Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 13, 2015

साँसें महकी ।


डॉ. कंचन पुरी

1

फूलों की  हँसी

बसन्त संग खुशी

तितली संगी

2

मोहे बसन्त

भौंरा बना है संत

ले मकरंद

3

बसन्त राजा

फूल -सभा बुलाते

सब मुस्काते ।

बसन्त मार

काम सुनाए राग

मादक फाग ।

5

मन वासन्ती

भावनाएँ चहकी

साँसें महकी ।

6

बसन्त आते

काम तीर चला

प्रेम जगाए ।

7

चमन खिला

मनमोहक समा

रंग है जमा

8

खिलते फूल

देख भौंरा बौराया

है मँडराया

9

बसन्त आया

हरा भरा संसार

मन में प्यार

१०

बसन्त लाता

मंद -मंद बयार

खुशबू-भरी ।

-0-

डॉ. कंचन पुरी

अध्यक्षा हिन्दी विभाग,आर. जी. पी.जी. कॉलेज, मेरठ

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Responses

  1. सुन्दर वसंत वर्णन !
    बहुत सुन्दर है वसंत राजा की फूलों की सभा !
    हार्दिक बधाई !!

  2. बहुत सुन्दर!

  3. सभी हाइकु बेहतरीन हैं। हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

  4. सभी हाइकु बहुत सुन्दर….. हार्दिक बधाई

  5. vsanat vaebhav haiku men chaar chaand lgaa rhe haen .

  6. सुन्दर प्रस्तुति!
    यह हाइकु बहुत ख़ूबसूरत…..हार्दिक बधाई!

    बसन्त राजा
    फूल -सभा बुलाते
    सब मुस्काते ।

  7. बसन्त राजा
    फूल -सभा बुलाते
    सब मुस्काते ।
    सबसे बढ़िया लगा !

    हार्दिक बधाई डॉ कंचन पुरी जी !

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. बहुत सुन्दर मनभावन हाइकु…हार्दिक बधाई…|

  9. achhe lage haiku badhai…


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