Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 26, 2015

बिखरे मोती


1-डॉ. रंजना अरगड़े

1

सिरजती हैं

अभाव जीवन में

भारी टूटन ।

2

दर्द देती हैं

दरारें क्योंकर

जीवन भर ।

3

खिलखिलाता

बचपन मासूम

गुम हुआ क्यों

4

उजालों– भरी

आँखों से  झाँकता है

बाल-सूरज ।

5

बहुत ख़ुश

हर सू क़ायनात

मायूस अब

6

खोई राहें

खुलते हैं रहस्य

कथा- वन में

-0-

2-सीमा स्मृति   

1

साँसो की डोर

मन का मनका दे

खुदा से जोड़।

2

यादों की डोर

नि:शब्द बिंध गई

मन के छोर।

3

मुस्कान -डोर

जीवन– शहनाई

देती सुनाई।

4

निश्चित डोर

अनिश्चित है धारा

दूर किनारा ।

5

जो टूटे डोर

बिखरे एतबार

बेबस प्यार।

6

मन की डोर

करे है कमजोर

पडे ना जोड़ ।

7

रेशमी डोर

बाँधके   कलाई, ले

शपथ, भाई।

8

रिश्तों की डोर

चलाए काला जादू

करे बेकाबू ।

9

कोमल  पग

अदृश्य डोर संग

खोजते पथ।

10

ये  सिलसिले 

अजनबी जो मिले

जीवन खिले।

-0-

3-सुरेश जादव

1

तपती धरा

जेठ की दोपहर

बेबस मेघ

2

पिया की पाती

रात भर बाँचती

अपढ़ गौरी

3

दुआ बेचता

कौड़ियों की कीमत

अंधा भिखारी

-0-

सीमा-हाइगा

                                               

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Responses

  1. सभी बहुत सुन्दर !

  2. sbhi lajavaab

  3. अतिसुन्दर भावपूर्ण रचनाओं के लिये हाइकुकारों को हार्दिक बधाई |

  4. सुन्दर हाइकु सृजन के लिए आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं !

  5. दर्द देती हैं
    दरारें क्योंकर
    जीवन भर ।

    दुआ बेचता
    कौड़ियों की कीमत behad marmik ….

    अंधा भिखारी।

  6. दुआ बेचता
    कौड़ियों की कीमत.
    अंधा भिखारी।

    bahut hi maarmik haiku

    सुन्दर हाइकु सृजन के लिए आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं !

  7. जालों- भरी
    आँखों से झाँकता है
    बाल-सूरज ।

    कोमल पग
    अदृश्य डोर संग
    खोजते पथ।

    दुआ बेचता
    कौड़ियों की कीमत
    अंधा भिखारी।
    सभी हाइकू बेहतरीन | रचनाकारों को हार्दिक बधाई 🙂

  8. सुन्दर सृजन ! हार्दिक बधाई !!

  9. सभी हाइकु बहुत-बहुत सुंदर ! विशेषकर

    दर्द देती हैं
    दरारें क्योंकर
    जीवन भर ।– डॉ.रंजना अरगड़े

    यादों की डोर
    नि:शब्द बिंध गई
    मन के छोर।–सीमा स्‍मृति,

    दुआ बेचता
    कौड़ियों की कीमत
    अंधा भिखारी।–सुरेश जादव

    सीमा जी हाइगा भी बहुत ख़ूबसूरत !

    आप तीनों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. khilkhilata bachapan bechara……….,bahut sunder va satya ,ranjana ji badhai , seema ji atabar ke phool liye haiga bahut sunder hai.badha.
    pushpa mehra.

  11. bahut sundar manbhavan haiku hardik badhai sabhi rachnakaron ko

  12. फूलों से लदे पौधे पर सीमा स्मृति का हाइगा बहुत सुन्दर बन पडा है. संबंधों की डोर को केन्द्रित करके भी उन्होंने सुन्दर अभिव्यक्तियाँ उकेरी हैं -अदृश्य डोर, रेशमी डोर, रिश्तों की डोर आदि खूबसूरत पदबंध हैं. . सुरेश यादव और डा. रचना अरगड़े की रचनाएं भी आकर्षित करती हैं. सभी को बधाई. -सुरेन्द्र वर्मा

  13. दर्द देती हैं
    दरारें क्योंकर
    जीवन भर ।
    साँसो की डोर
    मन का मनका दे
    खुदा से जोड़।
    दुआ बेचता
    कौड़ियों की कीमत
    अंधा भिखारी।
    In haikuon men gahan soch basi hai or bhi haiku achhi soch ke dhami hain mujhe khaskar ye pasand aaye sabhi rachnakaron ko hardik badhai….

  14. बहुत ही सुन्दर हाइकु … तीन पंक्तियों में साहित्य रस ..वाह

  15. दर्द देती हैं
    दरारें क्योंकर
    जीवन भर ।

    कोमल पग
    अदृश्य डोर संग
    खोजते पथ।

    दुआ बेचता
    कौड़ियों की कीमत
    अंधा भिखारी।

    तीनो रचनाकारों की सुन्दर रचनाएँ बधाइयाँ एवं शुभकामनायें

  16. बहुत सुन्दर…हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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