Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 25, 2015

आकाश नील


1-डॉ•सुधा गुप्ता

1

आकाश नील

फूल–सेहरा बाँध

दूल्हा बना है ।

2

कदली–दल

फिसलतीं वर्षा की

बूँदें चंचल ।

3

काला गुलाब

मख़मली पत्तियों

सजा खड़ा है॥

4

किस मी क्विक

काँटों में खिल पड़े

लाल ये तारे ।

5

गुलदाऊदी

गमलों में सजे हैं

टेक सहारे ।

6

चटख़ रंग 

दोपहरिया फूल

श्रावणी –मेला ।

 

छाया : डॉ नूतन गैरोला

छाया : डॉ नूतन गैरोला

7

चप्पे–चप्पे में

बुरूँस की महिमा

इतरा रही॥

8

बुरूँस–गुच्छ

पूरे निखार पर

 चटख़ लाल॥

99-chandani

चाँदनी पेड़

सफ़ेद फूलों भरा

जगमगाता॥

10

10-javaa kusumजवा–कुसुम

सदा शिव पे चढ़े

सार्थक हुए।

11

जूही- वल्लरी

तरु का सम्बल पा

चढ़ती गई ।

12

दर्जनो रंग

डहेलिया खिले हैं

धनिक लॉन

13

धरा ने ओढ़ी

फ्योंली–सरसों कढ़ी

पीली चूनर ।

14

25

बॉटल ब्रश

हज़ारों लाल गुच्छे

झूमे हवा में

15

बॉटल ब्रश

बहार के सपनों

लदा खड़ा है।

16

ॠतु ने न्योता

लाज से लाल हुआ

बॉटल ब्रश

17

जादुई हँसी

रिझाने चला किसे

ज़रा ये बता ।

18

हरित दूर्वा

विनायक प्रेयसी

सृष्टि प्रतीक

19

हल्दिया पीले

सिल्वर ओक फूल

शाखों में गुँथे।

-0-

2-छुईमुई 

अनिता ललित

1

छुई-मुई से

खिलते-मुरझाते

ये ख़्वाब तेरे।

2

तेरे ख़्याल ने

यूँ छुआ, मैं सिमटी

ज्यों छुईमुई।

-0-

3-रचना श्रीवास्तव

1

पलाश- फूल

जंगल लगी आग

ऐसे लगते ।

-0-

4-सुनीता अग्रवाल

I-गुलाब – सुनीता अग्रवाल

1

नन्हा गुलाब

बगिया में अकेला

रहे उदास।

2

खोली किताब

आज फिर महका

सूखा गुलाब।

3

आई है पाती

गुलाब अर्क सींची

लिखा है मौन ।

-0-

2-टेसू – सुनीता अग्रवाल

1

 पलाश  फूल

निहारे  प्रिया  तोरे

सुर्ख कपोल।

2

हुए  समान

प्रीत घृणा  के रंग

पलाश मौन ।

3

खिले पलाश

दहके फिर ख्वाब

मन- कानन  ।

4

पलाश टोली

भर फागुन खेली

यादो की होली ।

5

रंग उल्लास

ढप  , मृदंग  थाप

झूले  पलाश ।

6

टेसू न खिले

मले कृत्रिम रंग

चेहरे जले ।

7

चुभोते शूल

बिन तेरे साजन

टेसू के फूल ।

-0-

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Responses

  1. बहुत सुंदर

  2. बहुत सुन्दर है फूलों की बगिया ! दूल्हा , कदली-दल ,लाज से लाल बॉटल ब्रश ,विनायक प्रेयसी ..सचमुच दीदी की रची दुनिया अनुपम है !
    सादर नमन !!
    छुई-मुई , गुलाब , पलाश ..सब के सब लाजवाब !!

    हार्दिक बधाई सभी को !

  3. वाह! आदरणीया सुधा दीदी जी के हाइकु तो सचमुच बॉटल ब्रश से लहलहा रहे हैं, चाँदनी से खिल रहे हैं… अतिसुन्दर !
    नमन उन्हें एवं उनकी लेखनी को !
    सुनीता जी के हाइकु भी बहुत सुंदर !
    हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. sudhaa di kii upmaa lajavaab , sbhi utkrisht haaiku

  5. बहुत सुन्दर रचनाएँ ! सभी रचनाकारों का लिखने के लिये और काम्बोज सर का पढ़वाने के लिए हार्दिक धन्यवाद!!

  6. काला गुलाब
    मख़मली पत्तियों
    सजा खड़ा है॥

    तेरे ख़्याल ने
    यूँ छुआ, मैं सिमटी
    ज्यों छुईमुई।

    पलाश- फूल
    जंगल लगी आग
    ऐसे लगते ।

    baht hi sundar sabhi haiku … 🙂

  7. हाइकु सजे
    फूलों की बहार से
    मन महके
    सभी हाइकु-साधकों को बधाई ।

  8. Bahut sunder
    Chawla

  9. sudha didi ke sabhi haiku man moh rahe hain,sunita ji, rachana ji anita ji,sunita ji apake haiku bhi bahut achhe hain badhai.
    pushpa mehra.

  10. क्या बात हैं इन मनोहारी हाइकू के…| मन इन्हीं फूलों की तरह खिल गया…|
    हार्दिक बधाई…|

  11. haiku,haiga ki manoram chata bahut payari lagi sabhi rachnakaron ko badhai…


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