Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 16, 2014

एकाकी मन


1-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

16 thunth

छाया-रामेश्वर काम्बोज

1

उड़े पखेरू

सूख गईं डालियाँ

छाया लापता।

2

सन्नाटा जागे

भाँय भाँय आँगन

खो गए स्वर ।

3

फैला हुआ

बन अकेलापन

भीड़ का वन

4

बेचैन मन

शिला -सा भारी हुआ

अकेलापन।

5

मजमें लगे

हमदर्दी जताते

गुम हो जाते ।

-0-

2- डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1

अकेला पेड़

घर की दीवार से

सटा है पेड़

2

नन्हा सा सोता

बीहड़ जंगल में

एकल रोता

3

तारों का मेला

रात है जगमग

चाँद अकेला

4

नार अकेली

छेड़ती बार बार

हवा सहेली

5

डगर सूनी

जी बहलाने आयी

हवा बातूनी

-0-

3-कमला निखुर्पा

1

एकाकी मन
बुनता ही रहता
मीठे सपन ।

2

किससे कहें ?

कसक मनवा की 
दूर अपने ।
3

कहाँ जा छुपी ?

अभी-अभी थी यहाँ
पगली हँसी ।

4

रोके ना रुकी 
बरसी, बह चली 
सावनी- झड़ी ।

-0-

4-डॉ सुरेन्द्र वर्मा

1

विचार ग्रस्त

किंकर्तव्यविमूढ़

अकेलापन ।

2

दिन सूना- सा

पत्र न अख़बार

अकेलापन ।

3

चलता रहा

साँझ पतझर की

मार्ग अकेला ।

4

नंगी शाखाएँ

झरे वृक्ष के पात

हुईं अकेली ।

-0-

5-ज्योत्स्ना प्रदीप

1.

तन्हा बादल

आँसुओ से भरा था

फट ही पड़ा।

2

रिश्तों से घिरा

फिर भी तन्हा नभ

निहारे धरा।

3

तन्हा न कोई

नभ जिसकी लोई

सबका रब।

-0-

6-सविता अग्रवाल सवि

1

झूले भी भूले

नयन पथराए

कैसी अकेली

2

खाली घट- सी

शय्या किनारे रखी

मन अकेला ।

3

अरुण ढला

अन्धेरा सीढ़ी चढ़ा

एकाकीपन ।

-0-

7-सुदर्शन रत्नाकर

1

तुम्हारे बिन

सालता रहता

अकेलापन ।

2

कुछ न कहो

सह कर तो देखो

ये सूनापन ।

3

कैसी नियति

अपनों की भीड़ भी

लगे निर्जन ।

4

ढूँढ़ी ख़ुशियाँ

मिला अकेलापन

फैली दूरियाँ ।

5

अपनापन

ढूँढा बहुत, मिला

अकेलापन ।

-0-

8-छत्रपाल वर्मा

1

अकेलापन

साँय-साँय करती

बैरी पवन।

2

अकेलापन

दूर तक पसरा

भीगा सावन।

-0-

9-शशि पुरवार

1

अकेलापन

तपता रेगिस्तान

व्याकुल मन ।

2

सघन वन

व्योम तले अँधेरा

क्षीण किरण

-0-

10-गुंजन अग्रवाल

1

अकेलापन

भूली मधु सुधियॉ

देती सुकून

2

अकेलापन

नव ऊर्जा चेतना

ईश मनन 

3

तन्हाइयॉ

भुला मजबूरियॉ

गलबहियॉ

4

रही खोजती

तुम मे अपने को

मिली कहीं

5

अर्थविही्न

मौन प्रतीक्षारत

अन्तस् में पला

 

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Responses

  1. सभी हाइकु मनभावन, मिटाते अकेलापन कहीं न कहीं। सभी हाइकुकारों को अनेकानेक शुभकामनाएं ! मुझे तो आप सभी से इतना ही कहना है :
    ” अकेले नहीं
    हाइकु मिला देते
    सबसे यहीं। “

  2. आप सभी के हाइकु बहुत सुन्दर……बधाई!
    बेचैन मन…मजमे लगें….नन्हा सा सोता…
    विचार ग्रस्त…खाली घट-सी….कैसी नियति…
    रही खोजती….अधिक मनोहारी हाइकु लगे!

  3. Akelan par abhivyakt kiye anek haiku ek. Se bad har ek hai..soch shabd ka anokha sangam. Sabhi rachnakar on ko meri badhai

  4. कितने सुन्दर हाइकु…जैसे सुन्दर और बेशकीमती मोतियों की माला पिरो दी गई हो…| हार्दिक बधाई…|

  5. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक है ….आप सभी बधाई के पात्र हैं।

  6. बेचैन मन
    शिला -सा भारी हुआ
    अकेलापन।

    5
    मजमें लगे
    हमदर्दी जताते
    गुम हो जाते ।

    डगर सूनी
    जी बहलाने आयी
    हवा बातूनी सभी
    सभी हाइकुकारों के हाइकु बहुत अच्छे लगे यह कुछ बेहद खास लगे , अकेलेपन की लम्बी डगर पर फूल से झरे हाइकु सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई

  7. सभी हाइकु रचनाकारों को हार्दिक बधाई | हाइकु के माध्यम से अकेलेपन को दूर किया है आप सभी ने |एक सांत्वना मिली कि इस जहां में अकेले केवल हम ही नहीं |

  8. अतिसुन्दर ! अकेलापन जितना भयावह होता है उतना ही उसमें रस भी होता है … कितने भावभरे, मनमोहक हाइकु का सृजन हुआ है। सभी एक से बढ़कर एक हैं !
    इस ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति के लिए आप सभी को ह्रदय से बधाई !

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. सभी हाइकु रचनाकारों की रचनाएँ बहुत ही मार्मिक एवं मन को छूने वाली हैं . आप सभी को हार्दिक बधाई.

  10. मन भावन , उत्कृष्ट हाइकु .

    सभी को बधाई

  11. सभी हाइकु बहुत मनभावन सुन्दर……बधाई आपसभी को !!

  12. himanshu ji tatha hardeep ji ka abhaar mujhe bhi yahan sthaan dene ke liye……aap sabhi ko sunder srajan ke liye bahut – bahut badhai .

  13. एकाकी मन पर आप ने इतने कवियों के हाइकु जुटा लिये , यह स्वागतयोग्य है । एक विषय पर हाइकु लिखना एक तरह का बौद्धिक व्यायाम है , पर उस में भी कवि निपुण निकले ।


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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