Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 23, 2014

फैला है धुआँ


पुष्पा मेहरा            

1

 फैला है धुआँ

 ना अँगीठी, ना आग

 न ही लपट ।

2

 सेंध लगाता

 अँधेरे के गढ़ में

 रोशन हंडा ।

3

 भेद न पाया

 कोहरे की दीवार

 मोटी थी बड़ी ।

4

 भोर की हँसी

 चुरा के भाग गयी

 घटा चोरनी ।

5

 यादें बावरी

 सूप भर धूप ले

 बैठीं ओसारे ।

   6

 शीत से डरे

 आकाश में बादल

 खूब ही रोये ।

7

 फूल नहीं थे

 ओलों की बौछार ने

 खेली थी होली ।

8

 प्रेम-विहीन

 ये मन हिमखंड

 ऊष्मा-रहित ।

-0-

2-डाँ सरस्वती माथुर

1.

जला आशियाँ

छीना जो बचपन

क्या ख़ाक मिला ?

2

बच्चों की चीख़ें

हैं कफ़न हज़ार

क्या मिला यार?

3

चीत्कारें गूँजी

आँसुओं के सैलाब

रुक ना पाये ।

4

चिरनिद्रा में

मासूम बच्चे सोये

अल्लाह रोये।

5

चेत भी जाओ

नफ़रत मिटाओ

डरो ख़ुदा से ।

6.

नरसंहार

कब तक करोगे

रे अत्याचार ?

7

नींद घरौंदा

सपनों की चिड़िया

उठी सवेरे l

8

सागर तट

लहरों संग खेला

फेनों  का रेला l

9

रात पिरोई

चाँदनी उतरी तो

चकोरी रोयी l

10

कागजी नाव

झकोले  ही है खाती

पार न पाती l

11

धूप और छाँह

तितली– सी डोलती

पंख खोलती  l

12

नींदों की काई

सपनों का सूरज

फिसल गिरा l

13

 मन के पन्ने

यादों के चित्र खींच

भरते  गये l

14

उम्र की संध्या

सूरज की तरह

डूबती गयी l

15

हवा गुलाबी

भीगते  मौसम में

मन शराबी l

16

 यादों की हवा

मन  खिडकियों के

पर्दे खोलती l

-0-

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Responses

  1. Sabhi haiku bhavpurn, gahan abhivyakti liye, bahut bahut badhai….

  2. यादें बावरी
    सूप भर धूप ले
    बैठीं ओसारे ।
    bahut hi sunder bimb
    चीत्कारें गूँजी
    आँसुओं के सैलाब
    रुक ना पाये ।
    bahut hi dardnak hai
    badhai aapdono ko
    rachana

  3. बेहतरीन सृजन, सभी हाइकु बहुत सुन्दर ! पुष्पा मेहरा जी और डॉ सरस्वती माथुर जी, आप दोनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !

  4. बहुत सुन्दर हाइकु सभी ..बधाई !

  5. बहुत अच्छे हाइकु…..पुष्पा मेहरा जी, सरस्वती जी बहुत बधाई!

  6. chitkaren guunji ,ansuon ke sailab ,ruk na paye .dard se bhara haiku .mathur ji apko badhai.
    pushpa mehra .

  7. gahan bhaav liye sunder haiku…..pushpaji tatha sarswatiji ko bahut -bahut badhai.

  8. गहन भाव लिए सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं। विशेषकर –
    ‘भोर की हँसी
    चुरा के भाग गयी
    घटा चोरनी ।’ -पुष्पा जी

    एवं
    ‘धूप और छाँह
    तितली- सी डोलती
    पंख खोलती l’ -सरस्वती जी

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. आप दोनों के हाइकु बहुत पसंद आए…भावप्रवण और सुन्दर…|
    हार्दिक बधाई…|


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