Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 17, 2014

एक मुट्ठी रोशनी


वरिष्ठ रचनाकार श्रीमती  उर्मिला कौल का 15 अगस्त को देहावसान हो गया। इनका जन्म 25, फरवरी 1930 को अम्बाला में हुआ । इन्होंने हिन्दी , पंजाबी और अंग्रेज़ी में साहित्य रचना की । इनके हाइकु लेखन की शुरुआत 1977-78 में हुई । इनका प्रथम हाइकु संग्रह अनुभूति 1995 में प्रकाशित हुआ।वर्णक्रम में आपने कहीं कहीं छूट भी ले ली है। रामेश्वर काम्बोज हिमांशु की भेंट 12 दिसम्बर 2010 को 23 वे अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन के अवसर पर बिहार राज्य माध्यमिक शिक्षक भवन में आयोजित कार्यक्रम के अवसर पर हुई । गौर वर्ण, श्वेतकेशा , तेजस्वी मुखमण्डल , बड़े रचनाकार के अहंकार से कोसों दूर । उसी दिन का लिया गया फोटो हिन्दी हाइकु पर मौजूद है। उनका एक हाइकु उन्हीं  के लिए-

          अँधेरी राह

          एक मुट्ठी रोशनी (थी )

          बुझ गई रे ।

हिन्दी हाइकु परिवार अपने इन वरिष्ठ रचनाकार के अवसान पर हार्दिक श्रद्धांजली अर्पित करता है। डॉ सुधा गुप्ता और डॉ सतीशराज पुष्करणा की प्रेषित श्रद्धांजली यथावत् दी जा रही है।

डॉ हरदीप कौर सन्धु रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

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1-डॉ सुधा गुप्ता

 डॉ सुधा गुप्ता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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 2-डॉ सतीशराज पुष्करणा

SATIRAJ

3-डॉ उर्मिला अग्रवाल

दीदी उर्मिला कौल के हाइकु मुझे बहुत प्रिय रहे हैं। डॉ भगवत शरण अग्रवाल जी ने

‘हिन्दी कवयित्रियों की हाइकु -काव्य साधना’ में जिन छह  प्रमुख कवयित्रियों  पर पुस्तक केन्द्रित की गई , उनमें दीदी उर्मिला कौल भी । संवेदना के धरातल पर उनके हाइकु हृदय-स्पर्शी रहे हैं। अत्यन्त आत्मीयकौल दीदी का जाना हाइकु की क्षति तो है ही , मेरी  व्यक्तिगत हानि भी है। मेरी तरफ़ से विनम्र श्रद्धांजली !

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4-डॉ सुरेन्द्र वर्मा

 हिंदी हाइकु में प्रसिद्ध हाइकुकार उर्मिला कौल का निधन का समाचार पढ़कर बहुत दुःख हुआ. उनसे मेरा संपर्क हाइकु के माध्यम से ही था मैंने उनकी एकाधिक रचनाओं की पुस्तक समीक्षा भी की थी. वे जब भी इलाहाबाद आती थीं -अपनी लड़की के पास- तो मुझसे यहाँ बिना मिले नहीं जाती थी ।

 surendraverma389@gmail.com

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Responses

  1. श्रद्धांजलि…

  2. विनम्र श्रद्धांजली ….. शत शत नमन

  3. विनम्र श्रद्धांजलि…ईश्वर उनके परिवार और प्रियजनो को इस दुःख की घड़ी को सहने की क्षमता दे…|
    नमन…

  4. divangat atma ko shradhanjali arpit karte hue-

    .suuna basera,
    ud gaya hai pakhi,
    jane kidhar!

    .maun svaron se
    ,de rahi shradhanjali
    ,adrishya hai jo.

    pushpa mehra.

  5. हाइकु जगत की इक चिरैया उड़ चली .. अश्रुपूरित श्रद्धांजलि..

  6. विनम्र श्रद्धांजली !!!

  7. shradheya urmila kaul se parichay yadyapi bahut purana nahi tha par pragaad tha. unke hi ek haiku ko prastut karte hue shradhanjali ;-

    odh so gayi
    sharad ki chandni
    bholi dharati

    aur ek taanka bhav-bhini vidaee
    ek lahar
    lahar-lahar ke
    huee sagar r
    riti na hogi kabhi
    sudhiyon ki gaagar
    rekha rohatgi

  8. दिवंगत की आत्मा को ईश्वर शान्ति प्रदान करे!!! हार्दिक श्रद्धांजलि!!!
    डाॅ. कुँवर दिनेश, शिमला

  9. यह खबर पढ़कर मैं तो एकदम सन्न – सी हो गई . ‘ आधी आबादी का आकाश ‘ में उनकी रचना पढ़ी थी , तभी मुझे उनसे आत्मीयता का जुड़ाव हो गया था . वे आज भी हमारे बीच अपने लेखन से विश्व साहित्य जगत से जुडी हुई हैं .
    उन्हीं का हाइकु –

    ‘ उसने बांटे
    सुख – दुःख के पत्ते
    दुःख ही जीता .’

    मेरी एवं वाशी , नवी मुम्बई के साहित्य समाज की ओर से हार्दिक श्रद्धांजलि . के साथ –

    धरा में सोई
    नहीं जगा सकेंगे
    रिश्ते साँसों के .

  10. विनम्र श्रद्धांजली . शत-शत नमन…

  11. सादर श्रद्धांजली ।

  12. विनम्र श्रद्धांजली …

  13. sadar bhavbheeni shradhaanjali

  14. सादर श्रद्धांजली ।

  15. सादर श्रद्धांजलि ! ।

  16. जानकर दुःख हुआ की उर्मिला जी अब नही रहीं। लेकिन रचनाकार अपनी कृतियों में जिंदा रहता है। ईश्वर उनकी आत्मा को अपनी शान्ति में रखे।

    डा.जया नर्गिस

  17. Haardik shrddhanjali

  18. हिन्दी साहित्य के लिए बहुत बड़ी क्षति । ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति दे ।
    सादर श्रद्धाञ्जलि !

  19. हिन्दी – जगत की बड़ी क्षति । विनीत श्रद्धांजलि

  20. विनम्र श्रधांजलि.

  21. sadar shrddhanjli…


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