Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जनवरी 7, 2015

दिन यूँ खिला


 1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

दिन यूँ खिला

जैसे कोई अपना

आकर मिला ।

2

न हो उदास

दो घर की ख़ुशियाँ

बेटी के पास ।

3

प्यारी -सी कली

खिले, महके जाके

पिया की गली ।

4

नैनों का नूर

बसे बेटी दिल में

कभी न दूर ।

5

हुई पराई

दुआओं में रहती

वो माँ की जाईं ।

-0-

2-पतझड़ी  आभास   

शशि पाधा

1

झरते पात

बिन स्याही लिखते

गीतोपदेश ।

2

अब ना आतीं

धूप की तितलियाँ

ब्याहीं विदेस ।

3

ताँबे का रंग

घोल रहा मौसम

सोने के संग

4

निर्जीव पात

सिर झुका मानते

हवा की बात

5

कल थीं हरी

पात हीन डालियाँ

आशाएँ झरी ।

6

पंछी के फेरे

पतझड़ में ढूँढे

नए बसेरे ।

7

कार्तिक मास

उपहार गठरी

शीत आभास ।

-0-

3-डॉ सरस्वती माथुर

1

लहरें उठीं

रेत से मिल कर

धारा में लौटीं l

2

पर्वत रोये

आँसुओं के सैलाब

झरना हुए l

3

वीणा -तारों से

चाँदनी के तार थे

चाँद बजाए l

4.

भीगा वक्त था

जाम समझ कर

पीते ही रहे l

5

सुबह हुई

चौखट पे सपना

फूल-सा उगा l

6

हवा पे नाम

पानी में अक्स सजा

बिताया दिन l

7

धूप कलम

सूर्य स्याही में डूबो

धरा पे लिखा l

8

खाली पडे हैं

किस रंग से भरूँ

मन के पन्ने l

9

याद का चाँद

मन -टहनी पर

टिका बैठा था l

10

चाँद ले आया

तारों जड़ी चूनरी

चाँदनी -सजी l

11

यादें कागज

ड़ा दी फाडकर

चिन्दियाँ कर l

12

गुलदस्ते हैं

यादों के फूल लगे

महका मन l

-0-

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Responses

  1. बेहतरीन सृजन, सभी हाइकु सामयिकएवं बहुत सुन्दर ! आप सभी को हार्दिक बधाई एवं नववर्ष की शुभकामनाएं !

  2. खूबसूरत हाइकु बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति…. आप सभी को बहुत-बहुत बधाई!

  3. सभी हाइकु अच्छे हैं ..लेकिन ..धूप की तितलियाँ …और .. याद का चाँद बहुत प्यारे …बहुत बधाई !!

  4. दिन यूँ खिला
    जैसे कोई अपना
    आकर मिला ।
    सच में प्रिय ज्योत्सना जी कभी कभी ऐसा ही लगता है ! और हाँ सखी शशि पाधा जी आजकल यही हो रहा है जो आपने लिखा …
    अब ना आतीं
    धूप की तितलियाँ
    ब्याहीं विदेस ।
    बहुत बहुत आभार स्नेही हरदीप जी और भाई हिमांशु जी,ज्योत्सना जी व शशि जी के इतने अच्छे, सुंदर हाइकु पढ़ने का अवसर देने के लिये ! मेरे हाइकु को आपने स्थान दिया उसके लिए भी आपका आभार !
    मकर सक्रांति व लोहड़ी की भी अनेकों शुभकामनाएँ !

  5. sabhi haiku bahut sunder hain jyotsna ji ,shashi ji mathur ji ap sabko badhai.
    pushpa mehra.

  6. सभी हाइकु अतिसुन्दर । विशेषकर बिटिया वाले तो बहुत ही प्यारे।
    ज्योत्स्ना जी, शशि जी, सरस्वती जी आप सभी को बधाई।

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. sbhi mnbhaavan haaiku . badhaai

  8. दिन यूं खिला जैसे कोई अपना आकर मिला, -बहुत ही सुन्दर हाइकु है.रात के इंतज़ार के बाद सुबह का आना बिछड़े हुओं से मिलने के समान ही तो है.ज्योत्स्ना जी को बहुत बहुत बधाई . सुरेन्द्र वर्मा

  9. हुई पराई
    दुआओं में रहती
    वो माँ की जाईं ।

    पंछी के फेरे
    पतझड़ में ढूँढे
    नए बसेरे ।

    चाँद ले आया
    तारों जड़ी चूनरी
    चाँदनी -सजी l
    sunder bhavon se saje haiku
    aap tino ko badhai
    rachana

  10. शशि पाधा जी का ताम्बे का रंग ….,ज्यत्सना शर्मा जी का नैनों का नूर ….और डॉ.सरस्वती माथुर जी का याद का चाँद मन टहनी पर …ने मन मोह लिया |सभी को हार्दिक बधाई |

  11. प्यारी -सी कली
    खिले, महके जाके
    पिया की गली ।

    Adbhut anubhuti…
    खाली पडे हैं
    किस रंग से भरूँ
    मन के पन्ने l

    Khub kha man ke khalipan par…

    bahut bahut shubkamnayen…

  12. आप सभी का हृदय से आभार !!

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  13. सभी के हाइकु बहुत अच्छे लगे…| आप सभी को हार्दिक बधाई…|


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