Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 30, 2015

कुहासे भरे दिन


 1-सुनीता अग्रवाल

1

छँटे बादल

सहेजती अवनि

प्रीत के पल ।

2

ओस -कनिका

खिड़की से झाँकती

टोहती  मन ।

3

लूटती  रंग

फूलों से तितलियाँ

रँगेंगीं पंख ।

4

है पलछिन

कुहासे भरे दिन

खोल दो पंख ।

5

उषा  नागरी

भरे ज्योति -कलश

म्बर सरि  ।

6)

मुक्त गगन

पंख पसारे उड़े

हठीले स्वप्न ।

7

 गिरी– कंदरा

सिंधु ,सरिता, वन

धरा वसन

-0-

2-वंशस्थ गौतम

1

ठंडी पवन

रूह कँपकपाए

दे  सिहरन ।

2

हवा है नम

गलाए तन मन

दे सिकुड़न ।

3

शीत लहर

काँप गए पहाड़

जमे शहर ।

4

घना कोहरा

हुई ओझल सृष्टि

जग ठहरा ।

5

कहीं न घाम

है मचा कोहराम

नहीं आराम ।

6

ठहरे काम

सर्द चादर ओढ़े

दुबकी शाम ।

7

ठिठुरी भोर

आलसी हुआ दिन

कहीं न शोर ।

8

सूरज लुप्त

दिन हुआ बेचैन

चेतना सुप्त ।

-0-

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Responses

  1. शीत का सुन्दर वर्णन …बधाई आपको!

  2. सभी हाइकु लगे अच्छे। बधाई और शुभकामनाएं !

  3. sbhi badhiyaa haaiku
    badhaai

  4. सुन्दर बिम्ब लिए मोहक हाइकु ..बहुत बधाई !

  5. sabhi haiku pyare hai …badhai aap ko ..

  6. सुन्दर बिम्बों से सजे मनमोहक हाइकु…बहुत बधाई…|


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