Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 29, 2014

नींद का पेड़


मेरी पसन्द-डॉ हरदीप सन्धु

        नींद का पेड़

        जागा रहा अकेला

        तमाम रात।

डॉ सुधा गुप्ता जी जैसी वरिष्ठ कवयित्री की कलम सरल बात लिखते हुए भी गहरे भाव छोड़ती है।

सुधा जी के इस हाइकु को दो अलग -अलग दृष्टिकोण से समझा जा सकता है।

पहला – जो अधिक लोगों की समझ में आता है कि यह हाइकु अकेलेपन के प्रतीक के रूप में लिखा गया है। यह भाव हाइकु में लिखी तीनों पंक्तियों की व्याख्या करते हुए मिलता है। नींद का एक पेड़ जो तमाम रात जागता रहा.बेचैन मन की तरह अकेलेपन की तड़प ने उसकी निदिंया उड़ा दी। जब नींद ही जागी रहे, तो उस अकेलेपन की पीड़ा को तो कोई भुक्तभोगी ही समझ सकता है। मगर क्या नींद का जागना ही अकेलापन है ? नहीं ऐसा हमेशा नहीं होता। नींद का जागना अर्थात गहरी नींद न लेना ….ऐसा किसी शारीरिक या मानसिक पीड़ा तथा थकावट के कारण भी हो सकता है। कभी -कभी आप अधिक ख़ुशी के कारण भी अच्छी तरह सो नहीं पाते। ख़ुशी से उछलता मन बेकाबू हुआ गहरी नींद ले नहीं पाता। यह हाइकु पढ़ते हुए आपका मन जिस अवस्था में होगा, आप इस हाइकु को उसी रंग में रँगा देखेंगे।

          दूसरा पहलू – यहाँ आपने नींद को एक पेड़ के रूप में प्रस्तुत किया है। विज्ञान की आँख से देखें तो पेड़ कभी सोते नहीं। वे दिनभर हमारा भोजन तैयार करने में लगे रहते हैं और रात भर जागकर ऊर्जा समेटते हैं ,ताकि आने वाले समय के लिए भोजन बनाने के लिए तैयार हो जाएँ। इस तरह ये पेड़ हमें जिन्दा रहने के लिए साधन प्रदान करते हैं। इस संसार में हमारी ज़िंदगी को और बेहतर बनाने के लिए हर दिन नई खोज हो रही है। मगर आप में से बहुत कम लोग ये जानते होंगे कि इनमें से बहुत- सी खोजें ऐसी हैं ;जो नींद में जागने के कारण हुईं। जब -जब यह नींद का पेड़ तमाम रात अकेला जागता रहा तब -तब …… वैज्ञानिक बोहर को इस संसार की हर वस्तु में पाए जाने वाले परमाणु (ऐटम) की बनावट का पता चला। गणित के बहुत से मुश्किल सवालों का हल महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन को मिला। एलिअस होवे ने सिलाई मशीन बनाई। बहुत से गीतों की धुनें बनी और यहाँ तक कि अब्राहम लिंकन को अपने होने वाले कत्ल के बारे में भी मालूम हो गया था। इस तरह हमारा नींद का पेड़ रात भर अकेले जागते हुए असंभव को संभव कर दिखाता है।

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Responses

  1. बेहद खुबसूरत हाइकु

  2. khubsurti se hindihaiku,,,

  3. आदरणीया सुधा गुप्ता दीदी के बेहद भावपूर्ण हाइकु को बहुत ही सरस एवं सुन्दर रूप में दो अलग दृष्टिकोण से व्याख्यायित कर हरदीप जी ने हमारी सोच को भी विस्तार दिया है | नन्हे कलेवर में विशद अर्थ की अभिव्यक्ति का सुन्दर निदर्शन !!!प्रशंसनीय प्रस्तुति !!!
    बहुत-बहुत बधाई हरदीप जी को और आदरणीया दीदी को सादर नमन !

  4. saahity ke saath vaegyaanik drishtikon se judaa bejod haaiku hae .

    aap donon ko badhaai .

  5. सही लिखा आपने हरदीप जी कि डॉ सुधा गुप्ता जी जैसी वरिष्ठ कवयित्री की कलम सरल बात लिखते हुए भी गहरे भाव छोड़ती है।
    सुंदर प्रस्तुति… बहुत बहुत बधाई!

  6. आदरणीय सुधा जी की कलम की तो बात ही निराली है…| उनको सादर नमन…|
    बहुत अच्छी प्रस्तुति है…हार्दिक बधाई…|

  7. डा० सुधा गुप्ता जी के उत्कृष्ट हाइकु की लाजवाब व्याख्या कर हरदीप जी ने उसे और भी अधिक मन मोहक बना दिया! आप दोनों को बहुत-बहुत बधाई!

  8. sarthak gyanvardhak post , hardik badhai

    2014-11-28 22:13 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  9. मेरी पसंद के अंतर्गत हाइकु-विश्लेषण का यह प्रयोग अत्यंत रोचक लगा। आदरणीया सुधा गुप्ता दीदी जी के इस ख़ूबसूरत भावपूर्ण हाइकु को अपनी नज़र देने का हरदीप जी का यह प्रयास प्रशंसनीय है। अकेलेपन की पीड़ा व गहराई को बहुत ख़ूबसूरती से अभिव्यक्त किया है हरदीप जी ने। लिखने वाले तो अपनी भावनाओं की रौ में आकर किसी रचना को जन्म दे देते हैं , मगर हर पाठक उस रचना को अपने मन के आईने के समक्ष रखकर उसे ग्रहण करता है।
    आ. सुधा दीदी जी को हाइकु हेतु एवं हरदीप जी को सुन्दर विश्लेषण हेतु हार्दिक बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. aadarniya sudha ji ke gahra arth liye haiku par hardeepji dwara sunder vishleshan prashansniya hai ….meri pasand ke antergat ye shubh karya isi tarah khilkhilata rahe…sudhaji ,himanshuji tatha hardeep ji ko sadar naman ke saath bahut -bahut badhai .

  11. हरदीप जी सार्थक और शानदार समीक्षा ..आप दोनों को हार्दिक बधाई ..सादर नमन


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