Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 21, 2015

हरसिंगार


1पुष्पा मेहरा    

हरसिंगार-11

फूलों की टोली

या ख़ुशबू का ताल

हरसिंगार।

2

मूँगों से जड़ी

फूल- अँगिया धारे

हँसी शेफ़ाली ।

3

धूप ने छुआ

झरे फूल उज्ज्वल

लूटे धरा ने ।

4

हरसिंगार

ज्यों शाख़ों पे आ खिले

श्वेत  कुमुद ।

5

शोक – समुद्र

हँस-हँस बहाता

हरसिंगार ।

6

पर्ण औ पुष्प

लुट रहे दान में

औषधि भरे ।

7

हुई जो भोर

स्वप्न -से झर गए

हरसिंगार ।

8

 नन्ही -सी हँसी

 फूल हरसिंगार

 ख़ुशबू बनी ।

9

 शुभ्र चाँदनी

 शाख-शाख़ उतरी

हँसी शेफ़ाली ।

10

 सूर्य से डरी

भय  से काँप गिरी

प्रात, शेफ़ाली ।

 11

सूनी है गोद

उदास है प्राजक्ता

ऋतु वासंती ।

-0-

2-रचना श्रीवास्तव

1

घर पे सजे

मखमल से बिछे

हरसिंगार

2

दूध पेहरसिंगार-2 जैसे

हो केसर का छीटा

ऐसे ये फूल

3

मोती -से टके

धरा के  आँचल पे

हरसिंगार

4

तुमने  रोपा

था ,जो हरसिंगार

खिला है आज

-0-

3-हरकीरत हीर

1

बड़ा शर्मीला

खिलता चुपके से

हरसिंगार ।

-0-

4-सीमा स्मृति

1

बनी दुल्ल्ह

धरा, हरसिंगार

किया सिंगार।

-0-

5-सुनीता अग्रवाल

1

प्रीत का सार

सर्वस्व समर्पण

हरसिंगार ।

2

बिछाये धरा

पारिजात– गलीचा

भोर की राह ।

3

भीनी -सी रात 

चटका पारिजात

महकी हवा ।

4

नि:शब्द रात

झरा हरसिंगार

यौवन लूटा  ।

5

धरा रमणी

पारिजात गजरा

दुल्हन बनी ।

6

हरसिंगार

वेणी गूँथे वसुधा

लुभाये पिया ।

-0-

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Responses

  1. हुई जो भोर
    स्वप्न -से झर गए
    हरसिंगार ।

    सूर्य से डरी
    भय से काँप गिरी
    प्रात, शेफ़ाली ।


    दूध पे जैसे
    हो केसर का छीटा
    ऐसे ये फूल

    बड़ा शर्मीला
    खिलता चुपके से
    हरसिंगार ।

    बनी दुल्ल्हन
    धरा, हरसिंगार
    किया सिंगार

    प्रीत का सार
    सर्वस्व समर्पण
    हरसिंगार ।bahut hi khoobsurat…pyre bhaav tatha sunder shabd chayan … aap sabhi ko ..vasantik navratro ki badhai

  2. sare utkrisht haiku

  3. bahut hi khubsurat haiku ..bhinibhini sugndh lutate 🙂 meri rachna ko sthan dene ke liye bhaiya or didi ka aabhar
    दूध पे जैसे
    हो केसर का छीटा
    ऐसे ये फूल

    फूलों की टोली
    या ख़ुशबू का ताल
    हरसिंगार।
    हुई जो भोर
    स्वप्न -से झर गए
    हरसिंगार ।

    बड़ा शर्मीला
    खिलता चुपके से
    हरसिंगार ।

  4. सभी हाइकु अति सुन्दर

    नन्हीं बूँदों में
    सुगंध का सागर
    हरसिंगार

    हरसिंगार
    धरा को महकाया
    स्वर्ग सेआया

  5. सभी हाइकु बहुत सुन्दर और मनमोहक हैं. सुन्दर प्रकृति चित्रण, बधाई.

  6. priti ka saar , sarvsv samarpan,harsingar.doodh pe jaise ,ho kesar ka tiika…..,doodh pe jaise ,ho kesar ka teeka , harsingar sabh haiku bahut bhavpurn hain.rachna ,sunita seema va harkiirat ji badhai.
    pushpa mehra.

  7. कहीं स्वप्न से झरते ,कहीं केसर का छींटा लगे ,कहीं शर्मीले तो कहीं धरा का शृंगार करते , प्रीत के सार से हरसिंगार बहुत ख़ूबसूरत हैं |अनुपम सौन्दर्य बिखरा है हरसिंगार के फूलों का ….सभी को बहुत बधाई !

  8. एक साथ इतने सुंदर एवं सरस हाइकु पढ़कर मन खिल उठा । पुष्पा मेहरा जी , रचना श्रीवास्तव जी , हरकीरत ‘हीर’ जी , सीमा स्मृति जी और सुनीता अग्रवाल जी आप सभी को हार्दिक बधाई !

  9. हरसिंगार मेरा प्रिय फूल है , इसे विभिन्न शब्दरूपों में देख कर मन आनन्दित हुआ | सभी रचनाकारों को बधाई |

  10. Sabhi rachnakaron ko hardik badhai eak se eak haiku likhe hain sabne…

  11. Bahut hi sundar!!

  12. waah waah adhbudh ek se badhkar ek pushpa ji ke sabhi haiku hraday me
    bas gaye , anita ji hiir ji sabhi rachnakaron ke umda haiku waah waah aur
    waah sabhi ko hardik badhai

    2015-03-21 6:50 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  13. यहाँ तो हरसिंगार की छटा मन मोह गई…सबको हार्दिक बधाई…|


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