Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 14, 2015

धूप सहेली


1-डॉ सरस्वती माथुर

1

धरा से खेली

जब धूप सहेली

सूर्य रेफ़री ।

2

प्रेम पत्र- सा

मौसम है सुहाता

प्रीत जगाता।

3

झरना फूटा

मन के पर्वत से

यादें बनके।

4

खुली आँखों से

सपने देखे पर

काँच- से टूटे।

-0-

2-सुभाष लखेड़ा

1

जीवन बीता

भरता रहा इसे,

फिर भी रीता।

2

जो खुद दुखी,

कभी नहीं मिलेगी

उससे खुशी

3

जीवन सही

कभी क्रोध न करें

बड़ों ने कही।

4

गंगा ही नहीं

गँदली हुई सभी

प्रेम –गंगाएँ।

5

और न गिर

ईश्वर से न सही

खुद से डर। 

6

करें प्रणाम

सृष्टि के गहनों को

माँ- बहनों को। 

-0-

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Responses

  1. sbhi haiku ek se badhakar ek

  2. सभी हाइकु प्रशंसनीय पर
    और न गिर
    ईश्‍वर से न सही
    खुद से डर हाइकु प्रभावशाली….!

  3. बहुत सुन्दर!

  4. sabhi haiku sundar …srishti ke gahane ati sundar !

    haardik badhaaii saraswati ji evam subhash ji ko !

  5. sabhi haiku bahut sunder hain badhai .
    pushpa mehra.

  6. जो खुद दुखी,
    कभी नहीं मिलेगी
    उससे खुशी ।
    सुभाष जी हाइकु से आप ने जीवन का फलसफा कह दिया ।जिस के पास जो होगा वह दूसरे को वही देगा। एक दुखी आदमी दूसरे को दुख के सिवा क्‍या देगा। बहुत ही सुन्‍दर हाइकु। आप को हार्दि बधाई।
    सुधा जी प्रकृति आपके हाइकुओं को पढ़ कर एक सहेली ही प्रतीत होती है। हार्दिक बधाई

  7. हुई खामोशी
    पतक्षर सी पील्‍ाी
    धूमे अकेली।

    कभी खामोशी के सिलसिले यूं भी होते हैं।

  8. आप सभी का धन्यवाद ..
    .सीमा जी आपने मुझे सुधा जी लिख दिया उनके नाम के साथ जुड़ कर मेरातो मान ही बढ़ा …….प्रकृति मेरे दिल के बहुत करीब है …आपका धन्यवाद …साथ ही स्नेही हरदीप जी व कंबोज भाई का आभारमेरे हाइकु को स्थान देने के लिए !

  9. प्रेम पत्र- सा
    मौसम है सुहाता
    प्रीत जगाता।

    Gahan abhivaykti…bahut bahut badhai…

    जीवन बीता
    भरता रहा इसे,
    फिर भी रीता।

    javab nahi bahut bahut shubhkamanyen…bahut achaa likha hai aapne ye haiku sach ugalta….

  10. सभी हाइकु सुंदर!
    हार्दिक बधाई डॉ सरस्वती माथुर जी तथा सुभाष लखेड़ा जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. गंगा ही नहीं
    गँदली हुई सभी
    प्रेम -गंगाएँ।
    gahri baat
    झरना फूटा
    मन के पर्वत से
    यादें बनके।
    sunder upma
    badhai aapdono ko
    rachana

  12. धरा से खेली
    जब धूप सहेली
    सूर्य रेफ़री ।
    सुन्दर…|

    जीवन बीता
    भरता रहा इसे,
    फिर भी रीता।
    बिलकुल सही बात…|

    सुन्दर हाइकु के लिए आप दोनों मेरी बधाई स्वीकारें…|


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