Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 22, 2015

धरा वासंती


1-मंजु मिश्रा

1

पीत  वसना

हो गयी धरती

आया वसंत

2

फूल ही फूल

खिले हैं  चहूँ  ओर

छाया वसंत ।

3

नव वधू- सी

ओढ़े पीली चुनरी

धरा वासंती

-0-

2-डॉ॰ आरती स्मित

1

ध्यानस्थ योगी

निर्विकार भावना

अटल पेड़

2

झूमते पेड़

मखमली घास भी

थिरके-नाचे ।

3

भीगी पवन

खगों का कलरव

शांत प्रकृति ।

4

पीपल- शाख

पिता की बाँह जैसी

मुझे बुलाए ।

5

पीपल- छाँव

शांतिस्थल मन का

गहरी नींद

6

माँ की गोद

नीम की घनी छाया

गुणग्राहिका ।

7

गाती हवाएँ

थिरकती पत्तियाँ

झूमता मन

8

शिशु पादप

किरणों की  बाहों में

पाए सुकून ।

9

खिलती भोर

चहकती नदियाँ

गाते पर्वत ।

10

वही सुबह

यादों की  आवाजाही

आतुर मन 

11

धूप का स्पर्श

थरथराते पेड़

जीवन पाते

12

मासूम धूप

अठखेली करती

हर्षित धरा

-0-


Responses

  1. bahut sundar chitran. sabhi haaiku bahut umda, Manju ji aur Arti ji ko badhai.

  2. शिशु पादप ……….सुन्दर

    दोनों रचनाकारों को बधाइयाँ

  3. khoobsurat haiku basdhai manju ji aarti ji .

  4. वासंती वर्णन और पेड़ों की घनी छांव…मन को कहीं गहरे सकून से भर गए हाइकु…|
    हार्दिक बधाई…|

  5. फूल ही फूल
    खिले हैं चहूँ ओर
    छाया वसंत ।

    धूप का स्पर्श
    थरथराते पेड़
    जीवन पाते
    bahut sunder haiku aapdono ko badhai
    rachana


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

श्रेणी

%d bloggers like this: