Posted by: डॉ. हरदीप संधु | फ़रवरी 15, 2015

प्रेम की धारा


1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1गुलाब

आपके बोल

कैसे बताएँ भला

हैं अनमोल ।

-0-

2-कुमुद बंसल

 1

वक़्त की धूल

धुँधला देती अक्स

रिश्तों का रक्स

2

पँख फैलाए

भरती हूँ उड़ान

मन की मान

3

मन बुहारा

शून्यता बन गई

प्रेम की धारा

4

मन– भीतर

बजे बाँसुरी– धुन

मन से सुन

5

हूँ प्रणयिनी

परम आनन्द की

मन भावनी

6

मधुर स्वर

सुनती हूँ गुंजार

हृदय– द्वार ।

7

 प्रेम की सुधा

बरसे चहुँओर

तृप्त वसुधा

8

तृप्त वसुधा

बादलों से पूछती

पिलाऊँ सुधा ?

9

आनन्द छाया

सुधा कण्ठ उतरा

शान्ति पसरी

-0-

3-तुहिना रंजन

1

भाव– विभोर

नेह का आलिंगन

अश्रुपूरित

2

दिव्य प्रणय

अविरल प्रवाह

परमानन्द

-0-

4-रामेश्वर काम्बोज  हिमांशु

1

सहज-भाव

तरल यह प्यार

सदा स्वीकार ।

2

प्रेम अमिय

पिये जो इक बार

बाकी निस्सार

3

खुद से प्यार

औरों  से नफरत

पशुता यही।

-0-

5-हरकीरत ‘हीर’

1

खिले गुलाब

मन-आँगन आज

प्रेम -दिवस ।

-0-

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Responses

  1. bahut sundar!

  2. बहुत सुन्दर हाइकु , ज्योत्सना जी , कुमुद जी , तुहिना जी , भैया आप सभी के
    हाइकू बहुत अच्छे लगे हार्दिक बधाई

    2015-02-15 13:41 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  3. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक, प्रेम-रस में डूबे…कर गए सराबोर…
    सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ! 🙂
    ~सादर
    अनिता ललित

  4. बहुत मनभावन हाइकु ….. बधाई!

  5. prem ki mahima batate sbhi haiku bahut sunder hain . badhai .
    pushpa mehra.

  6. प्रेम की मधुर भावनाओं में रचे बसे इन हाइकु के लिए सबको हार्दिक बधाई…|

  7. प्रेम भीगे ख़ूबसूरत सभी हाइकु आप सभी को बहुत-बहुत बधाई!

  8. pyaar se pyare ,phoolon se taaza haiku…bhaiya ji ,jyotsna ji ,kumud ji tuhina ji , heer ji ..bahut -bahut badhai …..,

  9. sabhi rachnakaron ko badhai evam shubhkamnayen.

  10. prem divs ke pyaare, man bhaavn saare haaiku .
    badhaai sbhi ko

  11. अति सुन्दर एवं सामयिक हाइकु ! रचनाकारो बधाई और शुभकामनाएं।

  12. neh se sarabor haiku .prem ke vibhin rang
    badhai aapsabhi ko

    rachana

  13. sundar madhur dhun gunagunaate mohak haiku ..bahut badhaaii

  14. हिन्दी हाइकु की छोटी सी लहर ने जीवन के हर किनारे को स्पर्श कर अपने में समेट लिया है … प्रेम भाव से तो हिन्दी हाइकु घट छलक छलक उठा है …..सभी हाइकू …कितने सुन्दर हाइकु !!!!

    प्रेम अमिय
    पिये जो इक बार
    बाकी निस्सार (रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु ‘)

    मन बुहारा
    शून्यता बन गई
    प्रेम की धारा ।(कुमुद बंसल )

    कमला


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