्सत किसे

कौन देखता घाव

प्यार है खोया ।

7

पूछते फूल

कौन यहाँ बेदाग

भेडि़या– मन॥

8

देश में फैला

कैसा जंगलराज

गूँगी आवाज़ ।

9

कागों का मान

कैसा हुआ समाज

हंस है दुखी ।

10

मौन है मौज

भाव हुए बेजान

आदमी कहाँ?

-0-

  श्याम अंकुर

हठीला भैरू जी की टेक मण्ड़ोला वार्ड बारां 325205


Responses

  1. सब बहुत सुन्दर !

  2. sbhi lajavaab

  3. होता रहा है
    वनवास हंसों का
    भोगते काग ।

    देश में फैला
    कैसा जंगलराज
    गूँगी आवाज़ ।

    समाज के यथार्थ को व्‍यक्‍त करते हाइकु । अंकुर जी आप को हार्दिक बधाई ।

  4. देश में फैला
    कैसा जंगलराज
    गूँगी आवाज़ । sarthak

  5. सुन्दर हाइकु सृजन के लिए आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं !

  6. डॉ. विद्याविन्दु सिंह जी प्रकृति सौन्‍दर्य बिखेरते आप के सभी हाइकु मन मोह गए। हार्दिक बधाई।

  7. देश में फैला
    कैसा जंगलराज
    गूँगी आवाज़ ।

    Bahut gahan abhivyakti dono rachnakaron ko hardik badha…

  8. नन्हे हाइकु
    ज्यों गिलहरी-यत्न
    काव्य-सिन्धु में

    भावपूर्ण सुन्दर पोस्ट के लिए
    मेरा सा दर नमन ।

  9. bahut sundar prkriti ka saundary bikhrte ..badhaayi sabhi ko

  10. सारगर्भित सुन्दर हाइकु हेतु हार्दिक बधाई , बहुत सुन्दर हाइकु हैं

    2015-03-26 9:06 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  11. छोटे आँगन
    खटिया से आकाश
    अब न दिखे।

    मोल सभी का
    दुनिया है बाजार
    रिश्ते क्या नाते ।
    सभी हाइकू बेहतरीन | रचनाकारों को बधाई |

  12. बहुत सुन्दर , सारगर्भित हाइकु !
    ‘साँझ हो गई’ और ‘हंसों का बनवास’ अनुपम !!
    हार्दिक बधाई !

  13. सभी हाइकु सार्थक, सारगर्भित,! विशेषकर..
    ‘धरती सहे
    सबका अहंकार
    तभी माता है।’–डॉ विद्या बिंन्दु सिंह जी

    ‘कौन बताये
    इन रिश्तों का साँच
    भोगा सबने ।’–श्याम अंकुर जी

    आप दोनों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  14. sabhi haiku bahut sunder hain .sabhi ko badhai
    pushpa mehra’

  15. sundar rachnayen!

  16. बहुत ही बढ़िया

  17. छोटे आँगन
    खटिया से आकाश
    अब न दिखे।
    कितना सच है…| हमारे घर-आँगन की तरह अब तो जैसे हमारे मन भी सिमट के छोटे हो चुके हैं…|

    देश में फैला
    कैसा जंगलराज
    गूँगी आवाज़ ।
    बहुत कडवा सच…|

    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

श्रेणी

%d bloggers like this: