Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जनवरी 3, 2015

हिन्दी हाइकु के रंग : नए साल के संग !!


डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

‘वसुधैव कुटुम्बकं’ की अवधारणा को साकार करता हाइकु एक ऐसा अद्भुत संयोजक है जिसने तमाम विविधताओं से परे हृदयों को एक सूत्र में पिरो दिया । उसमें भी हिन्दी हाइकु ने देश – विदेश की सुन्दर रीतियों-नीतियों को आत्मसात् करते हुए भारतीय सोच को स्वीकृति दी । प्रकृति,पर्यावरण की चिंता और चिंतन-मनन  के साथ हिन्दी हाइकु की उत्सव धर्मिता भी उल्लेखनीय है । होली के रंगों में डूबा हाइकु तो दीपावली के दीयों से जगमगाता हाइकु , राखी का रेशमी धागा तो कभी ईद का चाँद हाइकु ,लोहड़ी की 1-गुन्जनफुलियों -सा खिलता हाइकु तो कभी क्रिसमस का सांता भी हाइकु है । यही हाइकु वर्ष भर झेली कठिनाइयों ,विसंगतियों से सबक सीखता नए वर्ष का आयोजन भी खूब धूमधाम से करता है। यहाँ हाइकु का नव वर्ष आयोजन ही अभीष्ट है ।

       सुखों की छाँव और दु:खों की कड़ी धूप लिए समय का रथ सतत गतिमान है ।समय का यही स्वभाव हिन्दी हाइकु में भी ध्वनित होता है । नए साल का आगमन विगत वर्ष की सारी मधुर –तिक्त स्मृतियों को साकार कर देता है।कभी प्रतीत होता है कि समय-चक्र स्वयं अपनी वर्षगांठ मना रहा है –

बढ़ती उम्र /वर्ष  गाँठ मनाए / समयचक्र । डॉ. हरदीप कौर सन्धु

तो कभी लगता है -समय की पुस्तक पर नई भोर नया पृष्ठ खोल मंगलकामनाएँ अंकित कर रही है –

गुलाबी भोर /नव पृष्ठ ले आई / लिखे मंगल । पुष्पा मेहरा

धीरे से खोलें / आओ नव वर्ष का / प्रथम पृष्ठ । डॉ. हरदीप कौर सन्धु

आगत की उमंग , नए संकल्प और उल्लास के बीच भी  विगत साल की खट्टी-मीठी स्मृतियाँ रह-रह कर कौंधती हैं । विदाई की बेला है तो मन कैसा – कैसा तो होना ही है  , उस मनःस्थिति को अनेक हाइकुकारों ने देखिए कैसी सटीक अभिव्यक्ति दी है –

शाख से गिरा /एक और साल था / वो सिरफिरा । पंढरीश चेके

विगत वर्ष / है अंतिम विदाई / पूर्ण विराम । शाशि पाधा

कुछ दर्द थे / कई सारी खुशियाँ / बीते साल में । प्रियंका गुप्ता

फिसल गया / वक्त की हथेली से / रेत सा साल । नमिता राकेश

बारह माह / सुखदुःख निभाए / विदा पुराना । ज्योतिर्मयी पन्त

हँस के , रो के / आखिर बीत गया / साल पुराना । डॉ. जेन्नी शबनम

कुछ खट्टा ये / कुछ मीठा बीता है / गया वर्ष रे । सीमा स्मृति

       विगत पर चिंतन-मनन करता हाइकु पुनः पूर्ण उमंग से नवागत के स्वागत में तत्पर भी दिखाई पड़ता है । सकारात्मक सोच , जिजीविषा से भरपूर हाइकु ने कहा –

आइए चलें / सामने नव वर्ष / गले तो मिलें । सुभाष लखेड़ा

कुंडी खड़की / स्वागत में खड़ा था / नूतन वर्ष । डॉ. जेन्नी शबनम

हों उल्लासित / नूतन वर्ष आया / करें स्वागत । रेनू चंद्रा

अंकुर फूटा / नई / आशाएँ लिए / करें स्वागत । भावना सक्सेना

       एवं, विविध प्रकार से नए वर्ष के स्वागत-सत्कार में कहीं तिलक लगाकर मंगल कामनाएँ की जाती हैं तो कहीं शान्ति दीप प्रज्ज्वलित कर आरती उतारी जाती है –

भोर सिंदूरी / नव वर्ष के माथे तिलक करे । कृष्णा वर्मा

करो तिलक / माथे नव वर्ष के / प्यार के रंग । डॉ. अनीता कपूर

अभिनन्दन / नव वर्ष तुम्हारा / जले शान्ति लौ । कृष्णा वर्मा

नव वर्ष की /शुभ बेला है आई / ले अंगडाई । शशि पुरवार

निर्मल , निश्छल नव वर्ष कहीं नन्हे शिशु सा मोहक प्रतीत होता है तो कहीं अनछुए स्पर्श सा –

नया साल तो / नवजात शिशु सा / मन मोहता । प्रियंका गुप्ता

नवीन वर्ष / अनछुआ सा स्पर्श / कैलेण्डर में । ज्योत्स्ना प्रदीप

       आया तो नव वर्ष परन्तु सबके लिए अलग – अलग अनुभूति लिए । यदि एक ओर उल्लास है ,उजास है तो दूसरी ओर आशंकाएं और उनका समाधान खोजते अनगिन प्रश्न भी सम्मुख खड़े हैं। ऐसे प्रश्न जिनका हल खोजते-खोजते वर्षों बीत गए लेकिन वह जस के तस । जिन्हें देख कर लगता है कि क्या वाकई वर्ष बदलने के साथ कुछ और भी बदलता है ? –

नया दिनांक / बीता पिछला साल / सब वैसे ही । सुप्रीत कौर सन्धु

कुछ बदलेगा /तारीख के अलावा / इस साल भी । रचना श्रीवास्तव

नई तारीखें / पुरानी समस्याएँ / इस साल भी । रचना श्रीवास्तव

मरे किसान / मुरझाई फसलें / इस साल भी । रचना श्रीवास्तव

भूखी मुनिया / करे सवाल ,रोटी ,/ देगा ये साल । जया नर्गिस

सारे सवाल / नए वर्ष से मांगें / नए जवाब । देवी नागरानी

नव वर्ष में / कुछ जश्न में डूबे / कुछ प्रश्न में । उमेश मोहन धवन

…और शिद्दत से कह उठता है हाइकु –

बेटी को जन्म / बहुओं को सम्मान / नव वर्ष में । रचना श्रीवास्तव 

              फिर भी निराशा तो स्वभाव नहीं हाइकु का । नई उम्मीदों , आशाओं के रंग के साथ नया वर्ष खूब चहका । धूम-धड़ाका ले उत्सव धर्मी हाइकु ने खुशियों का संसार रचा –

नूतन वर्ष / अंजुरी भर आशा / मन में हर्ष । रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

शिशु आशाएं / किलकने लगी हैं / चहके द्वार । रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

नवल वर्ष / संगीत का झरना / बहाने लगा । डॉ. हरदीप कौर सन्धु

हौले से आते / नव वर्ष कदम / स्वप्न सजाते । डॉ. भावना कुँअर

धूमधड़ाका / आया है नया साल / मन चहका । डॉ. जेन्नी शबनम 

नई किरण / नए साल के भाल / लिखे उल्लास । डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

नए वर्ष में / हम नए हर्ष में / धूम मचाएँ । राकेश नमित

नए साल ने / ले ली है अंगडाई / कली मुस्काई । ऋता शेखर मधु

रस पगासा / नव वर्ष जो आया / सभी को भाया । डॉ. सरस्वती माथुर

नूतन वर्ष / पावन उत्सव सा / उतरे द्वार । कृष्णा वर्मा

खुशियाँ ओढ़े / नव वर्ष है आया / धूम मचाता । अनिता ललित

नई आशा से/ रँग गया सूरज / नई भोर में । अनिता ललित

शुभ प्रभात / नवल वर्ष आया / उल्लास लाया । अनुपमा त्रिपाठी

नव स्फूर्ति , उमंगो भरा मन नए वर्ष के नए केनवास पर मन चाही आकृतियाँ उकेरने की सामर्थ्य रखता हुआ चाह करता है –

नए साल का / कैनवास नया है / रंग भर दो । रमेश यादव

नई लहर / नया है केनवास / नई सहर । मंजुल भटनागर

       यदि उल्लासमय आयोजन है तो नए संकल्प , नई आशाएँ भी हैं । विगत वर्ष की त्रुटियों से सीख ले कर नए सुन्दर स्वप्नों को साकार करने की प्रेरणा बनता हाइकु कह उठा –

अँजुरी भर / तुमसे है उम्मीद / नए साल में । सुशीला शिवराण

नव वर्ष / क्षुब्ध भारत वर्ष / ला न्याय, हर्ष । सुशीला शिवराण

नारी सम्मान / नव वर्ष संकल्प / हर नर का । सुशीला शिवराण

अवनी तल / फैले ज्ञान आलोक / नए वर्ष में । कृष्णा वर्मा

नए साल में / नए सुमन खिलें / नया रंग हो । देवी नागरानी ।

सीढियाँ चढ़ें / संभल कर सभी / नए वर्ष में । डॉ.भावना कुँअर

सकल विश्व / सिंचे,नेह कृपा से / वर्ष नवल । भावना सक्सेना

वर्ष नवल / चाह भी हो नवल / बने सफल । ऋता शेखर मधु

नई सदी में / सपने जन्म लेंगे / पूरे भी होंगे । डॉ. रमा द्विवेदी

नहीं रोपेंगें / नफ़रत की पौध / नए साल में । देवी नागरानी

रिश्तों के धागे / मिल बुनते रहें / नए वर्ष भी । डॉ. हरदीप सन्धु

सभी को प्यार / नेह भरी बौछार / हजारों बार । रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

उम्मीद बीज / देता नव वर्ष को / पुराना वर्ष । रचना श्रीवास्तव

आओ रोप दें / फलदार से वृक्ष / नव वर्ष के । डॉ. अनीता कपूर

कातो प्यार को / चरखा नव वर्ष / रोज़ हो ईद । डॉ. अनीता कपूर

गले लगाएं / भूलें सारे शिकवे / नए साल में । मुमताज टी एच खान

रहे अधूरे / सपने हों वो पूरे / इस वर्ष में । मुमताज टीएच खान

ये नव वर्ष / नया रंग ले आए / खुश्बू फैलाए । उर्मि चक्रवर्ती

       वस्तुतः मानव मन ने सदा प्रकृति के उदार रूप की चाहना की है । भारतीय मानस ने तो वृक्ष , नदी-नद , पर्वत , धरा , पवन ,अग्नि आदि सभी प्राकृतिक शक्तियों को देवी –देवताओं के रूप में देखा , उनकी आराधना की तथा समस्त सृष्टि के कल्याण की कामना की ।हिन्दी हाइकु भी नवागत वर्ष का वंदन अभिनन्दन कर उससे प्रार्थना करता है कि खुशियों के मोती के भरे-भरे थाल हों किन्तु किसी नयन से ,किसी पलक पर दुःख भरे आंसुओं के मोती कभी न बिखरें –

हे नए साल ! / खुशियों के मोती के / ले आना थाल । डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा

भीगी पलकें / बिखराएँ न मोती / नए साल में । डॉ. भावना कुँअर

                      2-गु,न्जन     ~~~**~~

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा ,H-604 , प्रमुख हिल्स , छरवाडा रोड , वापी

जिला वलसाड , गुजरात – 396191

 

 

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Responses

  1. अति सुन्दर प्रस्तुति! अपने उत्कृष्ट आलेख में मेरे हाइकुओं को स्थान देने के लिए धन्यवाद ज्योत्स्ना जी! नव वर्ष शुभ हो।

  2. Achha lekhan navvarsh ki shubhkamnayen …

  3. समीक्षात्मक सुन्दर रचना; हार्दिक बधाई ! – सुभाष चंद्र लखेड़ा

  4. smikshaatmk ne saal ke haikuon kaa vivechn
    badhaai sbhi ko

  5. HAIKU KE YE PYARE RANG AAPNE BADI HI KHOOBSURTI KE SAATH SAJAAYE HAI TYOTSNA JI….BADHAI NAV VARSH KE SAATH – SAATH BAHUT HI BADHIYA LEKH KI .

  6. GUNJAN JI AAPKE NAVAL PUSHP TATHA PRANAY VYOM KI KHUSHBOO V CHAMAK MAN KO CHOO GAIE…NAV VARSH KE SAATH – SAATH SUNDER PRASTUTI KE LIYE BADHAI .

  7. hindi haiku ke rang – naye sal ke sang alekh va nav varsh ke haiga bahut hi sunder hain jyotsna ji , gunjan ji ap dono ko badhai.
    pushpa mehra.

  8. बहुत बहुत बधाई ज्योत्सना जी , सार्थक, ज्ञानवर्धक आलेख है बहुत सुन्दर है मन
    एक बार पढ़कर भरा ही नहीं – शशि पुरवार

    2015-01-02 19:08 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  9. सुंदर सामायिक लेख
    ज्योत्स्ना जी की रचनाधर्मिता को नमन
    साभिवादन

    रेखा रोहतगी

  10. प्रेरक प्रतिक्रिया हेतु आप सभी की हृदय से आभारी हूँ तथा नए वर्ष में सभी रचनाकारों के साथ “हिन्दी हाइकु “उन्नति के नए शिखर पाए ऐसी ईश्वर से कामना करती हूँ !!

    ……सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति निहित है !!!

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  11. सुन्दर ,सार्थक हाइगा के लिए गुंजन जी को बहुत-बहुत बधाई !!

  12. ज्योत्स्ना जी, विगत के प्रति आभार और आगत के स्वागत में विभिन्न हाइकुकारों ने हाइकु रचना की है | सब के उद्गारों को अपने ह्रदयग्राही आलेख में शब्दबद्ध किया है आपने | आपको बहुत बहुत बधाई |

    शशि पाधा

  13. sabhi rachnakaron ko navvarsha ki hardik shubhkamnayen,
    utkrisht rachnayen.
    Dr. Kavita Bhatt

  14. prerak pratikriya hetu bahut-bahut aabhar aadaraneeya Shashi didi evam Dr. Kavita Bhatt ji .

  15. बहुत सार्थक आलेख है…| हार्दिक बधाई…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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