Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 25, 2015

खिलखिलाई क्यारी


1-गुंजन अग्रवाल

1

ऋतु वसंत

खिलखिलाई क्यारी

उजले कन्त ।

2

भौरें की धुन

सुन कली महकी

फगुआ गाती ।

3

आये न तुम

वासन्ती सरगम

विरही धुन ।

4

हे मधुमास !

अवनि का शृंगार

खिले पलाश ।

5

नव पल्लव

विहग कलरव

प्रेम उत्सव ।

6

भूली सुधियाँ

वसंत विरहन

स्व से बतियाँ ।

7

हवा के काँधे

सैर करती फिरे

पुष्प सुगंध ।

8

छाया वसंत

उत्सवों की बहार

विदा हेमंत ।

9

नव है पात

वसंत आगमन

हर्षित धरा ।

10

दिव्य दिगंत

अलि छंद गुंजन

मन वसंत ।

11

खिली कलियाँ

देख ऊषा किरण

हँसा वसंत ।

12

मृदु छुअन

सुवासित सुमन

रवि किरण ।

13

वसंत पुंज

आलोकित दिशाएँ

पलाश कुञ्ज ।

14

बरसी वृष्टि

नन्हा बीज समेटे

सम्पूर्ण सृष्टि ।

15

हँसा वसंत

कुम्हलाये सुमन

हुए जीवंत ।

-0-

2-सुनीता अग्रवाल

1

पीत चुनर

बौर झुमके लाया

 पिया वसंत ।

2

आये न पिया

जियरा झुलसाये

बसंती हवा ।

3

सिमटे वन

बाँझ अमराइयाँ

कोकिल मौन ।

4

अहो वसंत  !

अमराई में गूंजे

कोकिला स्वर

5

खिले पुहुप

गुनगुनाया भौरा

राग बसंत ।

-0-

3-सुभाष लखेड़ा

1

बसंत आया

धरा का रंग रूप

मन को भाया ।

2

पीली सरसों

देखे हुए मुझको

हो गए वर्षों।

3

बसंत आया

यादों के खिले फूल

मन हर्षाया।

4

मंद ये हवा

मन को बहकाये

वे याद आये।

-0-

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Responses

  1. sbhi sundr vaasnti haiku

  2. बहुत सुन्दर वासंती हाइकु….बधाई।

  3. भौरें की धुन

    सुन कली महकी

    फगुआ गाती ।
    -0-
    अहो वसंत !

    अमराई में गूंजे

    कोकिला स्वर
    -0-
    बसंत आया

    यादों के खिले फूल

    मन हर्षाया।
    sunder haiku sabhi ko badhai
    rachana

  4. बहुत ख़ूबसूरत बासंती रंग…
    गुंजन जी, सुनीता जी, सुभाष जी …आप सब को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. गुंजन जी , सुनीता जी बहुत सुन्दर हाइकु हार्दिक बधाई बहनो फागुन आ गया

    2015-02-25 9:23 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  6. बेहद ख़ूबसूरत ..वासंती हाइकु ….गुंजन जी ,सुनीता जी , सुभाष जी आप सभी को हार्दिक बधाई !

  7. sampadak dway ko haardil aabhar mere haiku yaha prakashit kar utsah badhane ke liye … sabhi mitro ka bhi haardik aabhar haiku pr pratikriya de kar utsaah badhane ke liye ..sabhi haiku sundar pr vishesh roop se

    पीली सरसों

    देखे हुए मुझको

    हो गए वर्षों।

    बरसी वृष्टि

    नन्हा बीज समेटे

    सम्पूर्ण सृष्टि ।
    shubhsas ji or gunjan ji ka ye haiku mujhe bahut pasand aaya badhayi evam shubhkamnaye 🙂

  8. वासंती सुगंध से सराबोर हाइकु के लिए आप सभी को हार्दिक बधाई…|


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