Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 28, 2014

धूप की तितलियाँ


1-   शशि पाधा

1

झरते पात

बिन स्याही लिखते

गीतोपदेश ।

2

अब ना आतीं

धूप की तितलियाँ

ब्याहीं विदेस ।

3

ताँबे का रंग

घोल रहा मौसम

सोने के संग ।

4

निर्जीव पात

सिर झुका मानते

हवा की बात ।

5

कल थीं हरी

पातहीन डालियाँ

आशाएँ झरी ।

6

पंछी के फेरे

पतझड़ में ढूँढे

नए बसेरे ।

7

कार्तिक मास

धूप बाँधे गठरी

शीत आभास ।

8

ओढ़ी धरा ने

लाल -पीली चुनरी

सूरज लखे ।

-0-

2-एस० डी० तिवारी

1

 होते सवेरा

पक्षी भी उड़ चले

छोड़ बसेरा ।

2

पेट भरती

स्वयं पानी पीकर

घास औरों का

3

बहती जाए

बिना शोर मचाए

गहरी नदी ।

4

लड़ते नहीं

तितली मधुमक्खी

फूल के लिए

5

उठा तूफान

टी वी समाचार का

तीव्र उफान ।

6

प्रातः की बेला

बच्चों की पीठ पर

बस्ते का बोझ ।

-0-

3-सविता अग्रवाल”सवि”

1

खोई है आस

बिछड़ गया गाँव

मन उदास ।

2

चरखी चली

कुएँ की मुँडेर पे

ठिठोली बढ़ी ।

3

भोली जनता

कच्ची पगडंडियाँ

बसाएँ गाँव ।

4

संगीत- भरे

बैलगाड़ी का स्वर

किसान हर्षा ।

5

हल चलाता

धूप में नहाकर

अन्न उगाता   ।

-0-

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Responses

  1. sundar salona, manbhavan prakriti chitran …

  2. सभी हाइकु बहुत सुन्दर !

  3. आप सभी ने खूबसूसरत हाइकु रचे हैं। शशि पाधा जी , एस० डी० तिवारी जी और सविता अग्रवाल ”सवि” जी, आप सभी को हार्दिक बधाई।

  4. sabhi haiku bahut achhe likhe hain sabhi haikukaron ko badhai.
    pushpa mehra.

  5. पुराने ज़माने में जब चरख़ी पर चलने वाली डोर से कुएँ से पानी निकाला जाता था , उस युग का एक सफल विम्ब थोड़े शब्दों में प्रस्तुत करने के लिए सविता जी को बधाई । कनाडा में यह कर भी वे उसे नहीं भूली हैं।

  6. पतझर के सुन्दर रंग बिखेरते हाइकु… शशि पाधा जी के- बहुत सुन्दर।
    पक्षी हो या नदिया या फिर घास या कि तितली, मधुमक्खी तथा बच्चे सभी अपना कर्म कर रहे हैं -सुन्दर चित्रण …एस. डी. तिवारी जी।
    अपना गाँव हर किसी को याद आता है – सुन्दर अभिव्यक्ति …सविता जी।

    ~सादर
    अनिता ललित

  7. khubsurat ..behtreen sabhi haikukaaro ko haardik badhayi ..
    jharte paat ,dhup k titli , aashayen jhari ,ladte nhi ,charkhi chali vishesh rup se pasand aye 🙂

  8. sbhi vishesh , mnohaari sundr haaiku
    aap sbhi ko badhaai

  9. सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं , सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई

    2014-11-27 22:49 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब
    पत्रिका’-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !” :

    > डॉ. हरदीप संधु posted: “1- शशि पाधा 1 झरते पात बिन स्याही लिखते
    > गीतोपदेश । 2 अब ना आतीं धूप की तितलियाँ ब्याहीं विदेस । 3 ताँबे का रंग घोल
    > रहा मौसम सोने के संग । 4 निर्जीव पात सिर झुका मानते हवा की बात । 5 कल थीं
    > हरी पात”

  10. अब ना आतीं
    धूप की तितलियाँ
    ब्याहीं विदेस ।
    क्या बात है…|

    लड़ते नहीं
    तितली मधुमक्खी
    फूल के लिए
    बहुत सुन्दर…|

    चरखी चली
    कुएँ की मुँडेर पे
    ठिठोली बढ़ी ।
    खूबसूरत हाइकु…|

    सभी को हार्दिक बधाई…|


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