Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 18, 2014

नीरव रात


1-कृष्णा वर्मा

1

नीरव रात

अपना ख़ालीपन

बाँटे स्वयं से ।

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2

तेरे बग़ैर

जोगिनी -सा जीवन

डूबती साँसें ।

3

निगोड़ा धन

मिटा आत्मीयता ,दे

अकेलापन ।

4

उड़ी संतान

युग की हवा -संग

सौंप एकांत ।

5

दे गए शून्य

भूख चबा, बढ़ाया

जिनका ख़ून ।

-0-

2-जय भगवान गुप्त राकेश, फरीदाबाद

 1

EKANT0GOOGLEमन की बात

हर किसी के साथ

कही न जाए ।

2

गाँव में पली

शहर में न खिली

मन की कली

3

लगती भली

शहर में बदली,

गाँव की गली

4

गाँव-शहर

साथ आठों पहर

नदी -लहर ।

-0-

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Responses

  1. कृष्णा जी और जय भगवान् जी आपके हाइकु बहुत सुंदर लगे | हार्दिक बधाई |

  2. बहुत सुन्दर और मन को छूने वाले हाइकु हैं…| आप दोनों को बधाई…|

  3. krishna ji tatha rakesh ji …..aap dono ne hi khoobsurat haiku likhe hai….badhai ke saath…

  4. तेरे बग़ैर
    जोगिनी -सा जीवन
    डूबती साँसें ।
    इसमें आज का सच उजागर कर दिया बधाई कृष्ण वर्मा जी
    मन की बात
    हर किसी के साथ
    कही न जाए ।
    सुंदर हाइकु , राकेश जी बधाई


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