Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 17, 2015

हरा गलीचा


1-भावना सक्सैना

1

दूबहरा गलीचा

फैला धरती पर

मन को भाए।

2

चाँदनी आई

पसरी धरा पर,

दूब– बिछौना।

3

श्याम, हरित

हरित और श्वेत

कोमल दूर्वा।

4

कितनी बार

रौंदी जाती ये दूब

फिर मुस्काती।

5

संग सिखाए

विनम्रता दृढ़ता

हरित दूर्वा।

6

देवों को प्रिय

मंगलकारी दूर्वा

आरोग्यदात्री।

7

हाथों में दूब

ले, सुनी कहानियाँ

पाया आशीष।

-0-

2-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

रक्त कमल

उतरे नयनों में

डोरे बनके ।

2

लरज गई

वो कमल पाँखुरी

कुछ न बोली ।

3

खिले कमल !

या हँसा सरोवर

देख भोर को ।

4

रखूँ  बन्द ही

ये नयन पाँखुरी

जाओगे कैसे !

5

मन का भौंरा

बन्द युगों युगों से

क़ैद ही चाहे।

MADHUMALATI-SHEPHALI6

मधुमालती

रात भर गमकी 

भोर में सोई।

-0-

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Responses

  1. खिले कमल !
    या हँसा सरोवर
    sarovar ke hansne ki kalpana ekdam adbhut…. bahut sundar prakriti ka chitran …

  2. मधुमालती
    रात भर गमकी
    भोर में सोई।

    bahut sundar haiku 🙂

  3. bahut hi sundar haiku ..sabhi

  4. Sabhi bahut sundar!

  5. सभी हाइकु सुंदर लगे …..
    1
    रखूँ बन्द ही
    ये नयन पाँखुरी
    जाओगे कैसे !
    (रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’)
    ये नयन पांखुरी….सुंदर… बहुत खूब ! …बधाई !
    2.
    हरा गलीचा
    फैला धरती पर
    मन को भाए।
    (भावना सक्सेना,)
    हरा गलीचा…शब्द भी अच्छा लगा !
    आप दोनों को बहुत बहुत बधाई व शुभकामनायें !

  6. चाँदनी आई
    पसरी धरा पर,
    दूब- बिछौना।

    bahut khub! bahut bahut badhai…

    मधुमालती
    रात भर गमकी
    भोर में सोई।

    k\ya kahun?kya chavi prstut ki hai aapne hardik badhai aapko…

  7. कितनी बार
    रौंदी जाती ये दूब
    फिर मुस्काती

    मन का भौंरा
    बन्द युगों –युगों से
    क़ैद ही चाहे।
    मन की अादत भी कमाल है। हाइकु के द्वारा मन की प्रकृति अापने बहुत ही खूब कहा है।
    आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  8. वाह! बहुत-बहुत-बहुत सुंदर ! सभी हाइकु बहुत ही प्यारे!
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ भावना सक्सैना जी तथा हिमांशु भैया जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. कितनी बार
    रौंदी जाती ये दूब
    फिर मुस्काती।
    सीख देता सुन्दर हाइकु…भावना जी को बधाई !!

    रखूँ बन्द ही
    ये नयन पाँखुरी
    जाओगे कैसे !

    मन का भौंरा
    बन्द युगों –युगों से
    क़ैद ही चाहे।
    सभी भावपूर्ण हाइकु के लिए काम्बोज सर को बहुत बधाई…सादर

  10. सभी हाइकु अति सुंदर एक से बढ़ कर एक । भावना जी व कम्बोज जी आपको बधाई ।

  11. bahut sundar haiku …’haraa galeechaa ‘ ,’kitanii baar’ , ‘ye nayan paankhurii’ , ‘kaid hii chaahe’ aur ‘madhumaalatii ‘ hii sundar lage !

    Bhavana ji evam aadaraneey kamboj bhaiyaa ji ko bahut bahut badhaaii …naman !

  12. कितनी बार
    रौंदी जाती ये दूब
    फिर मुस्काती।
    sahi kaha aapne
    -0-
    रखूँ बन्द ही
    ये नयन पाँखुरी
    जाओगे कैसे
    bhaiya bahut mohak chitran

    bahut sunder likha aapdono ne
    sunder bhav aur bimb
    vadhai
    rachana

  13. मेरे हाइकु पसन्द करने के लिए आप सबका हार्दिक आभार !

  14. sabhi haiku bahut hi sunder hain. bhavana ji va bhai ji ko badhai.
    pushpa mehra.

  15. देवों को प्रिय
    मंगलकारी दूर्वा
    आरोग्यदात्री। sbhi utkrisht , yh vishesh lgaa
    मन का भौंरा
    aap dono ko badhai
    बन्द युगों –युगों से
    क़ैद ही चाहे।
    sbhi lajaavaab ,yh vishesh hae .

  16. खिले कमल !
    या हँसा सरोवर
    देख भोर को ।
    क्या बात है !

    मधुमालती
    रात भर गमकी
    भोर में सोई |
    अप्रतिम…!
    आपके हाइकु हमेशा की तरह बहुत सुन्दर…लाजवाब…| बहुत बधाई…|

    भावना जी के हाइकु भी बहुत मनभावन है…उनको हार्दिक बधाई…|


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