Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 20, 2015

सरल गाँव


डॉ जेन्नी शबनम

1

जीवन त्वरा

बची है परम्परा,

सरल गाँव !

2

घूँघट खुला,

मनिहार जो लाया

हरी चूड़ियाँ !

बनिहारी3

भोर की वेला

बनिहारी को चला

खेत का साथी !

4

पनिहारिनपनिहारिन

मन की बतियाती

पोखर सुने !

5

दुआ– नमस्ते

गाँव अपने रस्ते

साँझ को मिले !

6

खेतों ने ओढ़ी

हरी-हरी ओढ़नी

वो इठलाए !

7

असोरा ताके

कब लौटे गृहस्थ

थक हारके !

8

महुआ झरे

चुपचाप से पड़े,

सब विदेश !

9

उगा शहर

खंड-खंड टूटता

ग़रीब गाँव !

10

बाछी रम्भाए

अम्मा गई जो खेत

चारा चुगने !

-0-

बनिहारी=खेतों में काम करना

 असोरा =ओसारा,दालान

चुगने= एकत्र करने

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Responses

  1. khubsoorat haiku men sundr gram chitrn

  2. Shabnam Ji badhai sunder haiku

  3. Bahut khoob!

  4. bahut sunder haiku shbnam ji badhai .
    pushpa mehra.

  5. जीवन त्वरा
    बची है परम्परा,
    सरल गाँव !ati sundar ! jenny ji aapke khoobsurat vicharon ne sada hi man lubhaya hai
    bade hi mamohak hai saare haiku ….badhai .

  6. मेरे हाइकुओं को पसंद करने के लिए आप सभी का हृदय से धन्यवाद.

  7. ग्राम का प्रतिबिंब
    सुंदर बिम्ब में प्रस्तुत

  8. सभी हाइकु सुबह को सुंदर बना गए। हार्दिक बधाई !

  9. Bahut khub!

  10. वाह! बहुत सुंदर, सजीव गाँव के चित्र !
    हार्दिक बधाई जेन्नी शबनम जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. इन हाइकु में जैसे गाँव साकार हो उठा…| बहुत मधुर…मीठे से हाइकू…हार्दिक बधाई…|


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