Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 26, 2015

कोई ना सगा


1-कृष्णा वर्मा

1

कोई ना सगा

अपनेपन ने ही

ठगा औ छला।

2

कामनाएँ ही

नीलाम कर देती

हैं भावनाएँ।

3

लूट ले गई

सम्बंधों के मानिक

ख़ुदगर्ज़ियाँ।

4

ढूँढें स्वजन

चौराहे खड़ी आँखें

शिलापट्ट- सी।

5

दिल है शुष्क

दरियादिली जा बसी

है बयानों में।

6

उलझे शब्द

मरी संवेदनाएँ

भ्रमित सोच।

7

भुला दे जीना

मिले जो एक बार

मौत हसीना।

8

आँके ना गुण

रेखाओं को कोसते

गुज़री उम्र।

9

मरा विवेक

गढ़े दंभ के कुंभ।

फूटें हटात।

10

बदले ख़्याल

गुम जीवन सुर

गायब ताल।

-0-

2-डॉ आरती स्मित

1

ध्यानस्थ योगी

निर्विकार भावना

अटल पेड़ ।

2

भीगी पवन

खगों के कलरव

शांत प्रकृति ।

3

पीपल- शाख

पिता की बाँह जैसी ,

मुझे बुलाती ।

4

पीपल- छाँव

शांतिस्थल मन का

 गहरी नींद ।

5

गाती हवाएँ

 थिरकती पत्तियाँ

 झूमता मन ।

6

खिलती भोर

चहकती नदियाँ

गाते पर्वत ।

7

भीगा शरद

 इठलाई बरखा

 काँपे सुमन  ।

8

जीवन-यात्रा

दुर्गम हुआ पथ

थकित राही ।

9

आपका नेह

पूँजी है जीवन की

सँभालूँ सदा ।

10

खो गए गीत

सूनी वादियों में क्यों

अबकी बार !

11

गहरी चोट

छिटकती मुस्कान

पलकें नम ।

12

रेतीली आँखें

बरसे शबनम

भीगे कपोल ।

-0-

3-सुनीता शर्मा, ग़ाज़ियाबाद

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गीत संगीत

जीवन प्रफुल्लित

करते सदा ।

2

मन के मीत

जीवन आनंदित

बनाते गीत।

3

विदेशी  हवा

गीतों संग बहती

उड़ी संस्कृति

4

अजीब दौड़

आधुनिक वसन

फूहड़ होड़ ।

5

संस्काऱी  गीत

संस्कारी युवा बनें

सबकी जीत ।

-0-

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Responses

  1. sbhi ke haaiku utkrisht haen
    sbhi ko badhaai

  2. खिलती भोर
    चहकती नदियाँ
    गाते पर्वत ।

    अजीब दौड़
    आधुनिक वसन
    फूहड़ होड़ ।

    उपरोक्‍त दोनों हाइकु बहुत पसंद आए। अन्य हाइकु भी सुंदर। बधाई !

  3. अनुपम प्रस्तुति !!
    ‘खुदगर्जियाँ’ , ‘झूमता मन ‘ और ‘फूहड़ होड़’ बेहद प्रभावी !! हार्दिक बधाई !!!

  4. कोई ना सगा
    अपनेपन ने ही
    ठगा औ छला।
    -0-
    भीगी पवन
    खगों के कलरव
    शांत प्रकृति ।
    -0-
    विदेशी हवा
    गीतों संग बहती
    उड़ी संस्कृति
    bahut khoob badhai
    sunita ji aapka svagat hai
    rachana

  5. sunder srajan ….aap sabhi ko badhai.

  6. कोई ना सगा
    अपनेपन ने ही
    ठगा औ छला।
    बहुत तकलीफदेह होता है इस कडवे सच को स्वीकार पाना…|

    गहरी चोट
    छिटकती मुस्कान
    पलकें नम ।
    बहुत भावुक…|

    विदेशी हवा
    गीतों संग बहती
    उड़ी संस्कृति
    आज का कटु सत्य…|

    आप तीनो को हार्दिक बधाई…|


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