Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 26, 2014

पुस्तक-समीक्षा


     उर्मिला कौल का प्रथम हाइकु संग्रह’ अनुभूति’

     डॉ.सुरेन्द्र वर्मा

श्रीमती उर्मिला कौल एक अरसे से हाइकु लिख रहीं हैं. हिन्दी में हाइकु ५-७-५ अक्षरों की एक त्रिपदी है जिसमें कवि अपनी अनुभूतियों को भाषिक अभिव्यक्ति देता है. जापानी हाइकुओं में दार्शनिक अथवा प्रकृति संबंधी अभिव्यक्तियाँ हुई हैं, लेकिन हिन्दी में हाइकु ने अपने को किसी विषयगत सीमा से नहीं बांधा है. हिन्दी कवियों का परिवेश भिन्न होने से उनके हाइकु विषय भी उसी के अनुरूप हैं. श्रीमती कौल ने किसी एक विचार या विषय को ही हाइकु की सामग्री नहीं बनाया है. वे सामाजिक दशाओं पर टिप्पणियाँ भी करती हैं, अपसंस्कृति पर चोट भी करती हैं और साथ ही साथ प्रकृति और दर्शन से भी परहेज़ नहीं करतीं. इसका मुख्य कारण यह है कि वे अपने परिवेश से कटकर एक वायवी संसार में नहीं जीतीं.

   पहाड़ों पर कटते वृक्षों से दु:खी वह सहज नारी बिम्ब को उठाते हुए लिखती हैं –                        

उकडूँ बैठी

शर्मसार पहाडी

ढूँढ़ती  साड़ी                                

  इसी तरह टीवी पर दिखाए जाने वाले झूठे आडम्बरों पर उनकी बेबाक टिप्पणी देखिए  –

  लहराती है

 फसलें टीवी पर

 मन बंजर                                                            

श्रीमती कौल ने बालपन से लेकर मनुष्य की वृद्धावस्था तक उसे बहुत करीब से देखा है. इसीलिए तो दूज का चाँद उन्हें शिशु के मुखपर पहला दाँत-सा चमकता सा लगता है-

 दूज का चाँद

 चिपका शिशु मुख

पहला  दाँत                                                         

इसी तरह उम्र किसी बुज़ुर्ग के चहरे पर आड़ी-तिरछी रेखाएँ खींचती नज़र आती है

उम्र की कथा

 आड़ी तिरछी रेखा

खींचे मुख पर                                                        

देखते- देखते उम्र तमाम होने लगती है और व्यक्ति को पता ही नहीं लगता. वे कहती हैं –                             

 देखती रही

मैं नदी का बहाव 

उम्र बही रे                                                        

ऐसे में अपनों से अलग, अकेला व्यक्ति सिर्फ यादों के सहारे जीता है. –                                         

ठिठुरा तन 

यादों की काँगड़ी से 

सेंकता मन                                                     

लेकिन यह सब भी अंतत: जीवन की निरर्थकता की भावना को पुष्ट करता है.-                             

 यादों के मोती 

चली पिरोती सुई 

हार किसे दूँ                                                       

मानव जीवन की इस निरर्थकता को श्रीमती कॉल ने स्वयं अपने पर आरोपित कर इसे एक सुन्दर अभिव्यक्ति इस हाइकु में प्रदान की है – 

रेज़गार में

टुप से गिरा आँसू

 आह, वो मैं थी

    यों तो श्रीमती कॉल ने अपने हाइकु में अनेक विषयों को उठाया है ;किन्तु उनका मुख्य स्वर अकेलापन तथा स्मृतियों और जीवन की नश्वरता है; जो हमें जापानी हाइकु में भी परिलक्षित होती है।

  (1995,अयन प्रकाशन, दिल्ली)

-0-

सुरेन्द्र वर्मा, मो ०96212-22778

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Responses

  1. सचमुच सभी हाइकु दिल को छू गए ! यक़ीनन ‘अनुभूति’ संकलन में बेजोड़ हाइकु होंगे।
    आदरणीया उर्मिला जी की लेखनी को मेरा सादर नमन!
    आदरणीय डॉ सुरेन्द्र वर्मा सर जी ने बहुत ही बढ़िया समीक्षा की है।
    आपका हार्दिक आभार !!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  2. बेमिसाल हाइकु के उम्दा समीक्षा
    हमे गर्व है कि पढ़ पाये

  3. जीवन में शिशु अवस्था से वृद्धावस्था तक हाइकू को एक माला में पिरोने के लिए समीक्षाकार को बहुत-बहुत बधाई|माला का हर हाइकू रूपी सच्चा मोती अपने में लाजवाब है|दोनों को मेरा नमन|

  4. सारे उत्कृष्ट हाइकु मन की तहें को खोलते हुए कालजयी, अद्वितीय हैं .

    मा. सुरेन्द्र वर्माजी की समीक्षा यथार्थ के धरातल पर जीवन की गहराई का आईना है .
    आभार .

  5. haiku aur samiixa dono hi utkrisht koti ke hain
    pushpa mehra.

  6. सभी हाइकु उत्कृष्ट; दिल को छू गए ! यक़ीनन संकलन में सभी हाइकु बेजोड़ होंगे।
    आदरणीया उर्मिला जी की लेखनी को नमन !
    आदरणीय डॉ सुरेन्द्र वर्मा जी ने बहुत ही बढ़िया समीक्षा की है।

  7. एकाकीपन,यादें और सहारे ढूँढती लेखनी के साथ शब्दचित्र बनाए हैं उर्मिला जी ने , जिन्हें बहुत ही सूक्ष्म दृष्टि से देखते हुए समीक्षा की गई है | आभारी है हम आपके कि उनकी इस कृति से परिचित करवाया | श्री मति उर्मिला कौल जी को श्रद्धांजलि |

    शशि पाधा

  8. sunder haiku hain bhavon se bbhare aur uspr smiksha lajavab
    badhai aur abhar
    rachana

  9. डाक्टर वर्मा जी द्वारा लिखित समीक्षा में माननीया उर्मिला जी कौल के हाइकु पढ़ने को मिले , सभी हाइकु उम्दा एवं जीवन के यथार्थ को सामने लाते हैं . उन्हें सादर नमन. द्वय सम्पादक जी का आभार.

  10. बड़ी सटीक समीक्षा । सभी हाइकु यथार्थ बोध कराते हैं। भाव , बिम्ब तथा भाषा सराहनीय हैं। उर्मिला जी को हार्दिक श्रद्धांजलि।

  11. bemisaal haiku…saath hi sashakt samiksha……abhaar..

  12. जीवन की गहन अनुभूतियों का बहुत सशक्त प्रस्तुतीकरण है हाइकुओं में |सारगर्भित समीक्षा के द्वारा सुन्दर श्रद्धा सुमन अर्पित किए आपने | आदरणीया को सादर श्रद्धांजलि नमन |

  13. छोटी किन्तु सार्थक समीक्षा…| उर्मिला जी के हाइकु निसंदेह तारीफ़ के काबिल हैं…| जिस तरह से उन्होंने बिम्बों-प्रतिबिम्बों का प्रयोग किया है, वो प्रशंसनीय है…|
    बधाई और आभार…|

  14. उर्मिला जी के सभी हाइकु मन को छूते हैं. सभी हाइकु बेहद भावपूर्ण है. सुरेन्द्र जी ने ‘अनुभूति’ की बहुत अच्छी समीक्षा की है. बधाई.


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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