Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 24, 2014

आँखों में पीड़ा


कविता भट्ट1-डॉ. कविता भट्ट

1

मकाँ को घर

बनाना चाहते थे

दीवारें ढही ।

2

आँखों में पीड़ा

उनकी ही मिली ना

ताउम्र खपी

3

मिटते गए

रोटी खोजते रहे

उनको खोया   ।

4

लाली का डेरा

आँखों की सफेदी को

दु:खो ने घेरा॥

5

खोजते रहे

बोल मरहम के

मरते गए ।

6

उसने खींचा

प्रेम-हस्त अपना

जिसको सींचा ।

7

महका किए

किताबों के पन्नों में

रखे गुलाब ।

8

प्रेमी मनाया

उसने सदा इसे

बेबसी कहा॥

 9

खोजा उनके  

नयनों में स्वयं को

खुद ही डूबे ।

10

उमड़े रेले

उनकी सुधियों के

छलिया हैं जो

-0-

2- रेखा रोहतगी

1

हृदय-कूप

भाव ज्यों दादुर की

उछल-कूद ।

2

संकट घोर

घिर आएँ तो तकूँ

मैं तेरी ओर ।

3

किया संतोष

मिला मुझे सुख का

अमूल्य कोष ।

4

रहा अँधेर

फिरा न जब तक

मन का फेर

5

चिंतन-मग्न

होके रहना चाहा

हूँ चिन्ता-भग्न

-0-

 

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Responses

  1. Dil ko chhoone wale haiku hai Srimati dr. Kavitaji. Aankhe chhalak gayi. Aapko pranam!

  2. कविता जी आपकी अच्छी रचना है साथ ही रेखा रस्तोगी जी की रचना भी अच्छी लगी। दोनों ही रचनाये मानवीय संवेदना की बहुत सुन्दर अभिव्यक्तियाँ है। KEEP WRITING

  3. bahut bhaavpuurn haiku hain sabhi …’मकाँ को घर ‘ , महका किए ‘ तथा ‘किया संतोष ‘ बहुत अच्छे लगे …दोनों हाइकुकारों को बहुत बधाई !

  4. “खोजते रहे”, “उसने खींचा” तथा “रहा अँधेर” बहुत सुन्दर हाइकु आप दोनों को बहुत बधाई !

  5. सभी हाइकु सुन्दर और भाव पूर्ण ……बहुत बहुत बधाई

  6. उमड़े रेले
    उनकी सुधियों के
    छलिया हैं जो

    चिंतन-मग्न
    होके रहना चाहा
    हूँ चिन्ता-भग्न
    bahut kamal bhav badhai
    rachana

  7. रहा अँधेर
    फिरा न जब तक
    मन का फेर।

    रेखा रोहतगी जी को सुंदर सृजन के लिए बधाई !

    खोजते रहे
    बोल मरहम के
    मरते गए ।

    मार्मिक, सुंदर । बधाई डॉ. कविता भट्ट !

  8. लाली का डेरा
    आँखों की सफेदी को
    दु:खो ने घेरा॥
    बहुत सुन्दर…बधाई…|

    रहा अँधेर
    फिरा न जब तक
    मन का फेर
    बहुत सच्ची बात कही है…बधाई…|

  9. dhanyavad aap sabhi snehijano ka
    Dr. Kavita Bhatt

  10. Reblogged this on Renu Chandra.

  11. सुंदर हाइकु रचने के लिए हार्दिक बधाई|

  12. सभी हाइकु बहुत सुन्दर।

    ‘उसने खींचा
    प्रेम-हस्त अपना
    जिसको सींचा ।’

    ‘किया संतोष
    मिला मुझे सुख का
    अमूल्य कोष ।

    रहा अँधेर
    फिरा न जब तक
    मन का फेर।’

    डॉ कविता भट्ट जी, रेखा रोहतगी जी सुन्दर सृजन के लिए ह्रदय से बधाई।
    हाइकु परिवार में आपका स्वागत है कविता जी।

    ~सादर
    अनिता ललित

  13. aap dono ke haiku bahut khoobsurat hai……..badhai.

  14. Bhavpurn sundar haiku ke liye navaagata kavita jee ka abhinandan evam hardik badhaee .
    utsaah vardhan hetu aap sabhi prerak vibhootiyon ko sadar naman.

  15. Sundar bhavon ko abhivyakt karne ke liye badhaai.


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