Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 29, 2014

हाइकु-विचार एवं हाइकु


हाइकु-विचार

छोटे भले हों , हाइकु-रचना अपने में एक पूर्ण कविता है । किसी भी हाइकु का सम्बन्ध, उसको समझ पाने के लिए , किसी अन्य हाइकु से नहीं होता । हर हाइकु अपने में स्वतन्त्र होता है। यहमोनेड( चिदणु) की तरह होता है।पूरी तरह गवाक्षहीन । वह दूसरी हाइकु रचनाओं में ताँका-झाँकी नहीं करता । जैसे, उदाहरण के लिए , हिन्दी में दोहा अपने आप में स्वतन्त्र होता है।, उसी तरह हाइकु भी है । दोहा-गीत नहीं लिखे जाते । दोहा एक मुक्तक काव्य है । दोहे का, हर दोहे का , अपना एक स्वतन्त्र वजूद है । हाइकु-रचना भी इसी प्रकार की होती है । हिन्दी में इन दिनों स्वनामधन्य हाइकुकार अनेक हाइकु-रचनाओं से गीतों आदि की रचनाएँ कर रहे हैं । मुझे लगता है कि यह हाइकु की स्वतन्त्र इकाई के प्रति बड़ा अन्याय है।

( धूप कुन्दन हाइकु-संग्रह की भूमिका से :डॉ0 सुरेन्द्र वर्मा)

-0-

हाइकु

1-राम शरण महर्जन्

(कीर्तिपुर्-17, काठमाण्डु, नेपाल)

1

हवा का स्पर्श

खिल्ता रूख के पत्ते

मौन है भंग ।

2

जगाती रही

अँधेरों से आने को

धूप तो देखो ।

3

रंगीन नभ

शान्त स्वच्छ प्रकृ्ति

प्यारा– सा सूर्य ।

4

पवित्र मन

सूर्य की आराधना

आस्था की ज्योति ।

5

सत्य की शक्ति

व्रत छठ माता का

मन उजाला ।

6

यादें  सतातीं

दीपावली की रात

आँखो में बसें ।

7       

चञ्चल मन

त्योहार का दिवस

अपनों के साथ ।

-0-

ई-मेल-rsm_suman@yahoo.com

-0-

 2-गिर्राज प्रसाद गौतम ‘कथित’

1

भाल तिलक

लिये आरती– थाल

अश्रु टपके।

2

द्वार सजाया

परदेसी भइया

वादा निभाया।

3

सालों के बाद

बही अश्रु– सरिता

भावुक मन।

4

इंतजार में

भैया-दूज की बेला

भाई अकेला।

-0-

मेल

mansinghk88@gmail.com

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प्रवीण राज3-प्रवीण राज

1

धधक रहे

पछतावों में गिरी

बर्फ़ है याद ।

2

पतझड़ जैसे

अहंकार में खिला

फूल है याद ।

-0-

(एवरशाइन नगर मालाड (पश्चिम) मुंबई)

ई-मेल-

praveenrajwrites@gmail.com

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Responses

  1. सभी हाइकु गहराई लिए हुए हैं विद्वान .सुरेन्द्र जी के गहन विचार वाकई हाइकु काव्य की विधा को दर्शाते हैं .
    गिर्राज प्रसाद गौतम, डॉ.सुरेन्द्र वर्मा, प्रवीण राज, राम शरण महर्जन् को हार्दिक बधाई .

  2. सभी हाइकु बहुत भावपूर्ण हैं तथा विचारणीय है हाइकु-विचार …सादर नमन !
    छठ पर्व की हार्दिक शुभ कामनाएँ !

  3. आदरणीय सुरेन्द्र जी के हाइकु विचार, हाइकु विधा को पूर्णतया परिभाषित करते हैं | हम इस मंच पर इस विधा की हर प्रस्तुति में सदैव नया ही सीखते हैं | गागर में सागर हैं हाइकु और इन्हें लिखने मैं आनन्द की अनुभूति होती है |

    सभी हाइकु भावपूर्ण | बधाई |

    शशि पाधा

  4. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण हाइकु…सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई…|

  5. सुंदर हाइकु सृजन के लिए राम शरण महर्जन् जी, गिर्राज प्रसाद गौतम ‘कथित’ और प्रवीण राज जी को बधाई !

  6. sabhi haiku bahut sunder…bhaavpurn….aap sabhi ko badhai.


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