Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 15, 2015

प्रेम -चन्दन


1- कमला निखुर्पा

 1

भोला -सा मन

निराला बालपन

रहे मगन ।

2

बड़े जो हुए

जिद्दी घाव न भरे

घायल मन ।

3

मन मितवा

चल भावों के संग

रस अनंत।

 -0-

2-शशि पुरवार

1

प्रेम अगन

रेत सी- प्यास लिये

मन-आँगन ।

-0-

3-सुनीता अग्रवाल

1कमल-1

प्रेम -चन्दन

लुट जाए न लाज

लिपटे सर्प।

2

पिघल गयी

बूँद बूँद चाँदनी

आगोश ‘पी’ के।

3

नब्ज टटोली

मिला न कोई रोग,

था वो मन का।

4

तुम्हारे बिन

सिसकती पायल

कंगन मौन।

5

पिया न पास

जल रहा सावन

झूले उदास।

6

खींचे आँचल

पवन उड़न छू

ठिठके पग।

7

बाकी है आस

फिर खुलीं पलकें,

फैले उजास।

8

बनेंगे शोले

सुधि की चिंगारियाँ

रोको हवा को।

9

बंजर धरा

निखरी हरियाली

प्यार में तेरे।

10

बाँसुरी बनूँ

धरो अधर तुम

गीतों में ढलूँ। 

11

प्रेम- सुगंध

फैलती चली जाए

तोड़ बंधन।

12

चुराए हवा

चन्दन की खुशबू

महका वन।

13

प्रेम का अर्क

है शीतल चन्दन

हरे तपन।

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Responses

  1. bahut sundar!

  2. kamla ji , sunita ji bahut sundar haiku hai hardik badhai aapko dono ko

  3. बड़े जो हुए
    जिद्दी घाव न भरे
    घायल मन
    kamla ji sundar gahri baat …
    प्रेम अगन
    रेत सी- प्यास लिये
    मन-आँगन ।
    prem ka ek behtreen rup ..shashi ji
    badhayi
    sampakdaway ka haardik aabhar meri rachnao ko yaha sthan dene ke liye 🙂

  4. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|

  5. सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे ….हार्दिक बधाई।

  6. बहुत सुन्दर हाइकु….हार्दिक बधाई!

  7. prem divs ke pyaare, man bhaavn saare haaiku .
    badhaai sbhi ko

  8. सभी हाइकु बहुत अच्छे … विशेषकर
    ‘बड़े जो हुए
    जिद्दी घाव न भरे
    घायल मन ।’
    आप सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ !

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. सुन्दर एवं सामयिक हाइकु ! रचनाकारो बधाई और शुभकामनाएं।

  10. Reblogged this on oshriradhekrishnabole.

  11. prem ki chandni dhup me bhi khili hui hai hindi haiku pr indradhanush utra hai
    badhai aap sabhi ko
    rachana

  12. मेरे हाइकुओं को शामिल करने के लिए भी आदरणीय अग्रज काम्बोजजी और अपना बहुमूल्य समय देकर टिप्पणी कर उत्साहवर्धन के लिए सभी रचनाकारों का आभार ,,, दिल को छू गए ये हाइकु ,, शशिजी और सुनीताजी बधाई |

    प्रेम अगन
    रेत सी- प्यास लिये
    मन-आँगन । (शशि पुरवार )

    पिया न पास
    जल रहा सावन
    झूले उदास।

    बाँसुरी बनूँ
    धरो अधर तुम
    गीतों में ढलूँ। (सुनीता अग्रवाल )

    कमला निखुर्पा

  13. बहुत सुन्दर…बधाई…|


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