Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 3, 2015

पलकें भीगीं


श्याम खरे , इन्दौर

1

तपती धरा

बादल-भरा नभ

दोनों व्याकुल ।

2

फूलों का मन

रोया तो होगा

माली ने तोड़ा ।

3

लेकर आई

वसन्त की आहट

तुम्हारी याद ।

4

अन्त में क्या है ?

जल के या गल के

होना है माटी ।

5

शिशु मुस्काएँ

आँखों से प्रभु कहे

यही तो हूँ मैं ।

6

सूर्य किरण

कली को छू कहे-

अब तो खिलो ।

7

एक अकेला

पत्ता डगाल पर

थरथराता ।

8

नवीन पत्ते

रंग भरे कोमल

वृक्ष  के शिशु ।

9

चुटकी छूटी

तितली उड़ गई

रंग दे गई ।

10

तूफ़ानी हवा

नाचते नए पत्ते

गिरे पुराने ।

11

नीला आकाश

अँजुरी में उतरा

सूर्य के साथ ।

12

शिशु का जन्म

जीवन बगिया में

खिलता फूल ।

13

पलकें भीगीं

दु:ख में या सुख में

मन ही जाने ।

14

छुईमुई  हैं

मासूम कलियाँ ये

प्यारी बेटियाँ ।

15

उम्र ढले तो

खुश होना , प्रभु का

घर पास है ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक बहुत सुंदर

  2. अति सुन्दर हाइकु ! दिली बधाई और शुभकामनाएं।

  3. सभी हाइकु बहुत मनमोहक….बहुत बधाई!

  4. श्याम खरे के अभी हाइकु बहुत बढ़िया हैं. प्रकृति और प्रेम के सुन्दर चित्र और बिम्ब हैं, बधाई . सुरेन्द्र वर्मा

  5. मनभावन हाइकु…बहुत बधाई…|


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