Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 21, 2014

राही अकेला !


1 -डॉ सुधा गुप्ता

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नींद का पेड़

जागा रहा अकेला

तमाम रात ।

2

गहरा राज़ :

आकाश अकेला है

तारों के साथ ।

3

सीढ़ियाँ रौंद

बढ़ जाते पथिक

अकेली छोड़ ।

4

उड़े जो पंछी

सूनी आँखों- तकती

अकेली शाख़ ।

5

भागती रेल

साथ चलते तारे

राही अकेला !

6

जहाँ की तहाँ

रह जाती सड़क

गुज़रे राही ।

7

सोया संसार

निर्जन एकान्त में

जागती रात ।

8

बुझाके दीये

अकेली फिरे रात

सूझे न राह !

9

एक अकेला

रंगों की दुनिया में

डूबा चितेरा ।

 10

भरी दुनिया

अकेली ही चिड़िया

खुश हो गाती ।

-0-

2-डॉ जेन्नी शबनम

1

कोई तो होता

बेग़रज अपना

मानो सपना !

sanjh ka akash2

उदास स्वप्न

आसमाँ पे ठहरा

दर्द गहरा !

3

अकेलापन

खोया है भोलापन

कलेजा ज़ख़्मी !

4

बेग़रज हो

कोई अपना तो हो

कहीं भी तो हो !

5

तन्हा जीवन

भीड़ में गुम, जीता

अकेलापन !

6

हम भी तन्हा

चाँद सूरज तन्हा

गले लग जा !

7

खुद से नाता  

खुद से ही की बातें

अकेला मन !

8

मन ने रचा

मन का ताना- बाना

मन ही जाना !

 

9

कैक्टस उगा

अकेलापन चुभा

कोई न जाना !

10

बहता रहा

दुःख का समंदर

जी के अन्दर !

11

हम अकेले

साथ सपने मेरे,

काहे का डर !

-0-

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Responses

  1. उड़े जो पंछी
    सूनी आँखों- तकती
    अकेली शाख़ । आदरणीय सुधा जी के सभी हाइकु एकाकीपन को मुखरित करते हुए मौन में बोल उठे | मुझे यह विशेष लगा | बधाई एवं दीपावली की शुभकामनाएं |

  2. बधाई जेन्नी जी, हर हाइकु का केन्द्रीय भाव अकेलापन होते हुए भी कल्पना की विविधता ने मुग्ध कर दिया | दीपावली की शुभकामनाएँ

    शशि पाधा

  3. कैक्टस उगा
    अकेलापन चुभा
    कोई न जाना !
    भरी दुनिया
    अकेली ही चिड़िया
    खुश हो गाती ।
    akelepan pr bhavon ka sagar ye ek gift hai sabhi padhne walon ke liye
    dhnyavad
    rachana

  4. अकेलेपन को दर्शाते सुन्दर भाव लिए हाइकु …

    अकेलापन दूर करने वाली शय ख़ुद कितनी अकेली है ….

    सोया संसार
    निर्जन एकान्त में
    जागती रात ।

    कैक्टस उगा
    अकेलापन चुभा
    कोई न जाना !

    भावपूर्ण अभिव्यक्ति !

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. उड़े जो पंछी
    सूनी आँखों- तकती
    अकेली शाख़ ।

    लाजवाब सुधा दी ! क्या बिंब हैं, क्या वेदना है !

    बहता रहा
    दुःख का समंदर
    जी के अन्दर !

    ह्रदयस्पर्शी हाइकु के लिए डॉ० जेन्नी शबनम को बधाई !

  6. नींद का पेड़
    जागा रहा अकेला
    तमाम रात ।
    जब नींद ही जागी रहे, तो उस अकेलेपन की पीड़ा तो कोई भुक्तभोगी ही समझ सकता है…| लाजवाब हाइकु…|

    हम भी तन्हा
    चाँद सूरज तन्हा
    गले लग जा !
    क्या कहना…| बहुत सुन्दर हाइकु…|

    आप दोनों को हार्दिक बधाई…|


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