Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 12, 2014

बाँसुरी बजी


1-सुदर्शन रत्नाकर

1

चहचहाते

डालियों पर पंछी

बाँसुरी बजी ।

2

देखो ये पाखी

पंक्तिबद्ध उड़ते

अनुशासित ।

3

पंख फैलाए

उड़े आसमान में

बंधनमुक्त ।

4

उड़ते खग

दूर आसमान में

कान कहाँ ?

5

कितना प्यारा

धीरे धीरे चलता

रात में चंदा ।

6

चूमती रहीं

डालियाँ गगन को

ठिकाना धरा ।

7

धरती ओढ़े

कोहरे की चादर

निद्रा में लीन ।

8

रजनीगंधा

महकी रात भर

धुला अँगना ।

9

चाँदनी रात

खिली मधुमालती

दूध केसर ।

-0-

2-डॉ .आरती स्मित

1

कोमल भोर

चहचहाते खग

प्यारा शरद ।

2

शान्त सुबह ,

यादों की आवाजाही

आतुर मन ।

3

धूप का स्पर्श

थरथराते पेड़

जीवन पाते ।

4

ठंडी सुबह

गुदगुदाती धूप

शीतल मन ।

5

मासूम धूप

अठखेली करती

हर्षित धरा ।

6

तुम्हारी यादें

शरद की बयार

नम हृदय ।

-0-

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Responses

  1. बहुत सुन्दर हाइकु दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई

    2014-11-11 22:44 GMT+05:30 “हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-‘हाइकु कविताओं की वेब

  2. मन – पंछी की उन्मुक्त उड़ान और कोमल भोर …बहुत सुन्दर प्रस्तुति ,दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई !

  3. आपदोनो को ही सुंदर हाइकु रचने पर हार्दिक बधाई |पंछियों की उन्मुक्त उड़ान |अति सुंदर |

  4. bahut hi khoobsurat haiku…..badhai ke saath….

  5. प्रकृति का बड़ा मनभावन चित्रण है इन हाइकु में…दोनों हाइकुकारों को हार्दिक बधाई…|


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