Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 26, 2015

पुष्प विविधवर्णी


डॉ सरस्वती माथुर 

छाया : डॉ नूतन गैरोला

छाया : डॉ नूतन गैरोला

1-बुरांश

1

बुरांश- फूल

लाल मोती से झरे

धरा पे जड़े l

2

रंगरेज -से

धरा को रँगते हैं

बुरांश फूल l

3

लाल सुमन

खिले बुरांश के तो

दहका वन ।

4

अभिनंदन

‘फूल बुरांश तुम

रंगते मन ।

-0-

MADHUMALATI-SHEPHALI2-मधुमालती

1

तरु पे चढ़ी

मधुमालती बेल

अनोखा मेल l

2

झूमते फूल

मधुमालती पे चाँद

जब खेलता l

3

गुच्छ तुम्हारे

मन आँगन रंगें 

मधुमालती  l

4

मधुरस पी

माधवीलता संग

भँवरा झूमा l

-0-

हरसिंगार-13-हरसिंगार

 1

सूर्य खामोश

हरसिंगार झरे

ओस कणों पे  l

2

झरी शेफाली

धरती देह पर

चंदनवर्णी l

3.

फूलचुग्गी से

हरसिंगार उड़े

सूर्य देख के l

4

हरसिंगार

बहती रसधार

भोर के द्धार l

-0-

पलाश-14-पलाश 

1

मन भी लाल

खिले पलाश संग

प्रेम खिलाए l

2.

गूँथ मन को

हावार रचाए

लाल पलाश l

-0-

gulamohara-15-गुलमोहर 

1

धूप में तपे

लाल गुलमोहर

रक्तिम मन l

-0-

DSC00053 6-अमलतास

1

केसरी आभा

अमलतास रूप

खिली धूप -सा l

2

हल्दी मलके

अमलतास खेले

धरा से होली l

-0-

images -26-कमल 

1

कमल फूल

गहरी झील पर

तिरते पाखी l

2

सुशोभित है

पोखर में कमल

भीगा है मन l

 -0-

दूब7-दूब

1

दूब सागर

ओस बूँद तिरती

नाव सरीखी l

2

धरा सागर

दूब  सर्पों के गुच्छ

सरसराते l

-0-

 

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Responses

  1. धरती का सौन्‍दर्य सरस्‍वती दी के हाइकुओं में समाहित हो गया ।
    दी हार्दिक बधाई ।

  2. सामायिक एवं पुष्प मानिंद सुन्दर हाइकु सृजन के लिए आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं !

  3. सुन्दर हाइकु सृजन के लिए आप सभी को बधाई एवं शुभकामनाएं !

  4. मनोहक, महकता गुदास्ता!
    रचनाकारों और माननीय सम्पादकों को धन्यवाद!

  5. अति सुन्दर सुवासित हाइकु

    फूलों के संग
    फूला-फूला सा मन
    हुआ सुमन ।

  6. waah waah बहुत सुन्दर रंग भरे हाइकु हार्दिक बधाई सभी रचनाकारों के हाइकु
    मनभावन हैं

    2015-03-26 16:58 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  7. बहुत बहुत आभार आप सभी आत्मीय जनों का .. आपकी सराहना से मुझे और अच्छा लिखने की प्रेरणा मिलेगी । मैं आभारी हूँ हरदीप जी व कंबोज भाई जी की जिनकी चित्रात्मक अभिव्यक्ति ने हाइकु में नये रंग भर कर उन्हें इतने स्नेह से सँवारा !
    हार्दिक आभार!

  8. धरा सागर
    दूब सर्पों के गुच्छ
    सरसराते l
    बहुत ही सुन्दर हाइकु सभी | विविध फूलों की सुन्दरता निखर आई |

  9. बहुत सुन्दर !
    महका दी
    हाइकु बगिया ये
    सरस्वती जी ….. हार्दिक बधाई आपको !

  10. nana phoolon ki sugandh va chata bikherate haiku man upavan mahaka rahe hain. mathur ji apako badhai.
    pushpa mehra.

  11. हरसिंगार
    बहती रसधार
    भोर के द्धार l
    Bahut Khub! Sabhi haiku bahut achhe hain bahut bahut badhai….

  12. फूल के हर फूल के गजरे………………….रात फूलो की बात फूलों की
    फिर छिड़ी रात बात फूलों की……………..

    जैसी पंक्तियों जैसे सुन्दर हाइकू , बधाई एवं शुभकामनायें

  13. फूलों की ही तरह सुगंध बिखेरते इन रंग-बिरंगे हाइकु के लिए सभी को हार्दिक बधाई…|


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