Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जनवरी 24, 2015

चकित हवा


1-अमित अग्रवाल

1

दियासलाई

जैसी याद तुम्हारी

जली उँगली I

-0-

2-ज्योत्स्ना शर्मा

1

भीगा सा मन

लिये बैठा कितने

प्यासे सावन ।

2

क्यों हार गए

न डूबे ही गहरे

न पार गए ।

3

मन तरसे

लौटी सुख बदरी

बिन बरसे ।

4

करो यकीं तो

बन्धन सब प्यारे

संग तुम्हारे ।

5

पूछा न हाल

पल-पल सिहरी

तनहा डाल ।

6

चकित हवा

लगती है बौराई

क्या-क्या ले आई ?

7

सहेजे फिरे

पीले पत्तों की ढेरी

हवा कमेरी ।

8

चुप न रहा

कोकिल,दर्द घना

गया न सहा ।

9

नेह जितना

बरसे ये बगिया

खिले उतना

10

भोर बनाए

सिन्दूरी सपनों को

मीठी –सी चाय

-0-

 3- गुंजन अग्रवाल

      1

      हाथों में छाले

      किस्मत की अभागी

      रोटी की लाले ।

      2

      बनो तो सही

      आस की एक ज्योति

      सुख है वही ।

      3

      जागती रातें

      पलक सोये स्वप्न

      नींदे को ताके ।

      4

      सिसका वन

      लूट ले गयी लाज

      आधुनिकता ।

      5

      स्वेद की बूँद

      मोती बन बिखरे

      भाग्य के पृष्ठ ।

      6

      सहमी खड़ी

      इंसानियत खोटी

      बातें है बड़ी ।

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Responses

  1. sbhi ke utkrisht haiku
    badhai

  2. सभी हाइकु लगे अच्छे। आप सभी को बधाई और शुभकामनाएं !

  3. sabhi haikukaron ko acchi rachnaon ke liye badhaiyan evam shubhecchayen
    Dr. Kavita Bhatt
    Srigangar Garhwal Uttrakhand

  4. दियासलाई
    जैसी याद तुम्हारी
    जली उँगली I
    -0-
    भीगा- सा मन
    लिये बैठा कितने
    प्यासे सावन ।
    -0-
    हाथों में छाले
    किस्मत की अभागी
    रोटी की लाले ।

    bahut sunder soch badhai aap sabhi ko
    rachana

  5. sabhi haiku umda ..vishesh roop se
    kameri hawa ,bhiga sawan ,bhagay ke pristh ,diya salayi

    badhayi

  6. ‘दिया सलाई ‘ , हाथों में छाले’ और ‘आधुनिकता’ बहुत सुन्दर हाइकु ! बहुत बधाई अमित जी एवं गुंजन जी !

    उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद आप सभी का |

    सादर

    ज्योत्स्ना शर्मा

  7. sabhi haiku khoobsurat…diyasalaie,bheega sa man tatha haathon mein chaale….bahut hi pyare lage amit ji ,jyotsna ji ,gunjan ji ko bahut-bahut badhai.

  8. sabhi haiku bahut achhe likhe hain. amit ji jyotsana ji va gunjan jee ko badhai.
    pushpa mehra.

  9. स्वेद की बूँद
    मोती बन बिखरे
    भाग्य के पृष्ठ । बहुत खूब गुंजन जी |
    पूछा न हाल
    पल-पल सिहरी
    तनहा डाल । वाह मार्मिक हाइकु ज्योत्स्ना जी |

    आप सब को सुन्दर हाइकु सृजन के लिए बधाई |

  10. 7
    सहेजे फिरे
    पीले पत्तों की ढेरी
    हवा कमेरी ।
    Bahut achhi umma di hai or bhi haiku hain Jo gahan abhivyakti or sundar upmaon se otprot hain, sabhi ko hardki badhai…

  11. १)
    भीगा- सा मन
    लिये बैठा कितने
    प्यासे सावन ।
    २)
    सहेजे फिरे
    पीले पत्तों की ढेरी
    हवा कमेरी ।
    ३)
    हाथों में छाले
    किस्मत की अभागी
    रोटी की लाले ।

    अत्यंत भावपूर्ण और सुंदर बिंब से सजे बहुत ही सुंदर हाइकु। दोनों रचनाकारों को बहुत-बहुत बधाई !

  12. दियासलाई
    जैसी याद तुम्हारी
    जली उँगली I
    क्या बात है…|

    क्यों हार गए
    न डूबे ही गहरे
    न पार गए ।
    मन को छू गया ये…|

    सहमी खड़ी
    इंसानियत खोटी
    बातें है बड़ी ।
    कटु सत्य…|

    सभी हाइकु बहुत अच्छे लगे…| सबको हार्दिक बधाई…|


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