Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 20, 2014

खो गया गाँव


पारस दासोत

1

चौपाल कहाँ

बैलगाड़ी घुँघरू

खो गया गाँव ।

2

बनके बाबू

चाटी शहर –माटी

गाँव का गाँव ।

3

रो-रो पीढ़ी को

गाँव हो गया बूढ़ा

उम्र पहले ।

4

गाँव का रूप

प्रकृति का शृंगार

प्यारा एकान्त ।

5

गाँव यूँ बोला-

अन्तिम साँस मेरी

दिखादे गाँव ।

6

गाँव की गाड़ी

गाती गाँव का गीत

रक-चूँ-रक ।

7

गाँव का घर

निकले धुँआ छन

छत कोलाज़ ।

8

गाँव का स्कूल

न मास्टर न बच्चे

है सरपंच ।

9

घर से घर

मिल बना है गाँव

एक ही घर ।

10

आकाश गंगा

पहाड़ पे उतरी

चढ़ा है गाँव ।

11

आया बुढ़ापा

जागी भूख मन मन की

सोई तन की ।

12

भूख चालाक

वक्ष में नदी बनी

मैं डूब गया ।

13

भूख का गीत

गाया प्रभु- आँगन

मैं बच्चा रोया ।

14

उलझा धागा

भूल-भुलैया भूख

कैसे निकलूँ !

-0-


Responses

  1. ग्रामीण सभ्यता को इंगित भावाभिव्यक्ति “घर से घर / मिल बना है गाँव / एक ही घर” दिल को छूती है .आदरणीय दासोत जी को बधाई.

  2. sundar haiku ….. badhai aapko

  3. बहुत सुन्दर हाइकु….बधाई ।

  4. बहुत सुंदर हाइकु बधाई आपको

  5. सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई…|

  6. khoobsurat haiku …..badhai.


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