Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 2, 2014

मेरी पसन्द


डॉ ०ज्योत्स्ना शर्मा

कोई भी विधा हो समाज के कल्याण से अनुप्राणित साहित्य ही सच्चा साहित्य है । आज जीवन की आपाधापी में जब भोर ही तपते-जलते समाचारों के साथ उतरती हो ; सुन्दर , सरस भावों से परिपूर्ण दो पंक्तियाँ भी मन को अपूर्व आनंद से भर देती हैं । यह भी किसी विशेष योगदान से कम नहीं ।ऐसी ही रचना का निदर्शन है प्रस्तुत हाइकु ..

तितली बन

चला फूलों के गाँव

वो मन चला ।

सरस ,मनोहर भाव ,सुन्दर शब्द संयोजन और सहज अभिव्यक्ति लिए डॉ.भावना कुँअर का यह हाइकु अपनी विशेषताओं से मुझे मुग्ध कर गया ।कवयित्री कोमल भावों और प्रकृति की सुन्दर चितेरी हैं। ऐसे अनेक हाइकु प्रस्तुत किए जा सकते हैं किन्तु यहाँ बस एक ही !

सुन्दरता के प्रति आकर्षण शाश्वत है ।विशेषकर फूल, पंछी ,भ्रमर , तितली और मानव मन सभी को सदा से आकर्षित करते रहे हैं ,करते रहेंगें ।हाइकु में चंचल मन फूलों के गाँव में तितली बन पँहुचने की चाह रखता है ।मन चला शब्द का सुन्दर  प्रयोग कवयित्री के वाक् चातुर्य को प्रकट करता है ।मन का तितली बन जाना यदि उसकी निर्मलता ,कोमलता और मनमोहक बहुरंगी सुन्दरता का द्योतक है ,तो मन चंचल भी है ,फूलों के व्याज से मानव मन की सुखों की शाश्वत खोज भी झलकती है ।

हाइकु की लयात्मकता और दृश्य को साकार करने की सामर्थ्य उसे और भी मोहक ,सुखकर बना देती है ;तप्त रेगिस्तान में निर्मल जल की बूँद !

अस्तु , दिनभर की थकान भरी दिनचर्या के उपरांत यदि ऐसा एक भी हाइकु पढ़ने को मिले तो कहना ही होगा ….!!!

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Responses

  1. बहुत सुन्दर , भावना जी हाइकु और वैसी ही डॉ ज्योत्स्ना जी पेशकश !

  2. bhawna ji ke mantrmugdh karte haiku par jyotsna ji ke sunder tatha saarthak vishleshan ne ..mujhe sach mein taro taza kar diya…..badhai…

  3. वाह! बहुत ही सुन्दर !
    जितना सुन्दर भावना जी का हाइकु उतना ही सुन्दर ज्योत्स्ना जी का विश्लेषण ! दोनों ने मन मोह लिया।
    आप दोनों को हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. वाह बहुत सुन्दर हाइकु ,सुन्दर विश्लेषण के साथ ….आप दोनों को बधाई
    🙂

  5. बहुत सुंदर

  6. यहाँ स्थान देने के लिए सम्पादक द्वय की बहुत आभारी हूँ |
    सुन्दर प्रतिक्रियाओं से उत्साह बढ़ाने के लिए सविता जी ,ज्योत्स्ना जी ,अनिता जी ,गुंजन जी एवं विभा जी के प्रति भी हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ !

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  7. vastav men bhavana ji dvara rachit haiku to bahut sunder hai hi par jyotsana ji dvara ki gayi sanstuti usamen char chand laga rahi hai.bhavana ji va jyotsana ji ap dono ko badhai.
    pushpa mehra.

  8. भावना जी के सुन्दर हाइकु का ज्योत्स्ना जी द्वारा किया गया विश्लेषण अद्भुत है. भावना जी और ज्योत्स्ना जी को बधाई.

  9. मनमोहक हाइकु ख़ूबसूरत विश्लेषण…भावना जी और ज्योत्स्ना जी…बहुत-बहुत बधाई!

  10. bahut sundar samiksha ki hai jyotsana ji padhkar anand aa gaya … hardik badhai aap dono ko
    bhavna ji sundar haiku

  11. bahut sunder vishleshan aur bahut hi suner haiku bhavna ji ka har haiku bahut hi sunder hota hai
    rachana

  12. Bahut sundar se likha hai aapne bahut bahut badhai…aabhar☺️

  13. ज्योत्सना जी और भावना जी आप दोनों को हार्दिक बधाई देते हुए कहना चाहूंगी कि हाइकु तो सुंदर हैं ही साथ ही विश्लेषण बहुत ख़ूबसूरती से किया है |

  14. आ पुष्पा मेहरा जी ,जेन्नी जी ,कृष्णा वर्मा जी ,शशि जी ,रचना जी एवं सविता अग्रवाल जी .आपकी स्नेह भरी प्रतिक्रियाएँ मेरे लेखन की ऊर्जा हैं ! हृदय से आभार !!

    …और बहुत धन्यवाद भावना जी आपके सृजन ने मुझे ऐसा अवसर दिया 🙂

    सादर
    ज्योत्स्ना शर्मा

  15. जब एक सुन्दर, भावपूर्ण हाइकु का ऐसा सूक्ष्म और सार्थक विश्लेषण हो तो सोने पर सुहागा की बात चरितार्थ होती है…| बधाई…|

  16. aabhaar priyankaa ji ,, 🙂


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