Posted by: डॉ. हरदीप संधु | दिसम्बर 26, 2014

अकेलापन


डॉ०भावना  कुँअरभावना कुँअर - Copy

1

घुटन मिले

उससे अच्छा लगे

अकेलापन।

2

कभी न मिला

जो भी था चाहा,पाया

अकेलापन।

3

अकेलापन

बाँटे रहा मुझसे

अपना ग़म ।

4

चाँद औ तारे

रोज़ पुकारें,रोके

अकेलापन।

5

नींद न आए

अकेलापन मुझे

लोरी सुनाए।

6

मेरी आज़ादी

ज़ंजीरों में जकड़ी

सदा उलझी।

-0-

 

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Responses

  1. उम्दा हाइकु

  2. सभी हाइकु बहुत सुन्दर ! डॉ भावना कुँवर जी हार्दिक बधाई एवं नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

  3. akelepan par likhe sabhi haiku bahut achhe likhe hain .bhavana ji apko badhai .
    pushpa mehra.

  4. akelepan ko kahate sundar haiku ,bahut badhaaii !

  5. बहुत ख़ूब ! एक से बढ़कर एक सभी हाइकु !

    अकेलापन
    बाँटे रहा मुझसे
    अपना ग़म ।

    चाँद औ तारे
    रोज़ पुकारें,रोके
    अकेलापन।

    नींद न आए
    अकेलापन मुझे
    लोरी सुनाए।
    ……..
    कोई किसी से कम नहीं !
    इतनी सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई भावना जी।

    ~सादर
    अनिता ललित

  6. अकेलापन
    बाँटे रहा मुझसे
    अपना ग़म ।

    वाह !अन्य हाइकु भी सुंदर !

  7. अकेलापन लोरी सुना रहा, बहुत सुन्दर…| उम्दा हाइकू के लिए हार्दिक बधाई…|


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