Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 27, 2015

मेरी पसन्द


मेरी पसन्द-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

बिंध गई मैं

हँसी में ही छुपी थी

तेरी सिसकी ।

कमला निखुर्पा

 जहाँ अपनापन होगा , वहाँ अपनों  के दु:ख की अनुभूति भी होगी । कुछ लोग केवल अपने दु:ख से दु:खी और अपने सुख से सुखी होते हैं। दूसरों के दु:ख को उत्सव की तरह मनाने का काम केवल क्रूर व्यक्ति ही कर सकता है । सहृदय वही होता है , जो दूसरों के सुख से तो सुखी हो ही,  उनके दु:ख को भी अनुभव करे । दूसरों का दुख उसे गहरे तक बींध जाए, उद्वेलित कर जाए। वह दु:ख यदि अपनों का हुआ तो उससे अछूता रहना कठिन ही नहीं , असम्भव है।

            कवयित्री कमला निखुर्पा ने  प्रिय की हँसी को महसूस किया , लेकिन उस हँसी के पीछे छुपी सिसकी को ,विगलित  व्यथा को भी  बहुत  गहराई तक महसूस किया है। अन्तर्मन को मथने वाली व्यथा को हँसी या मुस्कान की ओट में बरबस नहीं छुपाया जा सकता । लाख प्रयास करने पर भी वह पीड़ा सिसकी बनकर फूट पड़ती है। संवेदना वह गुण है ,जो कवि को पाठक से जोड़ देता है । कमला निखुर्पा की गहन संवेदना इस हाइकु के एक-एक शब्द में उतर आई है ।

-0-

मेरी पसंद-अनिता ललित

 ”तुम हो सुखी

ये आँखें तरल-सी

तुम्हारे लिए।

(हाइकु-संग्रह ‘माटी की नाव– रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’  से)

 जिस प्रकार सुख-दुःख का चोली-दामन जैसा साथ होता है, ठीक उसी प्रकार आँसू और मुस्कान भी एक-दूसरे से एक अभिन्न, अनोखे बंधन में बँधे होते हैं। हमारी आँखों में आँसू केवल दु:खी होने पर ही नहीं आते हैं और न सच्ची मुस्कान सिर्फ होठों पर ही आती है ;बल्कि जब हम बहुत प्रसन्न होते हैं ,तो हमारी आँखें भी अनचाहे-अनजाने छलक ही पड़तीं हैं। अपने सुख-दुःख में तो हम सभी हँसते-रोते हैं ;परन्तु हमारा कोई बहुत अपना, प्रिय यदि दु:खी हो तो भी हम दु:खी हुए बिना नहीं रहते। उसी प्रिय को सुखी देखकर ख़ुशी से हमारी आँखे भर आना भी कोई असंभव बात नहीं है। यही तो सच्चा प्रेम है, यही तो प्रीत की रीत है।

  प्रस्तुत हाइकु भी कुछ ऐसी ही भावना को दर्शाता है। पढ़ने में भले ही यह किसी मानव-मन में उठा साधारण- सा भाव प्रतीत होता हो ;मगर यह भाव अपने भीतर स्नेह की सुकोमल तहों में लिपटी भावना एवं संवेदना की अनुभूति लिये हुए है। कवि की आँखें  अपने प्रिय को सुखी देखकर तरल-सी हो गईं। इस तरलता में कहीं गहरे छिपा, निःस्वार्थ प्रेम में मिले प्रिय के बिछोह के दुःख का आभास भी झलकता है। प्रेम में मिला सुख दिल के जितना निकट होता है, उतना ही निकट प्रेम में मिला दुःख भी होता है, बल्कि कहीं अधिक निकट होता है। मगर प्रेम केवल पाने का नाम नहीं, प्रेम में देना और देकर दिल में कोई गिला-शिक़वा न होना ही प्रेम की असली कसौटी है।

   अक्सर ऐसा भी होता है कि हमारे किसी अपने को, कई कष्ट सहने के उपरान्त थोड़ी सी भी ख़ुशी यदि मिलती है ,तो हमारा मन भी उस ख़ुशी से अछूता नहीं रहता ।यह हाइकु दुःख के बाद मिले सुख के एक उस पल को, उस एक पल के गहरे सुक़ून को अपने कैमरे में क़ैद किये हुए है।

     शांत झील की उदासी में डूबे हुए भीगे-भीगे चाँद– सा यह हाइकु कवि के भावुक मन की कोमलता का एहसास दिलाता है।

Advertisements

Responses

  1. छोटे से हाइकू की इतनी सुन्दर व्याख्या …. यही तो अापकी विशेषता है

  2. दोनों हाइकु के भाव आत्मा से गहरे जुड़े हुए हैं. काम्बोज भाई ने बहुत सुन्दर एवं सार्थक विश्लेषण किया है. आभार!

  3. ati sunder vyakhya ek haiku pr kitna gahre se soch kar likha hai aap dono ko badhai
    rachana

  4. bahut sundar vyakhya ki hai anita ji kamboj bhai ji dono ko badhai , kitni gahan anubhuti hai

  5. बहुत सुन्दर निरूपन….पढ़ कर आन्नद आया….आप दोनों को हार्दिक बधाई!

  6. मार्मिक व भावप्रधान हाइकुओं की गहरी व्याख्या | आप दोनों को विनम्र प्रणाम व बधाई |

  7. जिस प्रकार कमला जी का नन्हा सा हाइकु दिल को बहुत गहरे कहीं छू गया उसी प्रकार आ. हिमांशु भैया जी द्वारा उसकी व्याख्या ने भी उसमें चार चाँद लगा दिए – संक्षिप्त एवं सटीक ! हार्दिक बधाई आपको भैया जी!
    ‘मेरी’ पसंद आपकी पसंद बन यहाँ स्थान पा गयी इसके लिए हृदय से आपका आभार !
    मित्रों द्वारा स्नेहपूर्ण उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक आभार!

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. बहुत संवेदनात्मक प्रस्तुति ….कमला जी के मनभावन हाइकु का काम्बोज भैया जी की लेखनी से विवेचन ..वास्तव में सोने पर सुहागा की उक्ति को चरितार्थ करता है !हार्दिक बधाई ..सादर नमन आप दोनों को !
    साथ ही बेहद भावपूर्ण हाइकु पर अनिता ललित जी की सुन्दर प्रस्तुति आज के आनंद को दुगुना कर गई ! बहुत बहुत बधाई !!

  9. gaagar men saagar bhar diyaa , bhaai Himanshu ji kii vykhayaa ghraai lie hue .
    sbhi ko badhaai

  10. चन्द शब्दों को लिखते समय मैंने सोचा भी न था कि इतने भावपूर्ण नजरिए से ये हाइकु नवाजा जाएगा | अनीता के हाइकु की सरलता और तरलता मन को छू गई | मेरी पसंद को सबकी पसंद बनाने के लिए आभार हिमांशु भैया..
    कमला

  11. naman haihaikukaaron ki samvednatmak prastutee ko -naman hai himanshu ji v anita ji ki lekhni ko ..such !sone par suhaga ,,badhai aap sabhi ko .

  12. एक नन्हे से दिखने वाले हाइकु की कितनी गहराई से व्याख्या हुई है जो निस्संदेह ही काबिले तारीफ़ है ।
    जितने सुन्दर दोनो हाइकु हैं उतनी ही खूबसूरत उनकी व्याख्या ।
    आप सबको बधाई…।

  13. bahut marmik …bahut bahut badhai…


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: