Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 8, 2015

स्वप्न हमारे


1-पुष्पा मेहरा        

1.

स्वप्न हमारे

रंग भरें मासूम

बोझिल मन ।

2

कोमल शाख

हिमभार से लदी

दोहरी हुई ।

3

उठाना चाही

तमन्नाओं की डोर

ऊँची ही ऊँची ।

4

भोले  हैं   मन

कुंठाओं की नदी में

डूबने  चले ।

5

नन्हे अबोध

चाहें ,थोड़ा विश्वास

 थोड़ा सा प्यार ।

6

टूटे जो डैने

उड़ न सकेंगे, ये

नन्हे परिंदे ।

7

 निर्मलतम

जो रोशन हो मन

हारेगा तम ।

8

फूल -सा मन

शब्द  बाण से छिदा

माला न बना ।

9

चक्रवात थी

तमन्नाओं की आँधी

दहला गई ।

-0-

2-सुभाष लखेड़ा

1

भूलना चाहूँ

जिसे, उस गीत को

मैं कैसे गाऊँ ?

2

तुम्हारी याद

बिछुड़ने के बाद

क्यों आई आज ?

3

वह दीवार

तोड़ न पाए हम

फिर क्यों ग़म ?

4

जलता रहा

जलन की आग में

बुझाता कौन ?

5

लुट रहा था

राहगीर सामने

क्यों रहे  मौन ?

-0-

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Responses

  1. टूटे जो डैने
    उड़ न सकेंगे, ये
    नन्हे परिंदे ।

    लुट रहा था
    राहगीर सामने
    क्यों रहे मौन ?
    sach kaha aap ne
    sunder haiku
    aap dono ko badhai
    rachana

  2. पुष्पा जी और सुभाष जी आप दोनों को ही सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बधाई |

  3. sbhi sundr haaku
    badhaai

  4. स्वप्न हमारे
    रंग भरें मासूम
    बोझिल मन ।

    तुम्हारी याद
    बिछुड़ने के बाद
    क्यों आई आज ?

    Gahan bahivyakti bahut bahut badhai…

  5. मन को छू लेने वाले बहुत सुन्दर हाइकु !
    दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई !!

  6. कोमल मन के कोमल उद्गार -सभी हाइकु दिल को छू गए।
    विशेषकर…

    फूल -सा मन
    शब्द बाण से छिदा
    माला न बना ।-पुष्पा जी

    भूलना चाहूँ
    जिसे, उस गीत को
    मैं कैसे गाऊँ ?-सुभाष जी

    आप दोनों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. lut raha tha, rahgir samane ,kyon rahe maun . satya ko ujagar karata haiku. subhash ji apako badhai.
    pushpa mehra.

  8. सभी हाइकु सामयिक एवं बहुत सुन्दर ! पुष्पा मेहरा जी, आप को हार्दिक बधाई एवं नववर्ष की शुभकामनाएं !

  9. फूल -सा मन
    शब्द बाण से छिदा
    माला न बना ।
    लुट रहा था
    राहगीर सामने
    क्यों रहे मौन ?
    sunder udgaar saty ke saath …bahut badhai aap dono ko.

  10. फूल -सा मन
    शब्द बाण से छिदा
    माला न बना ।
    मर्मस्पर्शी…|

    लुट रहा था
    राहगीर सामने
    क्यों रहे मौन ?
    गहन बात…|

    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


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