Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 11, 2014

सरस्वती सुमन -हाइकु -विशेषांक


सरस्वती सुमन  -हाइकु -विशेषांक ( अक्तुबर-दिसम्बर -2014)

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Responses

  1. “सरस्वती सुमन” का हाइकु विशेषांक पढ़ने का अवसर देने के लिए बहुत आभारी हूँ | हाइकु से सम्बद्ध शिल्प , भाव-विस्तार और संयोजन विषयक विस्तृत पठनीय सामग्री उपलब्ध कराता विशेषांक यदि हाइकु शोधार्थियों के लिए अनुपम उपहार है तो समस्त हिन्दी हाइकु जगत के लिए अनमोल निधि | सुन्दर कलेवर में जैसे अति सुन्दर आत्मा का निवास हो | यदि शिल्प विषयक जानकारी है तो निदर्शन स्वरूप सशक्त हाइकुकारों के हाइकु भी हैं | वरिष्ठ हाइकुकारों के साथ नवोदितों को भी स्थान देकर उनका न केवल उत्साहवर्धन किया गया है अपितु नई पीढ़ी को जैसे पथ पर अग्रसर किया है | एतदर्थ प्रधान सम्पादक ( डॉ) आनन्दसुमन सिंह , सम्पादक द्वय और विशेषांक के अतिथि सम्पादक रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी तथा समस्त सहयोगियों के प्रति बहुत-बहुत बधाई ,शुभ कामनाएँ !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  2. SARSWATI SUMAN KA ANK PADHNE KA SHAUBHAGAY MILA .. PATRIKA ME EK SE EK BADH EK SUNDAR HAIKU NAMI MANJHE HAIKUKAARO KI RACHNAYE PADH KR MAN PRASANN HO GYA …INHE PADH KR BAHUT KUCHH SIKHNE EVAM SAMJHNE KO MILTA HAI ..SATH HI NAVODIT RACHNAKARO KI RACHNA KO STHAN DE KAR UNKA MANOBAL BADHAYE GYA YE EK SARAHNIY KADAM HAI MERI RACHNA KO BHI STHAN DILANE KE LIYE KAMBOJ BHAIYA OR HARDEEP DIDI JI KA TAHEDIL SE AABHAR 🙂

  3. “सरस्वती सुमन” का हाइकु विशेषांक men visv ke sbhi haaikukaaron ko jodaa hae
    jivan ke sbhii ke sbhi aayaamon , noo rason ko darshaataa hae . 184 prishth men klaapaksh – bhaav paksh kaa adbhut sngam hae . mhaakaavy saa gaagar men saagr bhar diyaa hae .
    Abtract Art (adhunik kala ke vibhinn rngon se sajaa mukhprishth bemisaal hae .

    haa mere bhii haaiku praakashit hue haen aapko sbhi haikukaaron ko bdhaai. Dr Aaandsuman ji aur Raameshvr jii ko jinki vajah se vishv hindi saahity ko utkrisht dharohr milii .
    vidvaanon ke vichaar padhne ko mile , shodhkartaaon ko bhi laabh milegaa.

    sabhi ko badhaai .
    saadr naman
    manju gupta
    vashi , navi mumbai

  4. आज मुझे सौभाग्य मिला कि अक्टूबर की प्रतिष्ठित सरस्वती पत्रिका में हाइकु विशेषांक में पृष्ठ 45 पर हाइकु प्रकाशित हुए , देखा – पढ़ा।
    विश्व के सभी वरिष्ठ और नव हाइकुकार जुड़े हैं। मुखपृष्ठ की आधुनिक कला में विविध रंगों का चित्र संयोजन बेमिसाल है।
    184पृष्ठों में हाइकु जीवन के सभी आयामों , नौ रसो से ओत -प्रोत हाइकु भाव पक्ष – कला पक्ष के सौंदर्य को दर्शाता है। विश्व के हिन्दी साहित्याकाश की यह धरोहर नई पीढ़ी , शोधाकर्ताओं का मार्ग दर्शन करेगी।
    प्रधान संपादक डॉ आनंदसुमन सिंह जी का , रामेश्वर काम्बोज जी व पूरी टीम को , सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई !

  5. सरस्वती सुमन के हाइकु विशेषांक में अन्य हाइकुकारों के साथ मेरे हाइकु को स्थान देने के लिए आभार ।आप इस अंक के अतिथि संपादक भी हैं और जिस लग्न और परिश्रम से आपके साथ अन्य लेखकों ने हाइकु सम्बन्धी आलेख लिखे हैं उन्हें पढ़ कर बहुत प्रसन्नता हुई । आप सब को हमारी ओर से बधाई । अपनी रचना को प्रकाशित हुए देख कर जो आनंद मिलता है उसे तो शब्दों में लिख नहीं सकती । आप ऐसे ही प्रेरणा स्रोत बने रहें, इसी शुभकामना के साथ ।

    शशि पाधा

  6. Adaraniy Dr, Anandasuman Singh ji , bhaiya Kamboj ji ye kaam asan nahi tha aap jaese sahtiya premi hi isko anjam de sakte hain. aapko bahut bahut hardik badhai aur sabhi achchhe haikukaron me mujhe bhi shamil karne ke liye dhnayavad.Ham sabhi par aapka ashirvad bana rahe yahi prarthna hai
    saader
    Rachana Shriwastava

  7. “सरस्वती सुमन” पत्रिका का हाइकु विशेषांक पढ़ कर अत्यंत प्रसन्नता हुई। मनमोहक कलेवर अद्भुत अंक। वरिष्ठ हाइकुकारों के साथ अभ्युदितों को स्थान देकर उनका मनोबल बढ़ाने का प्रशंसनीय कार्य किया है। सभी हाइकुकारों को बधाई। मेरे हाइकुओं को भी इस विशेषांक में स्थान देने के लिए आभार। हाइकु सम्बंधित आलेखों से सजा १८४ पृष्ठों का उमदा विशेषांक हाइकु शोधार्थियों के लिए निश्चित ही वरदान सिद्ध होगा। मुख्य सम्पादक डा० आन्नदसुमन सिंह जी, सम्पादक मण्डल, अतिथि सम्पादक रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी तथा सभी सहयोगियों को शत-शत बधाई।

    सादर
    कृष्णा वर्मा

  8. “सरस्वती सुमन” का हाइकु विशेषांक अक्टूबर-दिसम्बर १४ ,पढ़ने का मुझे सौभाग्य मिला । यह समस्त हिन्दी हाइकुकारों के लिये वास्तव में एक अनोखा व प्रशंसनीय उपहार है । विशेषांक में प्रकाशित सभी हाइकुकारों को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।मुझे भी इसमें क्रम ५७ पर सम्मलित करने के लिये डॉ. आनन्‍द सुमन जी एवं आदरणीय काम्बोज जी को धन्यवाद ज्ञापित करती हूँ ।

  9. ”सरसवती सुमन ” का हाइकु विशेषांक ”अक्तूबर दिसंबर का पढने को मिला | ये हिंदी हाइकुकारो का अनूठा उपहार ”नवोदित हाइकुकारो के लिए संबल है मेरे हाइकु को इस अंक में वरिष्ठ हाइकुकारो के साथ देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई | आदरणीय आनंद सुमन जी और रामेश्वर काम्बोज भाई की आभारी हूँ आपने मुझे मौका दिया ,,,,,,धन्यवाद

  10. हाइकु विशेषांक में मेरे लिखे हाइकुओं को स्‍थान मिला देखकर अति प्रसन्‍नता मिल्‍ाी परन्‍तु भईया यह सारा श्रेष्‍य आप ही को जाता है हमें तो हाइकु का अर्थ भी आप ने दिया। आप हमेश अनूठा उपहार देते हैं । मैं भी आदरण्‍ाीय आनंद सुमन और काम्‍बोज भाई की आभारी हूँ।

  11. hindi haiku jagat ke bahumuly ratn ki chamak jinhone hum sabhi tak pahuchaie hai aise mahaan vibhutiyo…. ko …saadar naman….aap ki chatrchaaya vardaan hai hamare liye aashirvaad hai….ye isi tarha bana rahe …. .dr.anandsuman ji tatha himanshu ji ke aabhaari hai hum …shubhkaamnao ke saath…

  12. `सरस्वती सुमन’ के हाइकु विशेषांक में प्रतिष्ठित हाइकुकारों के बीच स्वयं का भी स्थान देख कर बहुत खुशी हुई…| आदरणीय कम्बोज जी का बहुत आभार…| निश्चय ही यह अंक बहुत संग्रहणीय बन गया है, जिसके लिए काम्बोज जी बधाई के पात्र है…| सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई…|

  13. सरस्वती सुमन , विश्व के लगभग सभी हाइकुकारों के हाइकुओं को समेट कर विशेषांक के रूप में सुन्दर कलेवर के साथ मिली| आदरणीय आनन्द सुमन सर,आदरणीय काम्बोज सर के सार्थक एवं सराहनीय प्रयास ने हाइकु विधा को सम्मान के साथ प्रस्तुत किया| मैं भी इस संग्रहणीय अंक का हिस्सा हूँ, इसके लिए सम्पादक मंडल का हार्दिक आभा र !!
    सभी रचनाकारों को बधाई व शुभकामनाएँ !!

  14. सरस्वती सुमन हाइकु विशेषांक पढ़ कर मन अत्यंत प्रसन्न हुआ |सभी हाइकु कारों को इस विधा में लिखने के लिये जिस तरह भाई कम्बोज जी ने प्रोत्साहन दिया है उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है इस अदभुत कार्य करने के लिए मैं भाई काम्बोज जी को हार्दिक बधाई देती हूँ |इतने सारे लोगों को एक सूत्र में बाध कर जो सभी हाइकुकारों में अपनत्व की भावना जागृत की है वह अद्वितीय है |सत्रह वर्णों में अपनी बात रखना और पूरे दृश्य को दर्शाना यह एक अनूठी कला है जिस कला में सभी हाइकुकार सफ़ल हुए हैं इसलिए सभी हाइकुकारों को भी मैं बधाई और शुभकामनाएं देती हूँ |

  15. सरस्वती सुमन का हाइकु विशेषांक पढ़ा,मन गदगद हो गया।जिस तरह से अंक सजाया है उसका रूप निखर आया है चित्रों का संयोजन बहुत अच्छा लगा।
    हाइकुओं का संयोजन बहुत सराहनीय है। हाइकु पर लेख तो सभी ने बहुत उच्च कोटि के लिखे हैं।काव्य,शिल्प पूरी तरह निखरकर आया है। काम्बोज जी ने बहुत मन से बहुत मेहनत से इस अंक को सवाँरा है। सभी सम्पादकों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
    डॉ० भावना कुँअर

  16. सरस्वती सुमन हाइकु विशेषांक पढ़ कर मन अत्यंत प्रसन्न हुआ हाइकुओं का संयोजन बहुत सराहनीय है।सभी बधाई के पात्र हैं। बहुत मेहनत से इस अंक को सवाँरा गया है है। सम्पादक मंडल का हार्दिक आभा र !!
    सभी रचनाकारों को बधाई व शुभकामनाएँ !!

  17. सरस्वती सुमन का यह हाइकु विशेषांक अपने आप अद्भुत है. न सिर्फ इसमें हाइकु का संकलन है बल्कि हाइकु शिल्प एवं अनुभूति पर कई सारे लेख हैं, जिनसे हाइकु को समझना और उस पर अपनी राय कायम करना सरल हो जाएगा साथ ही दिशा निर्देश भी मिलेगा. रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी के अथक परिश्रम के फलस्वरूप इस पत्रिका का यह रूप सँवर कर आया है. प्रधान सम्पादक डॉ. आनन्द सुमन सिंह, अतिथि सम्पादक रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी तथा समस्त सहयोगियों को बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार!

  18. अभी हाल ही में मुझे सरस्वती सुमन पत्रिका की एक प्रति कंबोज भैया जी के सौजन्य से प्राप्त हुई …. बहुत आभार भैया ! शब्द नहीं मिल पा रहे हैं तारीफ़ के …अथक लगन व श्रम से निकाली गयी है सरस्वती सुमन पत्रिका में इतने सारे विभिन्न विषयों पर लिखे आलेख देख कर मन ख़ुश हो गया , सच कहुं तो आलेखों के चयन व प्रस्तुति की अनुभूति जन्य शैली ने हाइकु की इस संग्रहणीय पत्रिका में चार चाँद लगा दिये हैं । हाइकु पर मेरे विचार व कुछ आलेखों में मेरे हाइकुओं का उल्लेख देख कर मुझे बहुत ख़ुशी हुई , उसके लिये लेखकों को व इस विशेषांक के अतिथि संपादक स्नेही रामेश्वर कम्बोज हिमांशु जी व प्रधान संपादक डा. आनंद सुमन सिंह जी को भी तहे दिल से धन्यवाद देना चाहूंगी व आभार भी कहना चाहूँगी !
    बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाएँ !


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