Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 19, 2015

सौरभ झूमे


सीमा

-0-

राधेश्याम

1

हँसे सुमन

धवल हिमकण

करें नमन !

2

गगन रोता

अमृत बरसाता

धरा सुहाता।

3

धरा के सर

रेतीला अजगर

ढाता कहर ।

4

लहरें दौड़ें

तट का सिर फोड़ें

पीछा न छोड़ें ।

5

सौरभ झूमे

मालती निकुंज में

मदहोशी में।

6

बीज माटी में

विटप सपनों में

मन खुशी में।

7

कलगी ताने

सरकण्डे दीवाने

खड़े वीराने ।

8

सरसों झूमे

वसन्त की बाहों में

मधहोशी में।

9

पर्वत छाती

दिव्यता महकाती

मौन गुँजाती।

10

ख़ौफ़ के मारे

देख मरु-नज़ारे

काँपते तारे ।

11

कली मासूम

मदहोशी में झूम

मचाती धूम ।

12

तुलसी तले ,

जो संध्या-दीप जले

तो पुण्य फले ।

13

फगवा खेली

पलाश- संग होली

रंग दी चोली ।

14

धरा की आत्मा

गुँजाती हरीतिमा

हँसे नीलिमा।

-0-

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Responses

  1. राधेश्याम की रचनाए बहुत दिनों बाद देखने में आईं. सुन्दर हैं. हिन्दी हाइकु में स्वागत है. सुरेन्द्र वर्मा

  2. Bahut sundar!

  3. बीज माटी में
    विटप सपनों में
    मन खुशी में।
    yh vishesh bhut sundr saare haaiku

  4. sundar haiga … aur ..
    bahut sundar haiku !

    bahut bahut badhaii ..saadar naman !

  5. सौरभ झूमें के अंतर्गत पढे सभी हाइकु अच्छे लगे …बधाई राधेश्याम जी व सुंदर हाइगा के लिए सीमा जी और बहुत बहुत बधाई

    कंबोज भाई इस हाइकु गुलशन को महकाने के लिए आपको भी बधाई ! l
    आज आपका जन्मदिन भी है उसके लिए भी मुबारक आपको…. मंगलमय शुभ कामनाओं के साथ
    आपको समर्पित यह पुष्प गुच्छ इन दो शब्दों के साथ
    1
    मन दे दुआ
    सौ वर्ष की उम्र हो
    आपकी भैया l
    2
    हाइकु धरा पे
    सूरज से चमके
    उजास लाये l
    3
    जश्न का मौका
    कंबोज भैया आज
    मंगल दिन l
    हम हाइकु परिवार वाले हमेशा
    रखेंगे याद कि यह परिवार है हमेशा
    दु:ख सुख ,हंसी खुशी में साथ !
    बधाई… शुभकामनायें ….भैया, हाइकु की बगिया ऐसे ही महकाते रहें !!
    इन्ही मंगलकामनाओं के साथ
    डॉ सरस्वती माथुर

  6. कलगी ताने
    सरकण्डे दीवाने
    खड़े वीराने ।
    sunder soch parivar me aapka svagat hai
    seema ji bahut sunder haiga hai
    rachana

  7. कली मासूम
    मदहोशी में झूम
    मचाती धूम ।

    Bahut sundar…

  8. बहुत सुंदर हाइगा सीमा जी! सच को दर्शाता !
    सभी हाइकु बहुत सुंदर राधेश्याम जी ! विशेषकर-
    ‘लहरें दौड़ें
    तट का सिर फोड़ें
    पीछा न छोड़ें ।’

    आप दोनों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनीता ललित

  9. कलगी ताने
    सरकण्डे दीवाने
    खड़े वीराने ।

    ख़ौफ़ के मारे
    देख मरु-नज़ारे
    काँपते तारे ।
    इतने प्यारे हाइकु के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें…|

    हाइगा भी बहुत अच्छा बन पड़ा है…| बधाई…|


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