Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 15, 2014

हिन्दी के द्वार


1-डा गोपाल बाबू शर्मा

1

धन्य मैकाले

हिन्दी के द्वार लगे

आज भी ताले ।

-0-

2-शशि पुरवार

1

हिन्द की रोली

भारत की आवाज

हिन्दी है बोली ।

2

भाषा है न्यारी

सर्व गुणो की खान

हिन्दी है प्यारी

3

कवि को भाये

कविता के सोपान

हिन्दी बढ़ाये  

4

सर्व भाषाएँ

हिन्दी में समाहित

जन आशाएँ

5

चन्दन रोली

आँगन की तुलसी

हिन्दी रंगोली

6

जोश उमंग

जन– जन में बसी

राष्ट्र तरंग

7

ये अभिलाषा

राष्ट्र की पहचान

विश्व की आशा ।

 -0-

 3-गुंजन अग्रवाल

 1

बोली सरस

प्रतिदिन मनाओ

हिन्दी दिवस

2

हिन्दी का सूर्य

छूता क्षितिज कोर

नित प्रसार

 3

देश की आशा

छूती हर दिल को

वो हिन्दी भाषा ।

-0-

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Responses

  1. हाइकू में समकालीन स्थिती का चित्रण बहुत सटीक है|अर्पिताजी को सुंदर हाइकु के लिए बधाई मनीषा

  2. धन्य मैकाले
    हिन्दी के द्वार लगे
    आज भी ताले ।
    बहुत सटीक…बधाई…|

    बाकी सभी हाइकु भी बहुत अच्छे लगे…सभी को बधाई…|


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