Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 15, 2014

थोड़ी -सी धूप


1-सुनीता अग्रवाल

1

खेल खिलौने

मासूम किलकारी

खोये पोथी में।

2

रोती गुड़िया

किताबो में खो ग

नन्ही परियाँ

3

थोड़ी -सी धूप

थोड़ी स्नेह की वर्षा

खिले पुहुप

4

नन्हा परिंदा

हौसलों की उड़ान

नभ सिमटा ।

5

रखना छाँव

सूख न जाएँ पौधे

कड़ी है धूप ।

6

नन्हे पादप

बनेंगे कल वृक्ष

स्नेह से सींच ।

-0-

2-गुंजन अग्रवाल

1

संस्कारी बीज

रोपे कोमल मन

हँसे भविष्य ।

2

अदृश्य स्वप्न

मासूम परवाज़

झुका गगन ।

3

कोमल मन

सिन्धु-सी मोह माया

डूबे– उबरे ।

4

बोला शैशव-

संसारी चकाचौंध

खोजे वैभव ।

5

लेते जनम

नित नए सपने

बालक मन।

6

आज भी जिंदा-

मासूम बचपन

खँगालो मन ।

7

गया निगल

गुंजित बचपन

आज का दौर ।

8

समय– पंख

बचपन के स्वप्न

उड़ा ले भागा ।

-0-

Advertisements

Responses

  1. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक ! सभी हाइकु उम्दा है ! हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

  2. नन्ही परियाँ , खिले पुहुप , मासूम परवाज़ ..बहुत सुन्दर हाइकु हैं ..बाल दिवस पर हार्दिक शुभ कामनाएँ !

    आज भी जिंदा-

    मासूम बचपन

    खँगालो मन । सच्ची बात !

  3. मासूम किलकारियां और कोमल मन को अभिव्यक्ति देने वाली दोनों रचनाकारों के हाइकु बहुत मर्मस्पर्शी हैं. -सुरेन्द्र वर्मा.

  4. थोड़ी -सी धूप, नन्हें पादप…बहुत सुन्दर हाइकु!
    खेल खिलौने
    मासूम किलकारी
    खोये पोथी में।…….आज का सच कहता हाइकु!

    संस्कारी बीज, आज भी जिंदा…दोनों हाइकु बहुत सुन्दर!
    सुनीता जी, गुंजन जी…….बधाई!

  5. सभी हाइकु उम्दा है ! हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !

  6. बाल मन पर केन्द्रित आप दोनों आदरणीय बहिनों के हाइकु बेहद उम्दा लगे.
    आप दोनों को हार्दिक बधाई व नमन.

  7. नन्हे पादप
    बनेंगे कल वृक्ष
    स्नेह से सींच ।
    -0-
    गया निगल
    गुंजित बचपन
    आज का दौर ।
    bahut sabhi soch badhai aapdono ko
    rachana

  8. सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई |इतने सुंदर हाइकु की रचना करने के लिए |

  9. sabhi haiku bahut hi pyare……badhai ke saath….

  10. aap sabi mitro ka haardik aabhar rachna ko pasand karne hetu …sampadakdway ka bhi hardik aabhar unhone yaha meri rachnao ko sthan diya ..
    gunjan ..sabhi haiku umda 🙂
    संस्कारी बीज

    रोपे कोमल मन

    हँसे भविष्य

  11. उत्कृष्ट हाइकू
    बधाई

  12. बाल मन-जीवन का सुन्दर चित्रण।

    ‘रोती गुड़िया
    किताबो में खो गई
    नन्ही परियाँ’- बहुत सुन्दर सुनीता जी !

    ‘समय- पंख
    बचपन के स्वप्न
    उड़ा ले भागा ।’ -बहुत सुन्दर गुंजन जी।

    दोनों को हार्दिक बधाई !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  13. बचपन कोमल होता है, पर कमज़ोर नहीं…| प्रेरणादायक, मर्मस्पर्शी हाइकु के लिए हार्दिक बधाई आप दोनों को…|


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

श्रेणी

%d bloggers like this: