Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 4, 2015

सर्द रात में


1- डा. सुरेन्द्र वर्मा                                                                                   

  1
सर्द हवा में
एक अकेली हवा
बजाती सीटी ।
2
क्वाँर कार्तिक
हँस पड़ा शरद
चाँद बौराया ॥
3
सर्द रात में
मन में, मैदान में
श्वान भूँकते ।
4
हलकी सर्दी
फूलों से ढकी बाहें
कचनार की ।
5
ओस से भीगा
शिशिर शरारती
भरे बाहों में ।
6
गुलदाऊदी
और अमलतास
हेमंत लास्य ।
7
शेफाली-वन
पगलाई पवन
मन सुमन ।
8
शिशिरागम
कचनार सुगंध
मंद पवन ।
9
टोपी धवल
श्वेत बर्फ धारे
सजे हेमंत
-0-

 2-ज्योत्स्ना प्रदीप

1

पिघला पाला

तेरा जो प्रेम पाला

हिम -नेह में।

2

प्रकृति ओढ़े

तुहिन-आभरण

दिव्यालंकार।

3

फूल व पात

सोहनी -महीबाल

गंतव्य-डाल।

4

धूप -रूपसी

पिघला कर मानी

अहम् हिम का।

5

दूर्वा झुकी है

पत्थर के सीने पे

प्यारी- प्रेमिका।

6

धुंध लपेटे

अश्रु -कण समेटे

दूब अटल।

-0-

3-अनुपमा त्रिपाठी

1

मन- परिंदा

भरता  है उड़ान

स्मित विहान ।

2

प्रेम -सिंचित

खिलतीं पंखुरियाँ

निखरा मन ।

3

अमलतास

पीतवर्णी हैं फूले

ज्यों नेह झूले ।

4

कण -कण में

प्रभु अस्तित्व तेरा

उज्ज्वल मन ।

5

गुनगुनाती

गुनगुनी धूप है

शरद लाई।

6

मुखरित हो ,

अनमोल रचती

भाव  की बेला ।

7

दीप जला रे ,

मुखरित है मौन

आया है कौन   !!

8

साँझ ढले ज्यों

दीप जले मन के

आस पुकारे ।

9

गुलाब खिला

पंखुड़ियाँ बोलतीं

खिलता मन॥

-0-

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Responses

  1. *ओस से
    भीगा
    * * शिशिर
    शरारती
    *
    * भरे बाहों में ।वाह बहुत सुन्दर हाइकु सुदर्शन जी **धूप -रूपसी * *पिघला कर
    मानी * *अहम् हिम का।—**मुखरित हो ,* *अनमोल रचती* *भाव की बेला ।ज्योत्सना
    जी अनुपमा जी सुन्दर हाइकु हार्दिक बधाई *

    2015-01-04 12:58 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  2. sbhi haaiku gaagr men sagr bhar rhe haen
    sbhi ko badhaai

  3. ओस से भीगा
    शिशिर शरारती
    भरे बाहों में ।

    धूप -रूपसी
    पिघला कर मानी
    अहम् हिम का। ……..बहुत मनमोहक हाइकु!

    खूबसूरत प्रस्तुति के लिए सुरेन्द्र जी, ज्योत्स्ना जी,अनुपमा जी….बधाई!

  4. सुन्दर बिम्ब उकेरते बहुत ही सुन्दर हाइकु हैं ! ओस भीगा शिशिर , झुकी दूर्वा ,धूप रूपसी ,दीप जला रे …क्या कहिए ! बेहद ख़ूबसूरत प्रस्तुति !!!
    बहुत बधाई सभी को ,नमन !

  5. सर्द हवा में
    एक अकेली हवा
    बजाती सीटी ।
    दीप जला रे ,
    मुखरित है मौन
    आया है कौन !!
    bade hi pyare haiku ….surendraji tatha anupmaji ko haardik badhai.

  6. bahut sundar rachanayen, sabhi haikukaron ko badhaiyan,
    Dr. Kavita Bhatt

  7. क्या बात है ज्योत्स्ना जी……कोई एक हाइकु को चुनना बहुत ही मुश्किल है क्यूंकि आपके सभी हाइकु उत्तम हैं !!!!!! बस आप यू ही हाइकु लिखकर हिन्दी भाषा मे चार चाँद लगाते रहिये………अनुपमा जी और सुरेंदेर जी के हाइकु भी मनमोहक।…..सभी को बधाई !!!!!

  8. aap sabhi ka dil se abhaar…

  9. बहुत भावप्रवण हाइकु हैं…किसी एक हाइकु की तारीफ़ करना बाकी हाइकु के साथ अन्याय प्रतीत होता है..| आप सबको बहुत बधाई…इन हाइकु के लिए…|


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