Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 28, 2014

मखमली छुअन !


डॉ शकुन्तला तँवरडा. शकुंतला तँवर

1

पंखुरी बन

बिखर गया फूल

जीवन शूल।

2

भोर का तारा

नभ के -आँचल में

अबोध शिशु ।

3

सागर वहीं

उफनती बहती

बेचैन नदी।

4

रूप की धूप

जीवन- उपवन

खिलखिलाए ।

5

बहता जल

संजीवनी -संचार

वन- विहार ।

6

बेटी की विदा

घूमता- सा आँगन

रूठी देहरी ।

7

अनेक बार

मरण का वरण

बुझता दीप ।

8

साँसों में गति

लाज -लहर दौड़ी

क्या प्यार हुआ ।

9

ताल- लहर

मौन की इबारत

मन तरंग।

10

सावन माह

मखमली छुअन

हरित दूर्वा ।

11

झूमीं वल्लरी

फूलों की मुस्कान से

शहद भरा।

-0-

 

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Responses

  1. सभी हाइकु बहुत सुन्दर ! डॉ शकुंतला तँवर हार्दिक बधाई एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

  2. बहुत सुंदर हाइकु पढ़नें को मिले!
    हाइकु परिवार में आपका स्वागत है !
    सावन माह
    मखमली छुअन
    हरित दूर्वा ।
    यह हाइकु बहुत ही खुबसूरत लगा ।
    नववर्ष की शुभकामनायें!

  3. साँसों में गति
    लाज -लहर दौड़ी
    क्या प्यार हुआ ।
    बड़ा मासूम सा सवाल लिए हुए हाइकु…|
    सभी हाइकू पसंद आये…| हार्दिक बधाई…|
    हाइकु परिवार में स्वागत है आपका…|

  4. बहुत मीठे हाइकु आ शकुन्तला तँवर दी ।


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