Posted by: डॉ. हरदीप संधु | मार्च 9, 2015

मुखरित है मौन


1-अनुपमा त्रिपाठी

1

मुखरित हो ,

अनमोल रचती

भाव की बेला

2

अनुनाद सा

निज घाट यात्रा ही

 है ये जीवन

3

दीप जला रे ,

मुखरित है मौन

आया है कौन !!

4

साँझ ढले ज्यों

दीप जले मन के

आस पुकारे

5

गुलाब खिला

 पंखुड़ियाँ बोलतीं

खिलता मन

-0-

सुनीता अग्रवाल

1.

पर्वत गोदी

बाबुल का आँगन

खेलती नदी

2.

चीरती चली

रूढियों का पर्वत

घायल नदी

3.

धीर पर्वत

कभी चंचल नदी

नारी का चित्त

4.

ढो  रही हवा

कलियों का क्रंदन

जंगल मौन

5.

प्रतीक्षारत

उर्मिला ,यशोधरा

संघर्ष रत

6.

बदली सदी

जीर्ण तटों  से बँधी

कराहे   नदी

7.

आधी आबादी

सशक्त ,सुशिक्षित

नींव  सुदृढ़

8.

आये न राम

प्रतीक्षा में अहल्या

रही  पाषाण

9.

लाँघे जो रेखा

हो जाती  रामायण

 साक्षी सदियाँ

10.

नारी व नर

रथ के दो  पहिये

जीवन चले

11.

चढ़ी फुनगी

चपल चारु लता

वृक्ष सहारा

12.

दे दी आजादी

पग पायल बाँध

हाथ चूड़ियाँ

-0-

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Responses

  1. १.
    अनुनाद सा
    निज घाट यात्रा ही
    है ये जीवन( अनुपमा त्रिपाठी )
    २.
    आये ना राम
    प्रतिक्षा में अहल्या
    रही पाषाण !( सुनीता अग्रवाल )
    बहुत अच्छे हाइकु … बधाई !

  2. अति सुन्दर एवं सामयिक हाइकु ! दोनों रचनाकारो बधाई और शुभकामनाएं।

  3. bahut bhaavpoorn sundar haiku ..haardik badhaaii

  4. Bahut barhiyaa!

  5. बहुत सुन्दर हाइकु | बधाई !

  6. सभी हाइकु सुंदर, गहरे।

    विशेषकर
    अनुनाद सा
    निज घाट यात्रा ही
    है ये जीवन

    एवं

    बदली सदी
    जीर्ण तटों से बँधी
    कराहे नदी ।

    अनुपमा जी, सुनीता जी… हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. “दीप जला रे / मुखरित है मौन / आया है कौन !” ( अनुपमा त्रिपठी जी) “बदली सदी / जीर्ण तटों से बँधी / कराहे नदी” (सुनीता अग्रवाल जी) – बहुत अच्छे हाइकु हैं! हार्दिक बधाई!!! – डॉ. कुँवर दिनेश

  8. sabhi sundar prastuti
    visheshkar
    अनुनाद सा
    निज घाट यात्रा ही
    है ये जीवन

    बदली सदी
    जीर्ण तटों से बँधी
    कराहे नदी”

    Anupma ji n Neh di ko haardik badhaayi 🙂

  9. नारी व नर
    रथ के दो पहिये
    जीवन चले ।

    सुंदरहाइकु सुनीता जी !!

    हृदय से आभार हिमांशु भैया मेरे भी हाइकु यहाँ प्रकाशित किए !!

  10. बहुत सुन्दर हाइकु…. बधाई आप दोनों को।

  11. चीरती चली
    रूढियों का पर्वत
    घायल नदी।

    अनुनाद सा
    निज घाट यात्रा ही
    है ये जीवन ।
    बहुत ही सुन्‍दर हाइकु। आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  12. himanshu bhaiya or harddep di ka hriday se aabhar meri rachnao ko yaha sthan dene ke liye …. sabhi sathiyo ka aabhar hausla aafjayi ke liye
    साँझ ढले ज्यों
    दीप जले मन के
    आस पुकारे

    अनुनाद सा
    निज घाट यात्रा ही
    है ये जीवन ।
    bahut hi sundar haiku anupma ji badhayi 🙂

  13. मुखरित हो ,
    अनमोल रचती
    भाव की बेला

    चढ़ी फुनगी
    चपल चारु लता
    वृक्ष सहारा ।
    bahut sunder badhai aapdono ko
    rachana

  14. सुन्दर

  15. सभी हाइकु बहुत ही बेहतरीन हैं…| इतने अच्छे हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  16. दीप जला रे ,
    मुखरित है मौन
    आया है कौन !!

    आये न राम
    प्रतीक्षा में अहल्या
    रही पाषाण ।

    sundar1 bahut bahut badhai…


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