Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 16, 2014

साँझ के साए


1-सुभाष लखेड़ा

16-1 thunth1

तमाम दिन

कोई तो बात करे

तरसे मन।

2

कौन अपना

अपने गए दूर

टूटा सपना।

3

व्यस्त हैं सभी

मुँह मोड़ लेते हैं

मिलें जो कभी ।

4

नए हालात

करते दिन रात

खुद से बात।

5

अकेलापन

वृद्ध जनों से पूछो

क्या कहे मन।

-0-

2-अनिता ललित

1

माँ सिसकती

आँगन हुड़कता,

हो बेटी विदा।

2

साँझ के साए

उदासियों में डूबे

दिल में ढले।

3

मन की बात

मन से ही कह दी

कोई न पास।

4

नीड़ उदास

उड़ गए हैं पंछी

बिखरी आस।

5

ढलती उम्र

शरीर साथ छोड़े,

अपने तोड़ें।

-0-

3-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

एकाकी मन

ढूँढ लाया यादों के

साथी हज़ार ।

2

निविड तम

कोई न संग– साथ

रात उदास ।

3

अकेले कहाँ?

यादों के थे चिराग़

जलते रहे ।

4

मुँदी पलकें

मिलन या जुदाई

कह न पाई ।

-0-

4-डॉ अनिता कपूर

1

अकेलापन

जैसे सूनी चौपालें

सुबह-साँझ ।

2

शोर गुल में

खुली हवा का झौंका

अकेले होना ।

3

झुलसे दिल

अकेली छाँव में भी

रेत गर्म है।

4

बिछड़े साथी

अकेला बनवासी

तारे निहारे।

5

रात की झोली

भरे तारों की माला

अकेलापन .

-0-

5-प्रियंका गुप्ता

1

कोई न मीत

इतने तारों संग

चाँद अकेला ।

2

बूढ़े माँ-बाप

कभी मिटा के देखो

थोड़ी तन्हाई ।

3

होंठो की हँसी

कब तक छुपाए

नीरव मन ।

4

कब था सोचा

तेरा साथ भी देगा

निर्जन वन ।

5

अकेलापन

अक्सर ढूँढ लाता

कोई चुभन

-0-

6-रेनु चंद्रा

1

खाली दीवारें

कोई ना आता यहाँ

सूना है मन।

2

पुरवा चली

याद आ गई फिर

वो सूनी गली।

-0-

7-सीमा स्मृति

1

अपनापन

खोजता मन मिला

अकेलापन।

2

दुनिया मेला

हर दिल अकेला

अजब रेला।

3

मेरी तन्‍हाई

चलती पुरवाई

थी अकुलाई।

4

मान जा मन

सिमटेगा ये,घना

अकेलापन।

-0-

8-शान्ति पुरोहित

1

छुपा है चाँद

हुआ अकेलापन

चाँदनी रोती ।

2

गिरती बूँदे

मेघ अकेला गुम

नीलांचल में ।

3

खिलता पुष्प

अली अकेलापन

दूर करते

4

तुम मिले हो

दूर अकेलापन

साँसो का हुआ

-0-

9-मजु गुप्ता

1

आँसू- घूट पी

घुटे अकेलापन

छिपा के गम ।

2

नेह का हाथ

तन्हाई के जख्म को  

देता है पाट ।

3

जीवन बेल

तन्हाई की काई में

मुरझा जाती ।

4

अकेलापन

दुःखों की सुनामी   में

डूबती नाव ।

-0-

10-डॉ सरस्वती माथुर

1

गिरते पत्ते

हवा– संग घूमते

तरु अकेला ।

2

उदास मन

अकेलापन ओढ़े

डूबता गया ।

3

सूने दालान

घेरता अकेलापन

डूबता मन ।

4

शाम का तारा

अकेलापन हमें

लगता प्यारा ।

5

आज का दौर

मेरा अकेलापन

मिट्टी– सा मन ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकु रचनाकारों के अकेलेपन पर लिखे हाइकु मन मोहक लगे |आप सभी को हार्दिक बधाई |

  2. सभी हाइकु मनभावन, मिटाते अकेलापन कहीं न कहीं। सभी हाइकुकारों को अनेकानेक शुभकामनाएं ! मुझे तो आप सभी से इतना ही कहना है :
    ” अकेले नहीं
    हाइकु मिला देते
    सबसे यहीं। “

  3. नए हालात…सुभाष जी, ढलती उम्र…अनीता ललित, मुँदीं पलकें…ज्योत्स्ना जी,
    झुलसे दिल….अनीता कपूर जी, अकेलापन…प्रियंका गुप्ता,खाली दीवारें खाली…रेनू चँद्रा,
    अपनापन…सीमा स्मृति, गिरतीं बूँदें…शांति पुरोहित, आँसू घूट-पी…मंजु गुप्ता,
    आज का दौर…सरस्वती जी——- बहुत सुन्दर हाइकु आप सभी को बधाई!

  4. सबको हार्दिक बधाई…इतने सुन्दर हाइकु के बीच में खुद का स्थान भी देख कर बहुत खुशी होती है…| आभार…आदरणीय कम्बोज जी और हरदीप जी का…|

  5. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक है ….आप सभी बधाई के पात्र हैं।

  6. नए हालात-
    करते दिन रात
    खुद से बात। वाह बहुत सुन्दर
    अकेलापन
    अक्सर ढूँढ लाता
    कोई चुभन । सभी हाइकुकारों के हाइकु बहुत अच्छे लगे यह कुछ बेहद खास लगे सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई सुन्दर है अकेलापन भी 🙂 जिसे आप सभी ने अकेला नहीं रहने दिया

  7. सांय सांय करती/ बैरी पवन / भांय भांय आँगन / खो गए स्वर , तनहा नभ / निहारे धरा, जैसी अभिव्यक्तियाँ मन को छू गईं. अकेलेपन पर इतना कुछ और इतना सुन्दर -एक साथ. सभी को बधाई. -सुरेन्द्र वर्मा

  8. बहुत सुन्दर ! सभी हाइकु अकेलेपन के विवध रूप लिए हुए हैं जो दिल को छूते हैं।

    ज्योत्स्ना शर्मा जी …
    ‘मुँदी पलकें
    मिलन या जुदाई
    कह न पाई ।’ – इसने तो कुछ सोचने को मजबूर कर दिया।

    प्रियंका गुप्ता जी …
    ‘बूढ़े माँ-बाप
    कभी मिटा के देखो
    थोड़ी तन्हाई ।’ – यह स्थिति बहुत निराश करती है। पता नहीं! कब सुधरेगी। सुधरेगी भी या नहीं …

    सभी हाइकुकारों को इस सुन्दर सृजन के लिए ह्रदय से बधाई !
    हमारे हाइकु को भी यहाँ स्थान मिला, इसके लिए ह्रदय से आभार… हिमांशु भैया जी एवं हरदीप जी का !

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. सभी हाइकु रचनाकारों की मार्मिक भावाभिव्यक्ति मन को भायी. आप सभी को हार्दिक बधाई.

  10. Reblogged this on oshriradhekrishnabole and commented:
    शब्दो के संयोजन गुथ दी एक माला ,

  11. कृष्णा जी सभी के हाइकु की सुंदर समीक्षा कर बहुमूल्य समय दिया आभार .
    भाई हिमांशु जी , बहन हरदीप के संपादन में नऐ भावयुक्त शब्दों को ले हमें इन रचनाओं में स्थान मिलता है हार्दिक आभार .
    सभी की रचनाएँ मुझे प्रेरणात्मक लगती हैं , अद्वितीय हैं आभार .

  12. सभी हाइकु बहुत मनभावन सुन्दर……बधाई आप सभी को !!

  13. bahut hi khoobsurat haiku….aap sabhi ko hardik badhai hai .

  14. आहा …अनमोल तन्हाई …अकेलेपन को भी बेहद मोहक बना दिया …हार्दिक बधाई सभी हाइकुकारों को !सुखद है आपके साथ अपनी उपस्थिति भी !
    ..और ..आभार प्रेरक प्रतिक्रियाओं के लिए !
    अनिता ललित जी ..सखि ..अधिक न सोचिए … 🙂


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