Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 15, 2014

कंक्रीट के जंगल


डॉ अर्पिता अग्रवाल

1

बढ़ी आबादी

तो घटी हरियाली

खेत गायब।

2

धरा बेहाल

अन्नदाता निढाल

पानी पाताल।

3

पूनो का चाँद

उजाले में लिपटी

धरा कि काया।

4

खेतों में उगे

कंक्रीट के जंगल

महँगी थाली।

5

काली रज़ाई

अमावस की ओढ़

चाँद जा सोया।

6

धूप, चाँदनी

ज्यों अर्धनारीश्वर

रहते साथ।

7

हा! क्रौंचवध

वाल्मीकि का विलाप

श्री रामायण !

8

जल प्रपात

नर्मदा का रचता

नर्मदेश्वर।

9

परिंदे गाते

प्रकृति की महिमा

सुर – ताल से।

10

नदी करती

समुद्र की तलाश

मिलन -आस।

11

तीखी धूप को

चाँदनी बना देता

योगी चंद्रमा।

-0-

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Responses

  1. सटीक सार्थक हाइकु

  2. sundar prastuti…

  3. बहिन डॉ.अर्पिता जी,
    सभी हाइकु बेहद उम्दा हैं.
    आपको बधाई.

  4. bahut badhiya
    Dr.Kavita Bhatt

  5. बहुत सुन्‍दर हाइकु

  6. सुश्री अग्रवाल के हाइकु प्रकृति के सौन्दर्य से साक्षात्कार तो कराते ही हैं समय की पहचान भी कराते हैं. सुरेन्द्र वर्मा.

  7. काली रज़ाई
    अमावस की ओढ़
    चाँद जा सोया।
    बहुत सुन्दर…| सभी हाइकु बहुत भाए…बधाई…|

  8. sunder v saarthak haiku….arpita ji ko badhai.


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