Posted by: डॉ. हरदीप संधु | दिसम्बर 1, 2014

मौन के दर्द


1-प्रियंका गुप्ता

1

द्वार खटका

डरते हुए खोला

सूनापन था ।

2

चादर ओढ़े

सोए पड़े थे ख़्वाब

जगाना न था ।

3

सच कहना

तुमने बहलाया

कितनी बार ?

4

तुम्हारा सच

किसी फूल पे टिका

ओस-बिन्दु -सा ।

5

तुम्हारा झूठ

मेरे लिए सच था,

दोनो ही खुश ।

6

आदत तेरी

छलते चले जाना;

नियति मेरी ।

7

जान न पाई

कितना सच्चा-झूठा

प्यार तुम्हारा ।

8

काटने दौड़े

तेरे छल के सर्प

छुपूँ मैं कहाँ ?

9

सुन तो लेते

काग़ज़ पे बिखरे

मौन के दर्द ।

10

मेरी आस्तीन

विषधरों से भरी

जान न पाई ।

11

कब था जाना

तेरा प्यार भी होगा

सिर्फ़ छलावा ।

12

छोटी- सी बात

जाने कब दे जाती

बड़ा- सा दर्द ।

13

दर्द था बाँटा,

तुम्हें लगा- कहानी

मनगढ़न्त ।

-0-

2-शैफाली गुप्ता,कैलिफ़ोर्निया

1

अलसुबह

लिखेंगे नया गान

बदलो भाग्य ।

2

भोर-चुनरी

आसमाँ ने है ओढ़ी

जगी-आशाएँ

3

नया-सा दिन

सूरज ने है न्योता-

कर्मठ बनो ।

4

नयी सुबह

छोड़ो कल की धूल

नई-उमंगें ।

5

जीवनअर्थ 

प्रश्न है उलझासा 

जीना मुश्किल।

6

प्राप्ति की चाह 

भागती मैं हरसूं 

खाली लकीरें।

7

जीवनभर 

अंतहीन इच्छाएँ 

अंत में रोना।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु अपनी छाप छोड़ने में सफल हैं- बहुत ही सुन्दर !

    प्रियंका जी…
    ‘मेरी आस्तीन
    विषधरों से भरी
    जान न पाई ।

    कब था जाना
    तेरा प्यार भी होगा
    सिर्फ़ छलावा ।’
    -जिसे हम अपने बहुत नज़दीक समझते हैं वही अगर दुःख दे तो जीवन की राहें बहुत कठिन हो जाती हैं। इस सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बहुत बधाई आपको।

    शेफ़ाली जी…
    ‘जीवन-भर
    अंतहीन इच्छाएँ
    अंत में रोना।’

    इसके साथ ही.…
    ‘भोर-चुनरी
    आसमाँ ने है ओढ़ी
    जगी-आशाएँ।’
    -बहुत सुन्दर सन्देश। आपको बहुत बधाई।

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. बेहतरीन सृजन, सभी हाइकु बहुत सुन्दर ! दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

  3. priyanka ji va shefali ji ap dono ke haiku bahut achhe likhe hain.badhai.
    pushpa mehra.

  4. चादर ओढ़े
    सोए पड़े थे ख़्वाब
    जगाना न था ।……………बहुत कोमल एहसास !

    सुन तो लेते
    काग़ज़ पे बिखरे
    मौन के दर्द ।…………..बहुत सुन्दर !
    सभी सुन्दर हाइकुओं के लिए प्रियंका गुप्ता को हार्दिक बधाई !!
    *******************************************************************
    नया-सा दिन
    सूरज ने है न्योता-
    कर्मठ बनो ।…………सुन्दर संदेश !!

    जीवन-भर
    अंतहीन इच्छाएँ
    अंत में रोना।…………सच्चाई!!

    शेफाली गुप्ता जी को बहुत बहुत बधाई !!

  5. bahut hi khoobsurat haiku….priyanka ji v shefali ji ko hardik badhai .

  6. tumhara sach…..tatha ….jeevan bhar…..aap dono ne hi man moh liya….bahut sunder prastuti ….badhai.

  7. मन को छू लेने वाले बहुत प्रभावी हाइकु …..चादर ओढ़े , आस्तीन , छोटी सी बात , मौन के दर्द , नया सा दिन और अंतहीन इच्छाएँ बेहतरीन !!!
    प्रियंका जी एवं शैफाली जी को बहुत बधाई ..शुभ कामनाएँ !!

  8. सभी हाइकु बहुत सुंदर !
    भोर-चुनरी

    आसमाँ ने है ओढ़ी

    जगी-आशाएँ….. अच्छा लगा ….बधाई शैफाली !

    छोटी- सी बात

    जाने कब दे जाती

    बड़ा- सा दर्द ।…….दिल छू गया ….शुभ कामनाएँ प्रियंका जी !

  9. आप सभी की उत्साहवर्धक टिप्पणियों के लिए दिल से आभारी हूँ…|
    शेफाली जी, आपके हाइकु बहुत भाए…ख़ास तौर से ये वाला…
    भोर-चुनरी
    आसमाँ ने है ओढ़ी
    जगी-आशाएँ
    हार्दिक बधाई…|

  10. सभी हाइकु अच्छे लगे रचनाकारों को हार्दिक बधाई

    2014-12-01 9:57 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !” :

    > डॉ. हरदीप संधु posted: “हाइकु 1-प्रियंका गुप्ता 1 द्वार खटका डरते हुए
    > खोला सूनापन था । 2 चादर ओढ़े सोए पड़े थे ख़्वाब जगाना न था । 3 सच कहना- तुमने
    > बहलाया कितनी बार ? 4 तुम्हारा सच- किसी फूल पे टिका ओस-बिन्दु -सा । 5
    > तुम्हारा”


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